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Saturday, February 7, 2026
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Haridwar: बोले सीएम योगी आदित्यनाथ, पहले था माफियाराज; दंगा, गुंडा, डंडा मुक्त उत्तर प्रदेश में अब सब चंगा

हरिद्वार। समाधि मंदिर स्थापना समारोह में लोकार्पण करने हरिद्वार पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से संत परंपरा में शिष्य और गुरु की महत्ता और इसके संवाहकों की प्रशंसा की। वहीं, उन्होंने संत परंपरा से सत्ता के संवाहक बनीं शक्तियों का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्व के हालात पर चर्चा की और वर्तमान परिदृश्य को भी रखा। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दंगा, गुंडा, डंडा मुक्त उत्तर प्रदेश में अब सब चंगा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले उत्तर प्रदेश में व्यवस्था को कोसा जाता था। आज आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में देश आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि रामभक्तों पर गोलियां चलती थीं, रामभक्तों को अपमानित किया जाता था। न बेटी सुरक्षित थी ना व्यापारी सुरक्षित था। आज सबमें बदलाव है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर को रामराज्य की परिकल्पना की पहली शुरुआत है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज माघ मेला जो कभी कल्पवासियों का मेला होता था आज वहां पौष पूर्णिमा से लेकर अब तक 21 करोड़ श्रद्धलु त्रिवेणी में डुबकी लगा चुके हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रशासन कैसे चलता है यह संत परंपराओं और आश्रम पद्धतियों के साथ उत्तर प्रदेश में दिख रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले लूट आधारित तंत्र उत्तर प्रदेश में था। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब अराजकता, दंगे फसाद नहीं हैं। पहले किसान करदाता बन गया था। आज किसान वास्तव में अन्नदाता बन गया है। कामगार, कारिगर आज स्वरोजगार से जुड़ गए, यही ग्राम स्वरोजगार की अवधारण को दर्शाता है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ऋषियों की मुनियों की तपस्या के बल पर भारत विश्व की जीडीपी में अपना स्थान रखता था।

उन्होंने कहा कि आक्रांताओं से पहले भारत के गांव इस जीडीपी में अहम थे। उन्होंने कहा आज भी उसी तर्ज पर गांवों का विकास किया जा रहा है। स्वरोजगार भारत का मूल था आज फिर से उसी पुरानी पंरपराओं से देश को जोड़ा जा रहा है। ग्राम स्वराज की परिकल्पना को फिर से साकार किया जा रहा है।

योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज की ओर से भारत माता मंदिर की स्थापना के संस्मरण से अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि करुणा, मैत्री और राष्ट्रभक्ति जिसके जीवन के मूल्य थे उन्होंने भारत माता मंदिर जैसी राष्ट्रीय एकता के प्रतीक को स्थापित किया। यह मंदिर जाति, क्षेत्र और भाषा की सीमाओं से ऊपर उठकर संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधता है। उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज सनातन परंपरा के सशक्त ध्वजवाहक थे। उन्होंने कहा कि 1982 में राष्ट्रभक्त के मूल्योंं के साथ उन्होंने कभी सम विषम परिस्थितियों में कोई समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि भारत माता मंदिर के लोकार्पण में तत्कालिन प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी शामिल हुईं वह भी तत्कालिन सर संघ चालक बाल साहब देवरस के साथ। यह अकल्पनीय संयोग था, इसमें राष्ट्राध्यक्ष के सम्मान के साथ राष्ट्र के मूल्यों के साथ कोई समझौता नहीं किया गया। स्वामी सत्यमित्रानंद ने अपने नाम के अनुरुप कार्य किया।

सीएम धामी को दी शुभकामनाएं
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखंड भारत की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से अलग यह राज्य आज विकास के आयाम लिख रहा है। उत्तर प्रदेश को देश में दूसरे सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का राज्य बताते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड भी आज विकास और विरासत के साथ अपने पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रधानमंत्री के निर्देशन में विकास और विरासत को संजोकर कार्य कर रहे हैं। इस पर उन्होंने मुख्यमंत्री को बधई भी दी। कहा कि पिछले 11 वर्षों में हमने विकास के साथ विरासत का दृश्य उत्तर प्रदेश में भी देखा है। अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज, चारधाम, हरिद्वार विकास एक लंबी गाथा विरासत को संरक्षित करते हुए आगे बढ़ रहा है। यह नए भारत की एक गाथा है, जिसका वर्तमान पीढ़ी इंतजार कर रही थी। निरंतर पथ पर विकसित होते देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि असमंजस की स्थिति से उभारने के कार्य किया जा रहा है।

संचालक ने जब योगी को राष्ट्र का भविष्य कहकर संबोधित किया तो संत करने लगे उद्घोष
कार्यक्रम का संचालन कर रहे महामंडलेश्वर डॉ. हरिचेतनानंद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधन के लिए आमंत्रित करते इससे पूर्व उन्होंने राष्ट्र का भविष्य कहकर योगी को संबोधित किया। उनके इस शब्द को सुनते ही सामने बैठे संत, महंत, यति जय श्रीराम का उद्घोष करने लगे। काफी देर तक पांडाल जय श्रीराम के जयकारे से गुंजता रहा। आखिरकार योगी ने माइक पर गरजती आवाज में जब सियावर राम चंद्र की जय उद्घोष किया तो उनकी जयकार में स्वर मिलते हुए दर्शक दीर्घा शांत मुद्रा में आई। असहज स्थिति उस समय उत्पन्न हो गई जब योगी आदित्यनाथ का संबोधन समाप्त हुआ और यति, श्रद्धालु और संत दर्शक दीर्घा से उठकर जाने लगे। इस पर फिर से संचालन कर रहे महामंडलेश्वर डॉ. हरिचेतनानंद ने माइक संभाला और रक्षा मंत्री का संबोधन शुरू हुआ।

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