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Tuesday, February 27, 2024
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Silkyara Tunnel Rescue : खुशखबरी, टनल से सभी 41 श्रमिक निकाले गए बाहर

मिशन सिलक्यारा हुआ सफल

*17वें दिन सुरंग से सकुशल बाहर आए सभी 41 श्रमिक*

*रेस्क्यू में जुटे थे राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियों के साथ ही सेना, विभिन्न संगठन और विश्व के नामी टनल विशेषज्ञ*

*पीएम मोदी के सशक्त नेतृत्व एवं सीएम धामी के दृढ़ संकल्प और प्रतिबद्धता में डबल इंजन सरकार को मिली बड़ी सफलता*

देहरादून। मंगलवार को पूरे देश के लिए मंगलमयी खबर सामने आई है।
डबल इंजन सरकार के सशक्त नेतृत्व और रेस्क्यू टीमों के अथक परिश्रम से ऑपरेशन सिलक्यारा फतह कर लिया गया है। सुरंग में फंसे सभी 41 श्रमिक 17वें दिन सकुशल बाहर आ गए हैं।

उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री हाईवे पर सिलक्यारा में निर्माणाधीन सुरंग में 12 नवंबर को भूधंसाव होने से 41 श्रमिक सुरंग में ही फंस गए थे। घटना की सूचना मिलते ही बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। देहरादून से पहुंचे एसडीआरएफ के जवान स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के साथ तत्काल रेस्क्यू में जुट गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मौके का जायजा लेने पहुंचे। सीएम के दौरे के साथ ही रेस्क्यू अभियान जोर पकड़ गया। राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियां रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल हो गईं।

सुरंग में मलबा हटाने के लिए सबसे पहले जेसीबी लगाई गई, लेकिन ऊपर से मलबा गिरने पर सफलता नहीं मिल पाई तो देहरादून से ऑगर मशीन मंगाकर सुरंग में ड्रिलिंग शुरू की गई।
ऑगर मशीन जवाब दे गई। फिर दिल्ली से अमेरिकन ऑगर मशीन मौके पर पहुंचाई गई। इसके लिए वायुसेना के हरक्यूलिस विमानों की मदद ली गई। इन विमानों ने मशीन के पुर्जों को चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर पहुंचाया और यहां से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर सिलक्यारा पहुंचाया गया।

सुरंग में लगभग 50 मीटर ड्रिलिंग के बाद सरिया सामने आने के कारण इस मशीन में भी खराबी आ गई। फिर हैदराबाद से प्लाज्मा कटर मंगाया गया। कटर से ऑगर को काटने के बाद 16वें दिन मैनुअल ड्रिलिंग शुरू की गई और आज 17वें दिन जिंदगी का पाइप श्रमिकों तक पहुंचा दिया गया। यही नहीं सरकार तीन अन्य मोर्चों पर भी काम कर रही थी। इसमें वर्टिकल ड्रिलिंग का काम भी 50 मीटर तक पहुंच चुका था।

रेस्क्यू टीमों को सैल्यूट

राज्य और केंद्र सरकार की सभी एजेंसियां, अधिकारी और कर्मचारी आज 17वें दिन तक पूरी तन्मयता और मनोयोग से रेस्क्यू में जुटी रही। मुख्यमंत्री धामी निरंतर स्थलीय निरीक्षण करने साथ ही रेस्क्यू टीमों की हौसला-अफजाई करते रहे। इसी का फल रहा है कि आज यह मिशन सफल हुआ।
रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीआरओ, आरवीएनएल, एसजेवीएनएल, ओएनजीसी, आईटीबीपी, एनएचएआईडीसीएल, टीएचडीसी, उत्तराखंड राज्य शासन, जिला प्रशासन, भारतीय थल सेना, वायुसेना समेत तमाम संगठनों, अधिकारियों और कर्मचारियों की अहम भूमिका रही।

