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Tuesday, December 6, 2022
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Uttarkashi Avalanche : एक पर्वतारोही का शव बेस कैंप से मातली हेलीपैड पहुंचा, लापता दो की तलाश जारी

उत्तरकाशी में हिमस्खलन की चपेट में आए एक पर्वतारोही का शव आज बेस कैंप से मातली हेलीपैड लाया गया। शव की पहचान सौरव बिस्वास पुत्र निमाई बिस्वास, निवासी वेस्ट बंगाल के रूप में की गई है। शव का पोस्टमार्टम जिला चिकित्सालय में किया जा रहा है।

बता दें कि चार अक्तूबर को डोकरानी बामक ग्लेशियर क्षेत्र में हुए हिमस्खलन हादसे में 29 पर्वतारोही लापता हो गए थे। जिनमें से 27 के शव मिल गए थे। 26 शव परिजनों को सौंप दिए गए थे। बंगाल के पर्वतारोही का शव आज परिजनों को सौंपा जाएगा। दो पर्वतारोही अभी भी लापता चल रहे हैं।

निम के रजिस्टार विशाल रंजन ने कहा कि दो दिन तक लगातार भारी हिमपात व मौसम खराब रहने से रेस्क्यू नहीं हो पा रहा था। आज क्षेत्र में मौसम साफ है। इसलिए लापता पर्वतारोहियों की तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान दोबारा शुरू किया गया है।

उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में हुए हिमस्खलन हादसे में जान गंवाने वाले 10 और प्रशिक्षु पर्वतारोहियों के शव रविवार को मातली हेलीपैड पर लाए गए। सभी शवों को पीएम के बाद परिजनों को सौंपा गया। वहीं आज सोमवार को पांच शव और मातली हेलीपैड लाए गए।  अब तक कुल 21 शव परिजनों को सौंपे जा चुके हैं जबकि दो प्रशिक्षुओं की तलाश जारी है। 

बीते चार अक्तूबर को द्रौपदी का डांडा-2 चोटी पर आरोहण के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आकर निम के प्रशिक्षु पर्वतारोही व प्रशिक्षकों सहित 29 लापता हो गए थे। छह अक्तूबर से एसडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, हॉज व निम ने घटना स्थल पर रेस्क्यू अभियान शुरू किया था। बीते शनिवार तक 11 शव परिजनों को सौंप दिए गए थे। रविवार को भी पोस्टमार्टम के बाद 10 शव परिजनों को सौंप दिए गए। अब तक कुल 21 शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं। 

सेना के प्रशिक्षु को दी अंतिम सलामी

रविवार को बेस कैंप से मातली हेलीपैड पर पहुंचाए गए 10 शवों में लांस नायक शुभम सिंह का पार्थिव शरीर भी था जिन्हें सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई। इस दौरान जिलाधिकारी अभिषेक रूहेला, विधायक सुरेश चौहान, सीओ प्रशांत कुमार ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। 

मृतक 

  • संदीप सरकार
  • संतोष कुकरेती
  • श्री बंशीधर रेड्डी
  •  रजत सिंगल 
  • अमित कुमार सिंह

कब-कब क्या हुआ

  • 4 अक्तूबर को करीब पौने नौ बजे एवलांच की चपेट में आए प्रशिक्षु व प्रशिक्षु पर्वतारोही
  • 4 अक्तूबर को ही फर्स्ट रिस्पांडर ने बरामद किए 4 शव।
  • 6 अक्तूबर को रेस्क्यू दल घटना स्थल पर पहुंचा, 15 शव किए बरामद।
  • 7 अक्तूबर को रेस्क्यू दल ने 7 और शव बरामद किए। घटना के दिन बरामद चार शवों को उत्तरकाशी पहुंचाया गया।
  • 8 अक्तूबर को 7 शवों को एडवांस बेस कैंप से मातली हेलीपैड पहुंचाया गया। वहीं रेस्क्यू दल ने घटना स्थल से एक और शव बरामद किया। 
  • 9 अक्तूबर को 10 शव सेना के हेलीकाप्टर से पहुंचे मातली।

