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महाशिवरात्रि व्रत 1 मार्च को, मंगलवार और परिघ नामक योग से बन रहा विशेष संयोग

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इस वर्ष महाशिवरात्रि का व्रत 1 मार्च मंगलवार को रखा जाएगा। परिघ नाम का विशेष योग बनने से तंत्र-मंत्र और यंत्र साधना के लिए अति विशिष्ट संयोग बन रहा है।

उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल बताते हैं कि भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि का त्यौहार इस वर्ष बहुत खास संयोग पर पड़ रहा है क्योंकि इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र और परिघ नाम का योग है और दोपहर बाद शिव नाम का योग है इन दोनों लोगों में की गई साधना शत्रु विनाशकारी एवं बहुत कल्याणकारी होती है।

विशेष शुभ मुहूर्त

सुबह 9:45 से दोपहर 12:34 तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा और दोपहर 2:07 से 2:53 तक विजय नाम का मुहूर्त रहेगा इन दोनों मुहूर्तो में की गई पूजा सर्वश्रेष्ठ फलदायक होती है।
सायंकाल 5:48 से 6:12 तक गोधूलि मुहूर्त रहेगा
साईं काल 6:00 से 7:14 तक संध्या मुहूर्त और रात्रि 11:45 से 12:25 तक निशित कॉल रहेगा।

आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल बताते हैं कि इस दिन खास बात यह भी रहेगी कि ज्योतिष शास्त्र में आत्मा का कारक सूर्य और मन का कारक चंद्रमा दोनों एक ही राशि शनिदेव के स्वामित्व वाली कुंभ राशि में रहेंगे। इसलिए आयु रक्षा के लिए मृत्युंजय शिव यंत्र पति सुख बाधा निवारण यंत्र पत्नी सुख बाधा निवारण यंत्र संतान बाधा शत्रु बाधा निवारण यंत्र एवं सभी कार्यों बिजनेस व्यापार में वृद्धि प्रमोशन आदि के लिए सर्व मनोरथ सिद्धि यंत्र पूर्ण वैदिक और वैज्ञानिक पद्धति से सिद्ध करने के लिए यह दिन वरदान के समान आ रहा है। और जिन लोगों के लिए यंत्र इस दिन सिद्ध नहीं हो पाएगा उनके लिए यह संकल्प का दिवस हो और होली की रात्रि यंत्र सिद्ध हो तो वह भी बहुत शुभ फलदायक रहेगा।

किस प्रकार करें भगवान शिव को प्रसन्न

आचार्य चंडी प्रसाद बताते हैं कि उस दिन प्रात काल उठकर स्नान करें पंचामृत से भगवान शिव को स्नान कराएं शिव परिवार स्थापित करें गणेश नंदी कार्तिकेय और माता पार्वती का पूजन करें। पुरुष ओम रुद्राय नमः और स्त्रियां शिवाय नमः मंत्र से जल चढ़ाएं। कम से कम 8 लोटा केसर युक्त जल चढ़ाना शुभ रहेगा। घर में अखंड दीपक जलाएं।

चंदन धतूरा गन्ने का रस शहद पीली सरसों काले तिल भांग के पत्ते निर्गुंडी के पत्ते और बेलपत्र भगवान शिव पर सफेद पुष्पों सहित समर्पित करें। बटुक भैरव का ध्यान गुलाब के फूलों से करें। रात्रि में केसर युक्त खीर बनाकर उसका प्रसाद चढ़ाएं और उसे सब को वितरित करें। इस प्रकार विधान करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होगी

आचार्य का परिचय
नाम-आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल
प्रवक्ता संस्कृत।
निवास स्थान- 56 / 1 धर्मपुर देहरादून, उत्तराखंड। कैंप कार्यालय मकान नंबर सी 800 आईडीपीएल कॉलोनी वीरभद्र ऋषिकेश
मोबाइल नंबर-9411153845
उपलब्धियां
वर्ष 2015 में शिक्षा विभाग में प्रथम गवर्नर अवार्ड से सम्मानित, वर्ष 2016 में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड ज्योतिष रत्न सम्मान से सम्मानित, वर्ष 2017 में त्रिवेंद्र सरकार ने दिया ज्योतिष विभूषण सम्मान। वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा की सबसे पहले भविष्यवाणी की थी। इसलिए 2015 से 2018 तक लगातार एक्सीलेंस अवार्ड, 5 सितंबर 2020 को प्रथम वर्चुअल टीचर्स राष्ट्रीय अवार्ड, अमर उजाला की ओर से आयोजित ज्योतिष महासम्मेलन में ग्राफिक एरा में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दिया ज्योतिष वैज्ञानिक सम्मान।

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