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Monday, November 29, 2021
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बारिश का कहरः आपदा में मृतकों की संख्या 69 तक पहुंची, लापता लोगों की तलाश जारी

उत्तराखंड में कुदरती आपदा में मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। बृहस्पतिवार को गढ़वाल में पांच और कुमाऊं में छह शव बरामद किए गए थे। इससे प्रदेश में मृतकों की संख्या 69 पहुंच गई।

सरकारी आंकड़ों में मृतकों की संख्या 64 बताई गई है। छितकुल में मारे गए ट्रैकर इसमें शामिल नहीं हैं। प्रशासन का कहना है कि उनके शव अभी तक निकाले नहीं गए हैं।

27 ट्रैकर अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की तलाश जारी है। वहीं, कई जगहों पर फंसे पर्यटकों को भी निकालने का काम जारी है।

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उत्तराखंड में विगत दिनों आई आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 62 हो गई है। गुरुवार को बागेश्वर जिले की सुंदरढूंगा घाटी में चार पर्यटकों की मौत की खबर मिली है।

जानकारी के मुताबिक बागेश्वर जिले के पिंडारी, सुंदरढूंगा व कफनी ग्लेशियर क्षेत्र में अभी भी 54 लोग फंसे हुए हैं। वहीं सुंदरढूंगा घाटी में मैकतोली, भानूटी ग्लेशियर के आस-पास ट्रेक पर गए चार पर्यटकों की मौत हो गई है और दो पर्यटक लापता हैं। यह जानकारी उनके साथ बतौर पोर्टर गए सुंदरढूंगा से सुरेंद्र सिंह पुत्र हरक सिंह ने दी है। कफनी ग्लेशियर ट्रेक में 20 गांव वाले भी फंसे हुए हैं।

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उत्तराखण्ड के कुमाऊं क्षेत्र में बीते दो दिनों में हुई भारी वर्षा के बाद मची तबाही एवं आपदा के बाद राहत-बचाव कार्य जारी हैं। कुमाऊं में बेमौसम बारिश के कहर से सात और गढ़वाल में तीन और लोगों की मौत हुई है। इसके साथ ही आपदा की भेंट चढे़ लोगों की संख्या अब 55 हो गई है।

वहीं, बुधवार को रामनगर में कोसी में बही बच्ची और कांडा (बागेश्वर) में बारिश के दौरान एक पोस्ट ऑफिस कर्मी लापता हैं। गढ़वाल में 14 लोग लापता बताए गए थे जिनमें देर शाम तीन की मौत की पुष्टि हो गई। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी को फोनकर आपदा में हुए नुकसान की जानकारी ली। बुधवार की देर रात देहरादून में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आने की सूचना है। गुरुवार को वह प्रदेश के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे।

ताजा मामले में भारी बारिश के साथ आए मलबे की चपेट में आने से लोहाघाट ब्लॉक में नेपाल सीमा से लगे सुल्ला गांव के कैलाश सिंह (32) उनकी पत्नी चंचला देवी (28), उनके दो बेटों रोहित सिंह (12) और भुवन सिंह (8) की मौत हो गई है। 18 घंटे की मशक्कत के बाद शवों को मलबे से निकाला जा सका।

पिथौरागढ़ जिले की धारचूला तहसील के दारमा घाटी के ग्राम चल के बुग्याल गए दो लोगों की बर्फ में दबकर मौत हो गई। ग्राम लदुआ ढिकुली में ऊंट की सवारी कराने वाले बिजनौर निवासी इस्लामुद्दीन उर्फ मुंशी की सात वर्षीय बेटी आलिया रामनगर में कोसी नदी के तेज बहाव में बह गई।

घटना के वक्त बच्ची बकरियों को चराने नदी किनारे गई थी। बच्ची को बहता देख वहां मौजूद पड़ोस की महिला ने भी तेज पानी में छलांग लगा दी, लेकिन वह बच्ची को नहीं बचा पाई। महिला खुद भी बहती चली गई, उसे किसी तरह बचा लिया गया।