( अब तक कुल 21 शव परिजनों को सौंप जा चुके हैं, 6 शव एडवांस बेस कैंप में हैं, 2 अभी भी लापता हैं।)

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द्रौपदी का डांडा -2 चोटी पर हिमस्खलन की चपेट में आए 29 में से 27 शव निकाल लिए गए हैं। हालांकि जिला मुख्यालय 11 शव ही पहुंचाए गए हैं। वायु सेना का विमान आज रविवार सुबह शेष 16 शवों को लाने के हेली बेस कैंप के लिए रवाना हुआ, जिनमें से दस शव मातली हेलीपैड लाए गए हैं। जबकि दो लापता प्रशिक्षु पर्वतारोहियों की खोजबीन जारी है।

हिमस्खलन की चपेट में आए सात पर्वतारोहियों के शव शनिवार को मातली हेलीपैड पहुंचाए गए। अब तक कुल 11 शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं। बार-बार मौसम खराब होने के कारण रेस्क्यू प्रभावित हो रहा है। तीन अभी भी लापता हैं। बीते चार अक्तूबर को नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के 29 सदस्य हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे।

चार शव घटना के दिन ही फर्स्ट रिस्पांडर ने ढूंढ लिए थे। प्रशिक्षु पर्वतारोहियों व प्रशिक्षकों की तलाश के लिए एसडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, हाई एल्टीट्यूड वार फेयर स्कूल गुलमर्ग व निम के सदस्यों ने घटना स्थल पर छह अक्तूबर से रेस्क्यू अभियान शुरू किया था।

रेस्क्यू दल ने चार शव शुरू के दिन ही निकाल लिए थे। इसके बाद छह अक्तूबर को 15 व सात अक्तूबर को सात शव बरामद किए गए। कुल 26 शव मिल चुके हैं और तीन अब भी लापता हैं। शनिवार को सात शव मातली हेलीपैड पहुंचाए गए। यहां आईटीबीपी के अस्पताल में पीएम के बाद शव परिजनों को सौंपे गए।

अब तक कुल 11 शव परिजनों को सौंपे जा चुके हैं। रेस्क्यू अभियान के लिए दल ने पर्वतारोहियों के एडवांस बेस कैंप से थोड़ी आगे अपना समिट कैंप बनाया हुआ है। घटना स्थल से समिट कैंप तक शवों को लाया जा रहा है। यहां से बेस कैंप तक शवों को सेना के चॉपर से लाया जा रहा है। बेेस कैंप से शवों को एडवांस लाइट हेलीकाप्टर से मातली हेलीपैड लाया ला रहा है। 

इनके शव पहुंचे मातली हेलीपैड
1. शुभम सांगरी पुत्र दिवान सिंह निवासी तल्ला कृष्णापुर, नैनीताल। 
2. दीपशिखा हजारिका पुत्री गोपाल हजारिका, रूपनगर गोहाटी, असम। 
3. सिद्घार्थ खंडूड़ी पुत्र हर्षवर्धन, नेसविला रोड देहरादून। 
4. टिकलू जेरवा पुत्र वालमबुक, शिलांग मेघालय। 
5. राहुल पंवार पुत्र सुखबीर सिंह उत्तरकाशी। 
6. नीतीश दाहिया पुत्र राजवीर सिंह सोनीपत हरियाणा। 
7. रवि कुमार निर्मल पुत्र धीरेंद्र निर्मल, प्रयागराज उत्तरप्रदेश। 

