भाई बहन के रिश्ते का पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन पर उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने जारी बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि 11 अगस्त को ही रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाना शास्त्र सम्मत है।
सोशल मीडिया पर देश के विभिन्न राज्यों के लोगों द्वारा रक्षाबंधन के त्यौहार पर कि 11 अगस्त को मनाया जाए अथवा 12 अगस्त को मनाया जाए चल रही बहस पर डॉक्टर घिल्डियाल ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि जब किसी चीज पर बहस चलती है तो उससे अवश्य कोई नई चीज निकल कर सामने आती है, इसलिए बहस करना बुरी बात नहीं है परंतु उसके बाद जो शास्त्र सम्मत निर्णय दिया जाता है उसको सभी को स्वीकार करना चाहिए।
संस्कृत शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक आचार्य चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने स्पष्ट करते हुए कहा कि 11 अगस्त को प्रातः काल 9:16 पर पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो रही है इसमें कोई संशय नहीं है कि उदय व्यापिनी चतुर्दशी तिथि है ,परंतु निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु के अनुसार पूर्णमासी तिथि का विचार उदय व्यापिनी से नहीं अपितु अपराहन व्यापिनी से किया जाता है क्योंकि उसका संबंध चंद्रमा के उदय से है और 11 अगस्त को दिन रात पूर्णमासी तिथि है 12 अगस्त को सुबह 7:16 पर पूर्णमासी तिथि समाप्त हो जाएगी और प्रतिपदा प्रारंभ हो जाएगी।
डॉक्टर चंडी प्रसाद ने कहा कि जो विद्वान 11 अगस्त को भद्रा होने का हवाला दे रहे हैं वह भी गलत नहीं कह रहे हैं , परंतु परंपरागत ज्योतिष के अनुसार जब चंद्रमा कर्क सिंह ,कुंभ अथवा मीन राशि में होता है तब भद्रा का बास पृथ्वी लोक पर होता है ,और वही चंद्रमा जब मेष ,वृष, मिथुन अथवा वृश्चिक राशि में रहता है तब भद्रा का बास स्वर्ग लोक में होता है ,परंतु जब चंद्रमा कन्या, तुला, धनु अथवा मकर राशि में संचरण कर रहा होता है तब भद्रा का वास पाताल लोक में होता है ऐसी व्यवस्था सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी ने की है, इसलिए स्पष्ट है कि 11 अगस्त को चंद्रमा दिन-रात मकर राशि में संचरण कर रहा है और श्रवण नक्षत्र है आयुष्मान योग है इसलिए उस दिन भद्रा का वास मृत्यु लोक में नहीं है इसलिए उस दिन रक्षाबंधन को हर्षोल्लास से मनाया जाना पूर्ण रूप से शास्त्र सम्मत है।
आचार्य घिल्डियाल और स्पष्ट करते हुए बताते हैं कि स्वर्गलोक और पाताल लोक की भद्रा मंगलमय होती है सिर्फ मृत्युलोक की भद्रा दुर्भाग्यपूर्ण होती है ,12 तारीख को पूर्णमासी सिर्फ उदय व्यापिनी होकर 7:16 तक रहेगी इसलिए उस दिन आचार्य गण यज्ञोपवीत ब्रह्म बेला में धारण करें तो बहुत अच्छा रहेगा परंतु रक्षा सूत्र का बंधन उस दिन कदापि नहीं हो सकता है।
पूरे प्रदेश एवं देश वासियों को रक्षाबंधन के पवित्र त्यौहार की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सहायक निदेशक डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने कहा कि बिना किसी विवाद और संकोच में पड़े हुए 11 अगस्त को सुबह स्नान और ध्यान करें। चतुर्दशी तिथि है सुबह से उसमें भगवान गणेश और शिव का पूजन करें और 10:17 से सायंकाल 6:53 तक भाई ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र का बंधन करें। और यदि विलंब हो गए हो तो रात्रि 8:07 से भी रक्षा सूत्र का बंधन और टीका कर सकते हैं
आचार्य का परिचय
नाम-आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल
सहायक निदेशक शिक्षा विभाग।
निवास स्थान- 56 / 1 धर्मपुर देहरादून, उत्तराखंड। कैंप कार्यालय मकान नंबर सी 800 आईडीपीएल कॉलोनी वीरभद्र ऋषिकेश
मोबाइल नंबर-9411153845
उपलब्धियां
वर्ष 2015 में शिक्षा विभाग में प्रथम गवर्नर अवार्ड से सम्मानित, वर्ष 2016 में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड ज्योतिष रत्न सम्मान से सम्मानित, वर्ष 2017 में त्रिवेंद्र सरकार ने दिया ज्योतिष विभूषण सम्मान। वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा की सबसे पहले भविष्यवाणी की थी। इसलिए 2015 से 2018 तक लगातार एक्सीलेंस अवार्ड, 5 सितंबर 2020 को प्रथम वर्चुअल टीचर्स राष्ट्रीय अवार्ड, अमर उजाला की ओर से आयोजित ज्योतिष महासम्मेलन में ग्राफिक एरा में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दिया ज्योतिष वैज्ञानिक सम्मान।