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Thursday, July 7, 2022
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Uttarakhand Cabinet: कैबिनेट बैठक में होमगार्ड को भी डीए, कई अहम फैसलों पर लगी मुहर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में संपन्न हुई कैबिनेट की बैठक में कुल 23 मामले कैबिनेट के समक्ष रखे गए।

प्रदेश में गैलंट्री अवार्ड विजेताओं की बढ़ाई गई राशि जिनको मिलते थे 25 लाख उसको बढाकर 50 लाख किया गया। राज्य कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2022-23 बजट को भी मंजूरी दी।

सिचाई मेट सेवा नियमावली को मंजूरी मिली।
आउटसोर्स कर्मियों को नियुक्ति देने के मुद्दे पर कैबिनेट की up समिति का गठन किया गया 3 हज़ार लोग लगा दिए थे 1600 लोग समायोजित हुए। 1500 कैसे समायोजित किए जायेगे इसको लेकर सब कमेटी फैसला लेगी।

देश में NAP का पेटर्न को लागू किया जाना हैं ऐसे में सरकार ने CBSE पेटर्न को लागू करने का फैसला लें लिया गया हैं बोर्ड परीक्षाओ में होगी इसी से मार्किंग।

हरिद्वार में पंचायत चुनाव होगा, कैबिनेट ने चुनाव कार्यक्रम तय करने के निर्देश दिए

सिंगल सिस्टम के तहत sdm को पावर दी गई।

– उत्तराखंड बोर्ड में cbsc का पैटर्न लागू किया जाएगा।

– वन टाइम सेटलमेंट को आगे बढ़ाया गया।

– 14 से 20 जून तक सत्र होगा, कैबिनेट से मिली मंजूरी।

हरिद्वार के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाने का निर्णय।

– होमगार्ड को भी डीए दिया जाएगा।

कैंपा की ऑडिट रिपोर्ट को कैबिनेट से मिली मंजूरी

– छात्रों को आरटीआई के तहत मिलने वाला अनुदान राशि को 1300 से बढ़ाकर 1600 किया गया

– लेखा सेवा नियमावली को मिली मंजूरी।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को शाम पांच बजे राज्य सचिवालय में प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक होगी। बैठक में आगामी 14 जून से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में पेश होने वाले बजट समेत कई अन्य प्रस्तावों पर मुहर लगेगी।

मार्च महीने में प्रदेश सरकार विधानसभा में लेखानुदान लाई थी। अब सरकार को जारी वित्तीय वर्ष के लिए पूर्ण बजट लाना है। वित्त विभाग के सूत्रों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष के शेष आठ महीनों के लिए सरकार 41 हजार करोड़ से अधिक की धनराशि का प्रावधान कर सकती है।

लेखानुदान में सरकार ने 62 हजार 46 करोड़ रुपये से अधिक के बजटीय अनुमान में से 21 हजार 116 करोड़ से अधिक की धनराशि चार महीने के लिए स्वीकृत की थी। बजट प्रस्ताव के अलावा विधानसभा में पेश होने से पहले कैबिनेट में आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पर भी चर्चा हो सकती है।

इसके अलावा कैबिनेट में कृषि विभाग की मुख्यमंत्री किसान प्रोत्साहन योजना का प्रस्ताव भी आ सकता है। राज्य पशुधन मिशन योजना का ड्राफ्ट भी तैयार है और इसके भी कैबिनेट के समक्ष लाए जाने की संभावना है। स्वास्थ्य विभाग एलोपैथी डॉक्टरों के आ जाने के बाद अधिसंख्य हो गए 80 दंत चिकित्सकों को दंत चिकित्सक संवर्ग में समायोजित करने का प्रस्ताव भी कैबिनेट में आ सकता है।

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गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक संपन्न हो गई है। बैठक में कुल 7 प्रस्ताव सामने आए, जिसमें सभी प्रस्तावों पर मुहर लग गई है। जिसमें मुख्य रूप से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव के समय जनता से जो वादा किया था उस वादे पर सरकार खरी उतरती दिखाई दी है।