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डोकराणी बामक ग्लेशियर क्षेत्र में रेस्क्यू दल ने शुक्रवार को सात प्रशिक्षु पर्वतारोहियों के शव बरामद किए। सात शव हेलीपैड पर पहुंच गए हैं। आपको बता दें कि अब तक कुल 26 शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि तीन अभी भी लापता हैं। इनकी तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है। घटनास्थल से सभी शवों को एडवांस बेस कैंप की ओर लाने का प्रयास किया जा रहा है।

उच्च हिमालयी क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए निकले नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के 29 सदस्य रविवार को डोकराणी बामक ग्लेशियर में हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद लापता हो गए थे। चार शव घटना के दिन ही फर्स्ट रिस्पांडर ने बरामद कर लिए थे। बीते बृहस्पतिवार को आईटीबीपी, एसडीआरएफ, हॉज (हाई एल्टीट्यूड वार वेलफेयर स्कूल गुलमर्ग) व सेना ने घटना स्थल पर रेस्क्यू शुरू किया था और प्रशिक्षुओं के शव बरामद किए थे।

जबकि शुक्रवार को रेस्क्यू टीम ने घटना स्थल से सात प्रशिक्षु पर्वतारोहियों के शव बरामद किए। अब तक कुल 26 शव बरामद हो चुके हैं। इनमें से दो शव प्रशिक्षकों के हैं और 24 शव प्रशिक्षु पर्वतारोहियों के हैं। अभी भी तीन प्रशिक्षु लापता चल रहे हैं जिनकी तलाश के लिए घटना स्थल पर रेस्क्यू किया जा रहा है।

बीते बृहस्पतिवार को रेस्क्यू दल ने 15 शव बरामद किए थे लेकिन मौसम खराब होने के कारण इन शवों को जिला मुख्यालय नहीं भेजा जा सका था। जबकि शुक्रवार को बरामद शव भी नहीं भेजे जा सके। स्थिति यह है कि 26 शवों में सिर्फ चार शवों को ही जिला मुख्यालय भेजा जा सका।

रेस्क्यू अभियान के पहले दिन  बरामद हुए प्रशिक्षक सविता कंसवाल निवासी लौंथरु उत्तरकाशी, नौमी रावत निवासी भुक्की उत्तरकाशी, प्रशिक्षु अजय बिष्ट निवासी अल्मोड़ा व शिवम कैंथला निवासी शिमला के शव को ही शुक्रवार को एडवांस बेस कैंप से हर्षिल तक हेलीकॉप्टर से भेजा गया। यहां से सेना के एंबुलेस से शव जिला चिकित्सालय भेजे गए। जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। 

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उच्च हिमालयी क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए निकले नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के दल में से 29 सदस्य रविवार को डोकराणी बामक ग्लेशियर क्षेत्र में हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद लापता हो गए थे। इनमें 26 के शव बरामद किए जा चुके हैं। मौसम खराब होने के कारण  रेस्क्यू टीम को भी लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था।

आज शुक्रवार सुबह दो हेलीकॉप्टर घटनास्थल के लिए रवाना हुए। इसके बाद एएलएच हेलीकॉप्टर समिट कैंप से चार शवों को लेकर हर्षिल हेलीपैड पहुंचा। हेलीकॉप्टर द्वारा शवों को मातली हेलीपैड लाने का प्रयास किया गया, लेकिन खराब मौसम के कारण शवों को हर्षित हेलीपैड पर उतारा गया है, जिन्हें अब सड़क मार्ग से उत्तरकाशी भेजा गया।

चार शवों में से दो शव एनआईएम प्रशिक्षक सविता कंसवाल और नौमी रावत उत्तरकाशी औरअजय बिष्ट निवासी अल्मोड़ा और शिवम कैंथोला हिमाचल के हैं। हर्षिल से दो शव आर्मी एम्बुलेंस से और दो शव 108 सेवा से उत्तरकाशी भेजे गए। शवों के उत्तरकाशी पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। एडवांस बेस कैंप में तैनात रेस्क्यू टीम द्वारा सात शव और बरामद कर लिए गए हैं। वहीं तीन की तलाश जारी है।