आस्था’ और ‘विज्ञान’ से अंजाम तक पहुंचा ‘मिशन सिलक्यारा

सिलक्यारा टनल में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का रेस्क्यू, विज्ञान और भगवान दोनों की बदौलत सफल हो पाया। कहीं न कहीं इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी देखने को मिला, जिससे एक आस बंधी कि सब कुछ ठीक होगा।
दरअसल, टनल में फंसे श्रमिकों का तो ईश्वर पर अटल विश्वास था ही बचाव अभियान दल ने भी हर रोज देव आराधना के बाद ही रेस्क्यू की शुरुआत की। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और ‘इंटरनेशनल टनलिंग एंड अंडरग्राउंड स्पेस एसोसिएशन’ के अध्यक्ष अर्नोल्ड डिक्स भी टनल के मुहाने पर बनाए गए बौखनाग मंदिर में सिर झुकाकर श्रमिकों को सकुशल वापसी के लिए ईश्वर से आशीर्वाद मांगा।

मुख्यमंत्री ने बचाव दल की पूरी टीम को दी बधाई, कहा-श्रमिकों और उनके परिजनों के चेहरे की खुशी ही मेरी ईगास-बगवाल

*मुख्यमंत्री बोले-बचाव दल की तत्परता, टेक्नोलॉजी का सहयोग, अंदर फंसे श्रमिक बंधुओं की जीवटता, प्रधानमंत्री जी द्वारा की जा रही पल- पल निगरानी और बौख नाग देवता की कृपा से सफल हुआ अभियान*

*बौख नाग देवता का मुख्यमंत्री ने किया आभार प्रकट, बोले भरोसा था लोकदेवता अभियान को सफल जरूर बनाएंगे*

सिलकयारा टनल में फंसे 41 श्रमिकों के सकुशल बाहर निकलने पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अभियान में जुटे समस्त बचाव दल को अपनी शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा की श्रमिकों और उनके परिजनों के चेहरों की खुशी ही मेरे लिए इगास बग्वाल है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बचाव दल की तत्परता, टेक्नोलॉजी के सहयोग, सुरंग के अंदर फंसे श्रमिक बंधुओं की जीवटता, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा की जा रही पल- पल निगरानी और बौखनाग देवता की कृपा से यह अभियान सफल हुआ।
मुख्यमंत्री ने जरुरी होने पर श्रमिकों को उच्च कोटि की चिकित्सा सुविधा देने के उन्होंने आदेश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन मेरे लिए बड़ी खुशी का दिन है। जितनी प्रसन्नता श्रमिक बंधुओं और उनके परिजनों को है, उतनी ही प्रसन्नता आज मुझे भी हो रही है। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान से जुड़े एक-एक सदस्य का मैं हृदय से आभार प्रकट करता हूं। जिन्होंने देवदूत बनकर इस अभियान को सफल बनाया। उन्होंने कहा कि सही मायनों में हमें आज ईगास पर्व की खुशी मिली है। उन्होंने कहा कि भगवान बौख नाग देवता पर हमें विश्वास था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व स्तरीय टेक्नोलॉजी और विशेषज्ञ इस अभियान में लगे थे। प्रधानमंत्री जी ने पल-पल इस अभियान की निगरानी की। उनके मार्गदर्शन में बेहतरीन समन्वय ने असंभव को संभव में बदला। उन्होंने अभियान से जुड़े एक-एक सदस्य के प्रति भी आभार प्रकट किया।

Uttarkashi Silkyara Tunnel Collapse Rescue Updates: दिवाली के दिन से उत्तरकाशी की निर्माणाधीन सुरंग में कैद 41 श्रमिक बाहर आने शुरू हो गए हैं। सुरंग के अंदर मेडिकल की टीम से लेकर सीएम धामी और अन्य अधिकारी मौजूद हैंं। एबुंलेंस को अलर्ट रखा गया है।

सिलक्यारा टनल में कैद 41 मजदूर 17वें दिन सुरक्षित बाहर आए। बचाव स्थल पर खुशी का माहौल है। मजदूरों को निकाल कर प्राथमिक उपचार के बाद एम्बुलेंस के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिन्यालीसौड़ में शिफ्ट किया जा रहा है।

