14 C
Dehradun
Monday, December 6, 2021
Homeस्वास्थ्यपरक्यूटिनियस एण्डोस्कोपिक तकनीक: बिना चीरा टांके के, बिना बेहोश किए मरीज के...

परक्यूटिनियस एण्डोस्कोपिक तकनीक: बिना चीरा टांके के, बिना बेहोश किए मरीज के उपचार के लिए है लाभकारी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में आयोजित परक्यूटिनयिस एण्डोस्कॉपिक लाइव वर्कशॉप के दौरान मेडिकल चिकित्सा के क्षेत्र में इस तकनीक को बहुलाभकारी बताया गया। इस दौरान इस तकनीक से ऐसे 2 मरीजों का सफल उपचार भी किया गया, जो लम्बे समय से स्पाइन पेन की समस्या से जूझ रहे थे।

एम्स ऋषिकेश में एनेस्थिसिया विभाग की पेन मेडिसिन डिवीजन द्वारा आयोजित लाइव वर्कशॉप में परक्यूटिनियस एण्डोस्कोपिक तकनीक को बिना चीरा और टांके के तथा बिना बेहोश किए मरीज के उपचार के लिए लाभकारी चिकित्सा पद्धति बताया गया।

इस अवसर पर अपने संदेश में एम्स निदेशक प्रोफेसर अरविन्द राजवंशी ने कहा कि एम्स ऋषिकेश में उपलब्ध यह तकनीक निकट भविष्य में चिकित्सा की दृष्टि से दर्द की समस्या से जूझने वाले मरीजों के उपचार के लिए बेहतरीन पद्धति साबित होगी।

उन्होंने संस्थान के ऐनेस्थिसिया विभाग के अनुभवी पेन फिजिशियनों की टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि देशभर में एम्स ऋषिकेश ही एकमात्र ऐसा चिकित्सा संस्थान है, जहां अनुभवी चिकित्सकों द्वारा पेन मेडिसिन का डीएम कोर्स संचालित किया जा रहा है।

डीन एकेडेमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने कहा कि परक्यूटिनियस एण्डोस्कोपी विधि से किया जाने वाला उपचार शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द की शिकायत वाले मरीजों के लिए सुलभ और सरलतम इलाज है। उन्होंने इस तकनीक को बढ़ावा दिए जाने की बात कही।

मेडिकल सुपरिटेन्डेन्ट प्रोफेसर अश्वनि कुमार दलाल ने इस प्रकार के आयोजनों को चिकित्सकों और आम जनमानस के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सेमिनारों के आयोजन से अनुभव साझा होेते हैं और बीमारियों तथा उनके निदान की नई-नई तकनीकों को सीखने और समझने का मौका मिलता है। डीन एक्जामिनेशन प्रोफेसर जया चतुर्वेदी ने भी कार्यशाला को संबोधित किया।

लाइव वर्कशॉप के दौरान इस पद्धति द्वारा 2 ऐसे मरीजों का इलाज भी किया गया जो लम्बे समय से स्पाइन पेन की समस्या से ग्रसित थे। इस दौरान राम मनोहर लोहिया अस्पताल दिल्ली के पेन फिजिशियन डॉ. अनुराग अग्रवाल ने पेन मेडिसिन से सम्बन्धित इलाज की विभिन्न पद्धतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि स्पाइन एण्डोस्कोपी ऐसी तकनीक है जिसमें बिना बेहोश किए मरीज का दूरबीन विधि से इलाज किया जाता है। यंहा तक कि मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है। डॉक्टर अग्रवाल ने इस तकनीक की विशेषताओं और इस विधि से होने वाले इलाज से मरीज को होने वाले लाभ के बारे में विस्तार से समझाया।

पेन फिजिशियन डॉक्टर सुशील जायसवाल ने कहा कि परक्यूटिनियस एण्डोस्कोपी विधि से मरीज के शरीर में दबी नसों को आसानी से खोल दिया जाता है। ऐसा करने से मरीज को इलाज के लिए सर्जरी करवाने की आवश्यकता नहीं होती है। ऐनेस्थिसिया के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय अग्रवाल और पेन मेडिसिन डिवीजन इंचार्ज डॉ. अजीत कुमार ने वर्कशॉप के आयोजन के उद्देश्य और लाभ के बारे में बारीकी से प्रकाश डाला।

लाईव वर्कशॉप में आसाम, बनारस, दिल्ली, बरेली, चेन्नई आदि देशभर के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों से पहुंचे पेन फिजिशियन विशेषज्ञ चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान एम्स की डीन एक्जामिनेशन व गायनी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जया चतुर्वेदी, एनेस्थिसिया विभाग के डॉ. वाई.एस. पयाल, डॉ. प्रवीन तलवार, डॉ. भावना समेत 20 से अधिक अन्य पेन फिजिशियन शामिल थे।

RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
- Advertisment -
- Advertisment -
- Advertisment -
- Advertisment -
- Advertisment -

Most Popular

- Advertisment -

Recent Comments

error: Content is protected !!