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उत्तरकाशी के डोकराणी बामक ग्लेशियर क्षेत्र से रेस्क्यू दल ने बृहस्पतिवार को 15 शव बरामद कर लिए। चार शव घटना के दिन ही बरामद हो गए थे। कुल 19 शवों में से चार को ही मातली हेलीपेड पर लाया जा सका है, जबकि 15 को एडवांस बेस कैंप में रखा गया है। वहीं, 10 लोग अब भी लापता हैं।

उच्च हिमालयी क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए निकले नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के दल में से 29 सदस्य रविवार को डोकराणी बामक ग्लेशियर क्षेत्र में हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद लापता हो गए थे। बृहस्पतिवार सुबह करीब साढ़े सात बजे से घटना स्थल पर रेस्क्यू अभियान शुरू हुआ। पैदल गई एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी की टीम बुधवार को घटना स्थल से तीन घंटे की दूरी तक पहुंच गई थी।

बृहस्पतिवार सुबह पौ फटते ही रेस्क्यू दल ने घटना स्थल की ओर बढ़ना शुरू किया। करीब साढ़े सात बजे दल ने घटना स्थल पर पहुंच कर रेस्क्यू अभियान शुरू किया। जबकि हाई एल्टीट्यूड वार वेलफेयर स्कूल गुलमर्ग की टीम मातली हेलीपैड से सीधे घटना स्थल पर उतरी। यहां से 15 शव बरामद किए गए। इसकी सूचना मिलते ही परिजन हेलीपैड पर जमा हो गए।

करीब दोपहर 2 बजे प्रशासन ने परिजनों को बताया कि घटना स्थल पर मौसम खराब होने के कारण शवों को अभी लाना संभव नहीं है। मौसफ साफ होने का इंतजार किया जा रहा है। कुछ देर बाद परिजन निराश होकर लौट गए। वहीं शाम को चार शव मातली हेलीपैड लाए गए। संभावना जताई जा रही है कि बाकी को शुक्रवार को ले आया जाएगा।

घटना स्थल पर निम के 42, आईटीबीपी के 12, एसडीआरएफ के 8, हाई एल्टीट्यूट वार फेयर स्कूल गुलमर्ग (हॉज) के 14 व सेना के 12 सदस्य रेस्क्यू अभियान में जुटे हुए हैं। हॉज की टीम बृहस्पतिवार सुबह ही मातली हेलीपैड पहुंची थी। बाद में यहां से घटना स्थल के लिए रवाना हुई। रेस्क्यू दल के सभी सदस्य पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं।

घटना स्थल बहुत अधिक ऊंचाई पर है। रेस्क्यू के लिए सुबह धूप आने तक का समय बेहतर रहता है। यहां सूरज निकलते ही कोहरा छाने लगता है। साथ ही यहां पल-पल मौसम भी बदल रहा है। बृहस्पतिवार को भी यहां बर्फबारी हुई। 

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान का द्रौपदी का डांडा-2 की तरफ जाते हुए हिमस्खलन की चपेट में आया था। हादसे में जिंदा बचे निम के प्रशिक्षक अनिल कुमार ने यह जानकारी दी है। डोकरानी बामक ग्लेशियर क्षेत्र में स्थित द्रौपदी का डांडा-2 हिमस्खलन घटना के बाद निम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया था कि हादसा चोटी से उतरने के दौरान हुआ था।

बताया जा रहा है कि निम ने घटना के तत्काल बाद जब रेस्क्यू के लिए एसडीआरएफ से संपर्क किया था तो उसे भी हिमस्खलन की चपेट में आने वालों की स्पष्ट संख्या नहीं बताई थी। हादसे में जिंदा लौटे निम के प्रशिक्षक अनिल कुमार का कहना था कि चोटी के आरोहरण के दौरान अचानक हिमस्खलन हुआ जबकि उस समय दल के सदस्य चोटी से महज 100 से 150 मीटर की दूरी पर थे। 