उत्तराखंड में 12 नवंबर से सिल्कयारा सुरंग के अंदर फंसे 41 श्रमिकों को सफलतापूर्वक बचाया गया है। फिलहाल सभी मजदूर सिल्कयारा टनल के अंदर सेफ्टी टनल में हैं।

टीम अंदर गई है जो मजदूरों को कपड़े पहना रहे। वहीं एंबुलेंस को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अगर कोई मजदूर खुद को असहज महसूस करता है तो उसे अस्पताल ले जाया जाएगा।

रेस्क्यू ऑपरेशन के चलते टनल के अंदर ही अस्थाई मेडिकल सुविधा का विस्तार किया गया है। फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के बाद इस स्थान पर किया जाएगा स्वास्थ्य प्रशिक्षण। कोई भी दिक्कत होने पर स्वास्थ विभाग द्वारा लगाए गए 8 बेड एवं डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम है तैनात।

सिल्क्यारा सुरंग से श्रमिकों को निकालने के बाद एयरलिफ्ट किया जा सकता है। इसको लेकर चिन्यालीसौर हवाई पट्टी पर चिनूक हेलीकॉप्टर तैनात किया गया है।

श्रमिकों के इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिन्यालीसौड़ में तैयारियां पूरी हो गई हैं। वहीं, सुरंग के पास लोग श्रमिकों के लिए मालाएं लेकर पहुंचे हैं।

17 दिन बाद सुरंग से खुशखबरी आई है। रैट माइनर्स की टीम ने मैन्युअल ड्रिलिंग पूरी कर दी है। श्रमिकों तक पाइप पहुंच चुका है। पाइप वेल्डिंग किया जा रहा है, जिससे मजदूरों को कोई क्षति न पहुंचे। सुरंग के बाहर एंबुलेंस व डाक्टरों की टीम तैनात है। वहीं, एक एंबुलेंस अंदर भी गई है। श्रमिकों को सुरंग से निकालते ही चिन्यालीसौड़ अस्पताल ले जाया जाएगा।

सिलक्यारा सुरंग में मैन्युअल ड्रिलिंग लगभग पूरी हो चुकी है।  एनडीआरएफ की टीम सुरंग के मुहाने पर पहुंची है। वहीं, एक एंबुलेंस भी सुरंग के अंदर से निकली है।
टीम ने अब मजदूरों को त्वरित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए वहां एंबुलेंस को भेज दिया है। यहां चार 108 एम्बुलेंस सिलक्यारा सुरंग के मुहाने पर पहुंची हैं। एसडीआरएफ के जवान सुरंग के अंदर ही श्रमिकों के मेडिकल चेकअप के लिए बेड लेकर जा रहे हैं। फोल्डिंग बेड के साथ तकिए और गद्दे भी पहुंचाए जा रहे हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन के नोडल अधिकारी सचिव डॉ. नीरज खैरवाल व एनएचआईडीसीएल के एमडी महमूद अहमद ने बताया कि मैन्युअल ड्रिलिंग करीब 56 मीटर तक कर ली गई है। जल्द ही मजदूरों को बाहर निकाल लिया जाएगा।
उत्तरकाशी की सिलक्यारासुरंग में सफलतापूर्वक पाइप डालने पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने रेस्क्यू टीमों को बधाई दी। उन्होंने फेसबुक पोस्ट करते हुए लिखा बाबा बौखनाग जी की असीम कृपा रही। करोड़ों देशवासियों की प्रार्थना एवं रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे सभी बचाव दलों के अथक परिश्रम के फलस्वरूप श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए टनल में पाइप डालने का कार्य पूरा हो चुका है। शीघ्र ही सभी श्रमिक भाइयों को बाहर निकाल लिया जाएगा।

