Homeहमारा उत्तराखण्डइस विभाग के 72 उपनलकर्मियों को झटका, सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

इस विभाग के 72 उपनलकर्मियों को झटका, सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

उत्तराखंड में राज्य कर विभाग में तैनात उपनलकर्मियों के नियमितीकरण और सेवा संबंधी लाभों के मामले में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी। सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुज्ञा याचिका (एसएलपी) दायर करेगी। इसके लिए शासन ने तत्काल राज्य कर विभाग को प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं।

आठ जून को शासन स्तर पर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में न्याय विभाग, वित्त, राज्य कर, कार्मिक और सैनिक कल्याण विभाग के अपर सचिव व वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में हाईकोर्ट के विभिन्न रिट याचिकाओं में पारित आदेशों के क्रियान्वयन और उपनल कर्मियों के प्रत्यावेदनों का निस्तारण करना था।

विभाग के अंतर्गत कुल 37 रिट याचिकाओं के तहत 116 डेटा एंट्री ऑपरेटर आ रहे हैं, जिनमें से 105 कर्मियों ने सचिव के समक्ष अपने प्रत्यावेदन दिए थे। उन्होंने नियमितीकरण, कृत्रिम व्यवधान समाप्त करना, समान कार्य के लिए समान वेतन, 10 वर्ष से अधिक की नियमित सेवा के दृष्टिगत एरियर, मानदेय की मांग, सेवा से बाहर किए जाने की अवधि के वेतन का भुगतान मांग की थी।

सरकार के लिए प्रशासनिक और वित्तीय संकट

शासन स्तर पर की गई समीक्षा में विभाग में कार्यरत 96 कर्मियों को चार श्रेणियों में बांटा गया। इसमें सबसे बड़ा पेंच श्रेणी-3 के उन 72 कर्मियों को लेकर फंसा है, जिनकी सेवा में समय-समय पर कृत्रिम व्यवधान रहा है। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि सैनिक कल्याण विभाग के शासनादेश के अनुसार, केवल उन्हीं उपनल कर्मियों को चरणबद्ध रूप से लाभ दिया जा सकता है जो कट-ऑफ डेट 12 नवंबर 2018 तक निरंतर (बिना किसी ब्रेक) नियोजित रहे हों।

बैठक में यह बात उठी कि जिन राज्य कर विभाग के 72 कर्मियों की सेवा में कृत्रिम व्यवधान रहा है, उनके प्रत्यावेदनों पर सकारात्मक विचार करना सैनिक कल्याण विभाग की नीति और नियमों का उल्लंघन होगा। अगर ऐसा किया गया तो अन्य विभागों से भी ऐसी मांगें उठेंगी। इससे सरकार के लिए प्रशासनिक और वित्तीय संकट पैदा हो सकता है। लिहाजा तय किया गया कि राज्य कर के इन कर्मचारियों पर आए हाईकोर्ट के आदेशों पर सरकार सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करेगी। इसके लिए राज्य कर विभाग से प्रस्ताव मांगा गया है।

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