फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला कराने के मामले में एसआईटी ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें मुजफ्फरनगर निवासी प्रवीण कुमार, हरिद्वार के जगपाल सिंह और बिजनौर निवासी रामपाल सिंह शामिल हैं।
आरोप है कि इन्होंने अपनी बेटियों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र और आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज कूटरचित तरीके से तैयार कराए थे। अब तक इस प्रकरण में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
एसएसपी के निर्देश पर एसपी ग्रामीण-1 जया बलूनी के नेतृत्व में गठित एसआईटी मामले की जांच कर रही है। 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेनटाउन थानों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच में अभ्यर्थियों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज फर्जी पाए गए थे।
25 और 30 लाख रुपये देकर बनवाए प्रमाणपत्र
एसआईटी की पूछताछ में प्रवीण कुमार और जगपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटियों खुशी और स्वाति के एमबीबीएस में दाखिले के लिए पूर्व में गिरफ्तार एजुकेशन कंसल्टेंट रूपेश पंडित से संपर्क किया था। पुलिस के अनुसार, रूपेश मेरठ में मिकोडो (MECODO) पाठशाला नाम से कंपनी संचालित करता था। वह निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन पर दाखिला दिलाने का काम करता था। आरोप है कि दोनों ने अपनी बेटियों के लिए फर्जी आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार करवाए। इन दस्तावेजों के आधार पर खुशी का मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराया गया, जबकि स्वाति को नीट काउंसलिंग में शामिल कराया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रमाणपत्र बनवाने के एवज में प्रवीण ने रूपेश को 25 लाख रुपये और जगपाल ने 30 लाख रुपये दिए थे।
हरिद्वार के मेडिकल कॉलेज में कराया दाखिला
तीसरे आरोपी रामपाल सिंह ने पूछताछ में बताया कि उसने अपने परिचित विशाल कुमार के साथ मिलकर बेटी तृप्ति के एमबीबीएस में दाखिले के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए थे। इनमें स्थायी निवास प्रमाणपत्र, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र और आधार कार्ड शामिल थे। पुलिस के अनुसार, इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर तृप्ति का हरिद्वार स्थित जीएमसी मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराया गया।
शिक्षण संस्थानों से जुटाए साक्ष्य
एसआईटी ने जांच के दौरान अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पतों का सत्यापन किया तो वे गलत पाए गए। इसके बाद टीम ने संबंधित शिक्षण संस्थानों से दाखिले से जुड़े दस्तावेज कब्जे में लिए। इनकी जांच के दौरान अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी मिली। इसी आधार पर तीनों को पूछताछ के लिए बुलाया गया और साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया। एसआईटी का कहना है कि मामले के अन्य पहलुओं की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।