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रेस्क्यू टीम अब श्रमिकों से केवल तीन मीटर ही दूर है। कर्नल राहत एवं बचाव अभियान के प्रभारी कर्नल दीपक पाटिल ने बताया कि मैन्युअल ड्रिलिंग 53.9 मीटर तक हो गई है। 57 मीटर पर ब्रेकथ्रू  होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को दोबारा फोन कर सुरंग में फंसे श्रमिकों के राहत एवं बचाव कार्य के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा अंदर फंसे श्रमिकों के साथ ही बाहर राहत बचाव कार्य में जुटे लोगों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जाए।
फंसे हुए 41 मजदूरों के परिजनों को तैयार रहने और मजदूरों के कपड़े और बैग तैयार रखने को कहा गया है। मजदूरों को रेस्क्यू कर बाहर निकालकर चिन्यालीसौड़ अस्पताल ले जाया जाएगा।

श्रमिकों की सलामती के लिए सुरंग के पास लोग पूजा पाठ भी कर रहे हैं। बाबा बौखना के मंदिर के पास लोग हवन पूजा कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय टनलिंग विशेषज्ञ, अर्नोल्ड डिस्क भी पूजा में शामिल हुए।

अलर्ट के बीच सिलक्यारा में बारिश शुरू हो गई है। ऐसे में बचाव अभियान में जुटी टीमों को भी परेशानी हो सकती है। बता दें कि आज राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं हल्की और गर्जन के साथ बारिश होने की संभावना है। 3500 मीटर के अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फबारी होने की संभावना है।

16 दिन से सुरंग में फंसे मजदूरों को बचाने के चौतरफा अभियान में दुश्वारियां और उम्मीदें भी साथ-साथ चल रही हैं। 16वें दिन सुरंग के ऊपर तो काम चलता रहा, लेकिन भीतर ब्लेड निकलने के बावजूद मशीन का हेड फंसने से मैन्युअल खोदाई का काम लटका रहा। देर शाम हेड निकलते ही रैट माइनर्स सेना की मदद से मैन्युअल खोदाई में जुट गई।
वर्टिकल ड्रिलिंग 36 मीटर तक हो गई है। अभी 50 मीटर तक वर्टिकल ड्रिलिंग की जानी है। मशीन का हेड फंसा होने से अभी मैन्युअल ड्रिलिंग शुरू नहीं हो पाई है। मशीन का हेड निकलते ही यहां मैन्युअल ड्रिलिंग शुरू होने की उम्मीद है।
बड़कोट साइड से छह ब्लास्ट से 12 मीटर की माइक्रो टनल तैयार हुई है। ब्लास्टिंग से कमजोर चट्टानों के गिरने का खतरा बना हुआ है। यहां शॉटक्रिटिंग कर चट्टान को थामा जा रहा है।

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सिलक्यारा सुरंग के अंदर मैनुअल ड्रिलिंग के काम में भारतीय सेना की इंजीनियरिंग कोर मदद करेगी। आज सेना की इंजीनियरिंग रेजीमेंट मद्रास इंजीनियर ग्रुप (एमईजी) की एक टुकड़ी सिलक्यारा पहुंच गई है। जो कि यहां मैनुअल ड्रिलिंग का जिम्मा संभालेगी।
सिल्कयारा सुरंग में मैनुअल ड्रिलिंग के लिए भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स के एक इंजीनियर समूह (मद्रास सैपर्स) की एक इकाई को बुलाया गया है। बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए इंजीनियर रेजिमेंट के 30 जवान मौके पर पहुंच गए हैं। मैनुअल ड्रिलिंग के लिए भारतीय सेना नागरिकों के साथ मिलकर सुरंग के अंदर रैट बोरिंग करेगी। एक अधिकारी ने बताया मैन्युअल ड्रिलिंग करने के लिए भारतीय सेना नागरिकों के साथ मिलकर हथौड़े और छेनी जैसे हथियारों से सुरंग के अंदर के मलबे को खोदेगी और फिर पाइप को पाइप के अंदर बने प्लेटफॉर्म से आगे बढ़ाया जाएगा।
सुरंग के अंदर 41 लोग सुरक्षित और स्थिर हैं। प्लाज्मा कटर पहुंचा और पाइप लाइन में फंसी मशीन को काटना शुरू किया।