कमांडेंट, एसडीआरएफ मणिकांत मिश्रा ने बताया कि रेस्क्यू टीम सुबह साढ़े सात बजे घटना स्थल पर पहुंच चुकी थी। अब तक मिले 19 शवों में से चार को मातली हेलीपैड ले आया गया। मौसम खराब होने के कारण बाकी शव नहीं पहुंचाए जा सके। मौसम खुलते ही टीमें दोबारा काम पर जुट जाएंगी।

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उच्च हिमालयी क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए निकला नेहरू पर्वतारोहण संस्थान यानी निम का 58 पर्वतारोहियों का दल मंगलवार सुबह हिमस्खलन की चपेट में आ गया। वायुसेना ने रेस्क्यू अभियान चलाकर अभी तक 32 लोगों को बचाया है। वहीं, 16 लोग लापता हैं। जबकि अभी तक 10 लोगों के शव बरामद हुए हैं। बता दें कि वायुसेना ने मंगलवार को चार शव बरामद किए थे, वहीं, आज रेस्क्यू ऑपरेशन में छह शव और बरामद किए गए हैं।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने आज निम पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। वहीं, उन्होंने द्रोपदी का डांडा क्षेत्र का हवाई सर्वे भी किया। 

बेस कैंप में फंसे 33 लोगों में से आज 14 लोगों को आईटीबीपी कैंप मातली लाया गया। 

इन्हें लाए मातली

– दीप सिंह पुत्र श्री कन्हैया लाल, गुजरात।
– रोहित भट्ट पुत्र श्री जगदम्बा प्रसाद, टिहरी गढ़वाल।
– सूरज सिंह, उत्तरकाशी।
– सुनील लालवानी पुत्र बालचंद, मुम्बई।
– आकाश पुत्र मुन्नालाल, मुम्बई।
– अनिल कुमार(नायब सूबेदार, निम) पुत्र विद्याधर सिंह, राजस्थान।
– मनीष अग्रवाल, दिल्ली।
– कंचन सिंह, चमोली।
– अंकित सिंह, देहरादून।
– प्रदीप कुमार, पश्चिम बंगाल।
– अंकुर शर्मा, देहरादून।
– राकेश राणा, उत्तरकाशी। (प्रशिक्षक)
– बबीता, उत्तरकाशी। (प्रशिक्षक)
– रेखा, उत्तरकाशी। (प्रशिक्षक)

बता दें कि उत्तरकाशी के नेहरू पर्वतारोहण संस्थान(निम) में 44 प्रशिक्षुओं, 8 प्रशिक्षकों सहित कुल 58 लोगों का दल 14 सितंबर को एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स के लिए निकला था। 25 सितंबर को यह दल डोकराणी बामक ग्लेशियर क्षेत्र में द्रौपदी का डांडा चोटी के बेस कैंप में पहुंचा।

वहां से सभी चोटी के आरोहण के लिए 5670 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कैंप-1 तक पहुंचे। मंगलवार तड़के चार बजे यह दल द्रौपदी का डांडा चोटी(5771 मी.) पर पहुंचा। लेकिन, कैंप-1 में लौटते समय करीब 8.45 बजे दल भारी हिमस्खलन की चपेट में आ गया। 

नेहरू पर्वतरोहण संस्थान, कंट्रोल रूम 7060717717, 9997254854
निम 8991122725, 8991117711
विशाल रंजन, रजिस्ट्रार, निम  9568919195, 9412420840
देवेंद्र सिंह पटवाल, आपदा प्रबंधन अधिकारी, उत्तरकाशी 9456147974
हेली रेस्क्यू के संचालन के लिए मातली हेलीपैड पर एटीएफ की व्यवस्था की गई है। 
(सचिवालय स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की ओर से मिली जानकारी के अनुसार)

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