38.1 C
Dehradun
Saturday, May 28, 2022
Homeदेशसीडीएस जनरल बिपिन रावत मैमोरियल लेक्चर में बोले पूर्व एयर चीफ भदौरिया,...

सीडीएस जनरल बिपिन रावत मैमोरियल लेक्चर में बोले पूर्व एयर चीफ भदौरिया, स्वदेशी हथियार प्रणाली के विकास में मदद के लिए प्राइवेट सेक्टर की भूमिका अहम

वाई एस बिष्ट
नई दिल्ली। देश के पहले सीडीएस स्व. जनरल बिपिन रावत की 64वीं जयंती के अवसर पर दिल्ली और देहरादून में दो बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। दिल्ली में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर सभागार में हिल-मेल फाउंडेशन की ओर से देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत मैमोरियल लेक्चर का आयोजन किया गया।


पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया, सीडीएस जनरल रावत के भाई कर्नल (सेवानिवृत) विजय सिंह रावत और उनके मामाजी कर्नल (सेवानिवृत) सत्यपाल परमार ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।


इस कार्यक्रम में पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल (रिटा.) आरकेएस भदौरिया मुख्य वक्ता थे। जनरल बिपिन रावत स्मृति व्याख्यान में एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने कहा कि दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने जोर देकर कहा कि देश के लिए स्वदेशी हथियार प्रणालियों का उत्पादन करने में मदद करने के लिए निजी क्षेत्र के उद्योग को सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के साथ एक समान अवसर दिया जाना चाहिए।


इस कार्यक्रम में भारतीय थल सेना, वायु सेना, नौ सेना और कोस्ट गार्ड के अधिकारियों के अलावा कई सेवानिवृत्त अधिकारी ने भी भाग लिया। इसमें सीडीएस जनरल रावत के भाई कर्नल (सेवानिवृत) विजय सिंह रावत और उनके मामाजी कर्नल (सेवानिवृत) सत्यपाल परमार भी शामिल हुए। इस अवसर पर जनरल बिपिन रावत के परिवार के सदस्यों ने आरकेएस भदौरिया को हिल रत्न से भी सम्मानित किया।


देहरादून में दून विश्वविद्यालय की ओर से देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत स्मृति व्याखान माला आयोजित किया गया। ’सीमांत सुरक्षा-राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्य अतिथि थे। दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डा.) सुरेखा डंगवाल के अनुसार यूनिवर्सिटी के दिवंगत सीडीएस जनरल रावत की तस्वीर को उत्तराखंड की महान विभूतियों के साथ लगाया जाएगा।


सीडीएस जनरल बिपिन रावत का रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण में भी एक बड़ा योगदान था। पिछले पांच-छह साल से थलसेना, वायुसेना और नौसेना में स्वदेशी हथियारों को ही तरजीह दी जा रही थी, तो इसका एक बड़ा श्रेय जनरल रावत को जाता है।

अगर विदेशी हथियार और सैन्य साजो-सामान खरीद भी रहे थे तो उसे मेक इन इंडिया के तहत देश में ही निर्माण करने की कोशिश रहती थी। यही कारण था कि थलसेना स्वदेशी अर्जुन टैंक लेने को तैयार हुई और वायुसेना ने एलसीएच अटैक हेलीकॉप्टर लेने को हामी भरी थी। जनरल बिपिन रावत रक्षा क्षेत्र में सुधारों के लिए हमेशा जाने जाते रहेंगे।

RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
- Advertisment -
- Advertisment -
- Advertisment -

Most Popular

- Advertisment -

Recent Comments

error: Content is protected !!