सरियों में फंसे ऑगर मशीन के ब्लेड को काटने का काम सुबह से लगातार जारी था। इस काम में हैदराबाद से प्लाज्मा कटर पहुंचने के बाद तेजी से काम हुआ। अब वर्टिकल ड्रिलिंग का काम शुरू कर दिया गया है।

माइक्रो टनलिंग विशेषज्ञ क्रिस कूपर ने बताया कि प्लाज्मा मशीन से हम अभी भी बरमा काट रहे हैं। इसे काटने के लिए बरमा से लगभग 16 मीटर अधिक है। यह प्लाज्मा मशीन फायदेमंद है क्योंकि यह स्टील को तेजी से काट देगा।

अंतर्राष्ट्रीय टनल विशेषज्ञ, अर्नोल्ड डिक्स ने कहा कि बरमा मशीन विफल हो गई, और हमें पाइप से बरमा निकालने में कई तकनीकी कठिनाइयाँ हो रही हैं। इसे काटने की प्रक्रिया आज सुबह बहुत तेजी से चल रही है। प्लाज़्मा कटर आ गए हैं। बचाव कार्य में लगे लोग प्लाज़्मा कटर के साथ एक पाइप में अंदर जा रहे हैं और इसके टुकड़े-टुकड़े कर रहे हैं। एक बार, हमें बरमा मिल गया है। फिर हम अंदर जा सकते हैं। पाइप पर एक नज़र डाल देख सकते हैं कि वह किस स्थिति में है। और फिर हम आकलन कर सकते हैं कि आगे क्या होगा।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हैदराबाद से लाई गई प्लाज़्मा मशीन ने सुबह से काम करना शुरू कर दिया है। तेजी से कटाई चल रही है। 14 मीटर और कटना बाकी है। बरमा मशीन को काटकर बाहर लाना है। ऐसा लगता है कि यह जल्द ही पूरा हो जाएगा। कुछ ही घंटों में। उसके बाद मैनुअल ड्रिलिंग शुरू हो जाएगी।

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सिल्कयारा सुरंग बचाव पर अतिरिक्त सचिव तकनीकी, सड़क और परिवहन महमूद अहमद ने कहा, बरमा ड्रिलिंग मशीन को फिर से जोड़ दिया गया है। वेल्डिंग के बाद एक नया पाइप डाला जाएगा, जिसकी प्रक्रिया में दो घंटे लगेंगे। दो घंटे के बाद, हम पाइप को अंदर धकेलेंगे। मुझे आशा है कि हमें किसी बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

थोड़ी देर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सिलक्यारा पहुंचने की सूचना है। वहीं, मशीन को ठीक कर लिया गया है। जिसके बाद अब जल्द अभियान पूरा होने की उम्मीद है।

केंद्र सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री रिटायर्ड जनरल वीके सिंह सिलक्यारा में ही मौजूद है। वह अब तक दो बार सुरंग के अंदर जाकर ऑगर मशीन से ड्रिलिंग शुरू करने की कवायद का जायजा ले चुके हैं।

सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए अभी 10 से 12 मीटर ड्रिलिंग शेष है। जिसके लिए छह-छह मीटर के दो पाइप डाले जाने हैं। हालांकि अभी ऑगर मशीन बंद की गई है। जिसके जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

ड्रिलिंग के दौरान लंबे पाइप के दबाव से मशीन अपनी जगह से हिल गई है। अभी मशीन का बेस मजबूत किया जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल मशीन के सामने कोई बाधा नहीं। ऐसे में आज रात 12 बजे तक राहत भरी खबर आ सकती है।

इगास पर कार्यक्रम स्थगित

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सीएम पुष्कर सिंह धामी के ग्राउंड जीरो पर होने के कारण देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में आज शाम होने वाले इगास के कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