बुधवार को मौसम खुला तो मलबे में दबे लोगों की खोजबीन का काम शुरू हुआ। इस दौरान ओखलकांड के थलाड़ी में एक व्यक्ति की मौत का पता चला। मलबे में ढूंढखोज के दौरान उसका शव बरामद हुआ।

इसके अलावा मंगलवार को मलबे में दबे चार और लोगों के शव मलबे में खोजबीन के दौरान निकाले गए। इनमें दो शव कैंची धाम और दो शव बोहराकोट से निकाले गए। सेना के हेलिकॉप्टर ने पांच बार थलाड़ी (ओखलकांडा) के लिए उड़ान भरी।

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उत्तराखण्ड के कुमाऊं क्षेत्र में बीते दो दिनों में हुई भारी वर्षा के बाद मची तबाही एवं आपदा के बाद राहत-बचाव कार्य जारी हैं। नैनीताल में बुधवार को मलबे से चार और शव बरामद हुए हैं। जिसके बाद अब प्रदेश में सोमवार और मंगलवार को आई आपदा में मृतकों की संख्या 50 तक पहुंच गई है। हालांकि गढ़वाल के कुछ इलाकों में भी नुकसान हुआ, लेकिन इस आपदा में सर्वाधिक प्रभावित कुमाऊं मंडल हुआ।

नैनीताल जिले में कैंची धाम के पास घर में दबी हुई रिचा उम्र 21 साल व अभिषेक उम्र 18 साल के शव पुलिस द्वारा निकाल लिए गए हैं। वहीं बोहरा कोट रामगढ़ में भी दो व्यक्ति संभू दत्त डालाकोटी उम्र 70 साल बसंत डालाकोटी साल 59 साल के शवों को पुलिस व एनडीआरएफ की टीम द्वारा मलबे से निकाल लिया गया है। दोनों स्थानों पर पुलिस द्वारा पंचायत नामा की कार्यवाही की जा रही है।

सोमवार और मंगलवार को निरंतर बारिश के चलते उफान पर आई नदियों ने हल्द्वानी और ऊधमसिंहनगर के तराई वाले क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए थे। गौला पुल की एप्रोच रोड, बारहमासी रोड पर और चल्थी पर निर्माणाधीन पुल क्षतिग्रस्त हो गए।

रामनगर के तमाम रिजॉर्ट के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। काठगोदाम रेलवे स्टेशन की शंटिंग लाइन गौला नदी में समा जाने से काठगोदाम से आने-जाने वाली ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ है।

काठगोदाम से जाने वाली देहरादून जनशताब्दी, दिल्ली जाने वाली संपर्क क्रांति, नई दिल्ली जाने वाली शताब्दी विशेष ट्रेन का संचालन नहीं हो पाया। वहीं काठगोदाम की ओर आने वाली ट्रेनों को विभिन्न स्टेशनों पर टर्मिनेट कर दिया गया है।

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उत्तराखंड में मौसम विभाग की चेतावनी के बाद बीते दो दिनों में हुई भारी वर्षा से पहाड़ का आमजनजीवन पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। प्रदेश के कुमाऊं में बारिश के कारण भूस्खलन, मकान ढहने, पानी में दौड़ते करंट आदि कारणों से अभी तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है।

उत्तराखंड के कुमाऊं में सोमवार और मंगलवार को बेमौसम बादल काल बनकर बरसे। भूस्खलन, मकान ढहने, पानी में दौड़ते करंट आदि कारणों से 37 लोगों की मौत हो गई, जबकि कुछ लोगों के लापता होने की भी आशंका जताई जा रही है।

मंगलवार को नैनीताल में सबसे ज्यादा 27, अल्मोड़ा में छह और चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर और ऊधमसिंह नगर में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। फिलहाल सरकारी दावों में मरने वालों की संख्या 22 बताई गई है। दो दिन की बारिश में प्रदेश में मृतकों की संख्या 43 पहुंच गई है। नौ लापता बताए गए हैं।