मातली में अस्थाई सीएम कैंप कार्यालय

रेस्क्यू ऑपरेशन के मद्देनजर मातली में अस्थाई रूप से मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बनाया गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान शासकीय कार्य भी प्रभावित न हों और इस ऑपेरशन की बेहतर तरह से मॉनिटरिंग के मद्देनजर यह अस्थाई कैंप कार्यालय स्थापित किया गया है।

पहले सुरंग में 900 मिमी पाइप को ऑगर मशीन के माध्यम से भेजा था, जो 22 मीटर जाने के बाद अटक गया था। इस पाइप में 800 मिमी का पाइप भेजने का फार्मूला काम आ गया। एक तो 22 मीटर तक 800 मिमी पाइप पर मलबे का दबाव नहीं था। दूसरे मलबे के 25 से 45 मीटर हिस्से में जहां दबाव था, उसे बुधवार शाम को पार कर लिया गया।

ऑगर मशीन के आगे कुछ सरिया आ जाने से काम रुका जिन्हें कटर से काटकर मशीन फिर आगे बढ़ गई। रेस्क्यू बचाव अभियान से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, रात ऑगर मशीन के सामने जो सरियों की बाधा आई थी उसे एनडीआरएफ की टीम की मदद से गुरुवार सुबह करीब 3 बजे हटा दिया गया था। जल्द मजदूरों के बाहर आने की संभावना है।

कुछ ही देर में चिनूक हेलिकॉप्टर भी चिन्यालीसौड हवाई अड्डे पर लैंड करेगा। मजदूरों को एयरलिफ्ट करने की जरूरत पड़ने पर चिनूक हेलिकॉप्ट मदद के लिए तैयार रहेगा।

ऑगर मशीन से सुरंग में ड्रिलिंग का काम जारी है। सीएम धामी ने ट्ववीट कर कहा ‘सिलक्यारा टनल में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी  है। मैं स्थलीय निरीक्षण के लिए उत्तरकाशी पहुँच रहा हूं।’

सभी मजदूरों को बाहर निकालकर सीधे चिन्यालीसौड़ ले जाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री धामी भी वहीं मजदूरों से मिलेंगे। एनडीआरएफ ने भी बचाव की ब्रीफिंग शुरू की कर दी है।

मजदूरों के स्वागत और उनका कुशलक्षेम पूछने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार शाम उत्तरकाशी पहुंच गए हैं। वे यहां मातली में ही रात्रि प्रवास करेंगे। फिर जिस समय भी मजदूर बाहर आएंगे सीएम उनके वहीं मिलेंगे।

सिलक्यारा सुरंग में ड्रिलिंग का काम अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। अभियान के नोडल अधिकारी नीरज खैरवाल ने बताया कि ऑगर मशीन से लगभग 44-45 मीटर ड्रिलिंग पूरी कर ली गई है। अब केवल करीब 20 मीटर की ही ड्रिलिंग शेष बची है। जिसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उम्मीद है कि पाइप सुरंग से अगले दो घंटे में आर पार हो जाएगा।

बचाव अभियान को लेकर अगले करीब दस घंटे अहम हैं। टनल से जैसे-जैसे मजदूरों के बाहर आने की उम्मीद बढ़ रही है, वैसे ही उनके प्राथमिक उपचार की भी तैयारी तेज हो गई है। यहां अस्थायी अस्पताल बनाया गया है, जिसमें आठ बेड लगाए गए हैं। यहां से करीब चार किलोमीटर दूर हेलिपैड बना है, जहां से श्रमिकों को एयरलिफ्ट करके एम्स ले जाया जा सकता है। उत्तरकाशी जिला अस्पताल में भी 45 बेड अलग से रिजर्व कर दिए गए हैं।

सिलक्यारा सुरंग में ऑगर मशीन से 39 मीटर तक ड्रिलिंग हो चुकी है। कुल 57 से 60 मीटर तक ड्रिलिंग होनी है। अधिकारियों का कहना है कि सब कुछ ठीक रहा तो आज रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होने की उम्मीद है।

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