उधर, गढ़वाल में मंगलवार को किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं मिली। सोमवार को यहां तीन लोग अपनी जान गंवा बैठे थे। मौसम साफ होने से अवरुद्ध मार्गों को खोलकर दिन भर चारधाम यात्रियों व अन्य फंसे लोगों को निकालने का काम दिन भर चलता रहा।

प्रलयंकारी बारिश से नैनीताल जिले में सबसे अधिक 27 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें चौकटा में पांच, सलड़ी में सात, सुकुना में 9, बोराकोट में दो, चोपड़ा में एक, भीमताल में एक क्वारब में दो की मौत हुई है। अल्मोड़ा जिले में छह लोगों की अलग-अलग जगहों पर मलबे में दबने से मौत हुई।

अल्मोड़ा जिले में आपदा की भेंट चढ़ छह लोगों में तीन लोग भिकियासैंण क्षेत्र के ग्राम रापड के एक ही परिवार के थे। यहां मृतकों में अमर उजाला के पूर्व पत्रकार आनंद नेगी और उनके परिवार के दो अन्य सदस्य शामिल हैं।

वहीं एक महिला अल्मोड़ा चितई गांव की और एक युवती अल्मोड़ा के एनटीडी क्षेत्र की थी। अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे में भी एक महिला की मलवे में दबने से मौत हुई है। चंपावत के तेलवाड़ में भूस्खलन की चपेट में आकर एक व्यक्ति की मौत हो गई। दो लोग लापता हैं।

पिथौरागढ़ जिले में भी एक व्यक्ति की मौत हुई है। रुद्रपुर (ऊधमसिंह नगर) में रामपुर के विधायक कमलेश शुक्ला की पुत्रवधू की बारिश के दौरान करंट लगने से मौत हो गई। वहीं, बाजपुर में सोमवार को बहे किसान का शव बरामद कर लिया गया है।

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मंगलवार सुबह नैनीताल जिले के रामगढ़ में धारी तहसील में दोषापानी और तिशापानी में बादल फट गया। इस दौरान मजदूरों की झोपड़ी पर रिटेनिंग दीवार गिर गई। जिसमें सात लोग मलबे में दब गए। जिसमें से हयात सिंह और उनकी माता के शव बरामद हुए।

राहत और बचाव कार्य जारी है। उधर, खैरना में झोपड़ी में पत्थर गिरने से दो लोगों की मौत की खबर है। चंपावत के तेलवाड़ में एक भूस्खलन की चपेट में आ गया। इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई। जबकि तीन लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। वहीं, अभी कुछ लोग मलबे में फंसे हैं।

हयात सिंह की पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटा अब भी मलबे में दबे हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है। उधर, खैरना में झोपड़ी में पत्थर गिरने से दो लोगों की मौत की खबर है।

अल्मोड़ा के भिकियासैंण में एक मकान भूस्खलन की चपेट में आ गया। इस दौरान दो बच्चे मलबे में दब गए। जिनके शव बरामद कर लिए गए हैं। वहीं, अल्मोड़ा के ही एनटीडी क्षेत्र में एक मकान मलबे की चपेट में आ गया। इस दौरान एक मासूम की मौत हो गई।

वहीं, पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने दो लोगों को सुरक्षित निकल लिया। उधर, बाजपुर में लेवड़ा नदी उफान पर आ गई। जिससे मुख्य बाजार और कॉलोनियों में बाढ़ का पानी भर गया। पानी भरने से लोगों के घरों का सामान भी पूरी तरह खराब हो गया है। वहीं, बाजपुर में भी बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं।

गरमपानी में भारी बारिश के चलते हाइवे के निर्माणधीन कंपनी के दो मजदूरो की टिन शेड में आए मलबे में दबने से मौत हो गई। एनएच में चैड़ीकरण की देखरेख कर रहे तैयब खान ने बताया हादसे में हसमूद (40) और इमरान (34) निवासी भोजीपुरा बरेली यूपी की दबकर मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर तहसीलदार बरखा ने दोनों की मौत की पुष्टि की है।

कोसी नदी में पानी बढ़ने से रामनगर के गर्जिया मंदिर को खतरा पैदा हो गया। पानी मंदिर की सीढ़ियों तक पहुंच गया है। वहीं बैराज के सभी फाटक खोल दिए गए हैं। कोसी बैराज पर कोसी नदी का जलस्तर 139000 क्यूसेक है। जो खतरे के निशान से काफी ऊपर है। कोसी बैराज में खतरे का निशान 80000 क्यूसेक है।

उधर, हल्द्वानी में गोला नदी उफान पर आने से नदी पर बना अप्रोच पुल टूट गया। जिसके कारण वहां आवाजाही बंद हो गई है। टनकपुर में शारदा नदी के उफान से क्रशर मार्ग ने नाले का रूप ले लिया है। मंगलवार की सुबह गोला नदी का जलस्तर 90 हजार क्यूसेक पार हो गया।

जिससे अप्रोच पुल टूट गया। सूचना पर प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारियों ने सड़क का जायजा लिया। नदी का जलस्तर बढ़ने से गोला बैराज को खतरा पैदा हो गया है। बारिश के कारण नाला भी उफान पर आ गया जिससे नाले के किनारे बना एक मकान बह गया।

उधर, नैनीताल में भारी बारिश से कई जगह पानी भर गया है। वहीं, तल्लीताल चैराहे में (डांठ) में लगभग दो इंच की दरार पड़ गई। सूचना मिलते ही एसडीएम और सीओ मौके पर पहुंच गए। कैंट रोड में पानी का बहाव बहुत तेज होने के कारण दुकानों के अंदर फंसे लोगों को सेना के जवानों ने रेस्क्यू कर निकाला।

नदी के ओवरफ्लो होने से कोसी नदी का पानी रामनगर-रानीखेत मार्ग स्थित लेमन ट्री रिजॉर्ट में घुस गया था। डीजीपी अशोक कुमार के मुताबिक इस दौरान लगभग 100 लोग फंस गए थे। वे सभी सुरक्षित हैं।

पहाड़ों की बारिश के बाद हरिद्वार में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। सुबह साढ़े आठ बजे से पानी के जलस्तर में बढोतरी हुई है। जिसके बाद से प्रशासन अर्लट मोड पर है। बैराज के खतरे का निशान 294 मीटर पर है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के एसडीओ शिवकुमार कौशिक ने बताया कि रात 12रू00 बजे के बाद टिहरी बांध व श्रीगंगानगर से पानी छोड़े जाने से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। जिससे क्षेत्र में अलर्ट जारी किया गया है

ऋषिकेश में गंगा खतरे के निशान से महज 20 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। त्रिवेणी घाट के आरती स्थल समेत विभिन्न गंगा घाट जलमग्न हो गए हैं। प्रशासन तटीय क्षेत्रों में रह रहे लोगों को आश्रय स्थलों में शिफ्ट कर रहा है। ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर 340.30 मीटर पर पहुंच गया है।

गंगा चेतावनी निशान 340.50 मीटर के बिल्कुल करीब पहुंच गई है। केंद्रीय जल आयोग ने मैदानी जिलों के प्रशासन अलर्ट कर दिया है। पुलिस गंगा के तटीय क्षेत्र में रहने वाले लोगों लगातार अलर्ट कर रही है। वहीं चंद्रेश्वर नगर, मायाकुंड, चंद्रभागा के आसपास रहने वाले लोगों को शिफ्ट किया जा रहा है। त्रिवेणी घाट का आरती स्थल, परमार्थ घाट, नाव घाट, शत्रुघ्न घाट आदि घाट पानी में डूब गए हैं।

केदारनाथ में बारिश के साथ ऊपरी पहाड़ियों पर बर्फबारी हो रही है। वहीं, यमुनोत्रीधाम सहित यमुना घाटी की पहाडियां कोहरे से ढकी हुई हैं। उधर, राजधानी देहरादून समेत पहाड़ो की रानी मसूरी मे चटक धूप खिली है।

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