दरअसल, धामी 2.0 कैबिनेट ने निर्णय लिया है सभी अंत्योदय राशन कार्ड धारकों को हर साल, 3 गैस सिलेंडर मुफ्त दिए जायेंगे। जिस पर मंत्रिमंडल ने मुहर लगा दी है। प्रदेश के सभी अंत्योदय राशन कार्ड धारकों को साल में तीन गैस सिलेंडर मुफ्त देगी सरकार। 1,84,142 कार्ड धारको को इसका लाभ मिलेगा। किसानों को 20 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा।

उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में विधायी एवं संसदीय विभाग के सत्रवासन को मंजूरी दी। हरिद्वार में जिला पंचायत चुनाव पर भी चर्चा हुई। एडवोकेट जनरल को अनुरोध किया जाएगा कि विभिन्न विधिक पहलू से कैबिनेट को अवगत कराया जाए। कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि गन्ना चीनी विभाग मूल्य भुगतान के लिए सरकार व्यवस्था करेगी।

पशुपालन विभाग कृतम गर्भाधान के लिए कर्मचारियों को पूर्व की भांति 40 मैदान में पहाड़ में 50 दिए जाएगें। केदारनाथ में कुछ बिल्डिंगे बननी थी, पहली मंजिल के बाद दूसरी मंजिल बनेगी, वही ठेकेदार बनाएगा।

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उत्तराखण्ड सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि राज्य में समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाई जाएगी। कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड हमारे भारत का एक ऐसा जीवंत राज्य है जिसकी संस्कृति और विरासत सदियों से भारतीय सभ्यता के मूल में समाहित रही है। भारतीय जनमानस के लिए उत्तराखंड एक देवभूमि है, जो कि हमारे वेदों-पुराणों, ऋषियों-मनीषियों के ज्ञान और आध्यात्म का केंद्र रही है। भारत के कोने कोने से लोग बड़ी आस्था और भक्ति के साथ उत्तराखंड आते है। इसलिए उत्तराखंड की सांस्कृतिक – आध्यात्मिक विरासत की रक्षा अहम है। 130 करोड़ लोगों की आस्था का केंद्र माँ गंगा का उद्गम स्थल भी उत्तराखंड ही है। भारत का मुकुट हिमालय, और उसकी कोख में पनपती प्रकृति उत्तराखंड की धरोहर हैं। इसलिए उत्तराखंड में पर्यावरण की रक्षा भी अहम है।

उत्तराखंड देश के लिए सामरिक दृष्टि से भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य है। दो देशों की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ा होने के कारण भारत के लिए इस राज्य का भौगोलिक और रणनीतिक महत्व काफी बढ़ जाता है। इसलिए राष्ट्ररक्षा के लिए भी उत्तराखंड की भूमिका अहम है।

उत्तराखंड के नागरिकों का भारतीय सेनाओं के साथ एक लंबा और गौरवशाली संबंध रहा है। यहाँ के लोगों ने पीढ़ी दर पीढ़ी अपने आपको देश की सुरक्षा के लिए समर्पित किया है। इस धरती के कितने ही वीर सपूतों ने देश के लिए अपने सर्वोच्च बलिदान दिये हैं। यहाँ लगभग हर परिवार से कोई पिता, कोई बेटा, कोई बेटी देश के किसी न किसी हिस्से में हमारी सेनाओं के माध्यम से मातृभूमि की सेवा में जुटा है।

उत्तराखंड की सांस्कृतिक आध्यात्मिक विरासत की रक्षा, यहाँ के पर्यावरण की रक्षा और राष्ट्र रक्षा के लिये उत्तराखंड की सीमाओं की रक्षा ये तीनो ही आज उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए अहम है। इस दृष्टि से नई सरकार ने अपने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद पहली कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया कि न्यायविदों, सेवानिवृत्त जजों, समाज के प्रबुद्ध जनो और अन्य स्टेकहोल्डर्स की एक कमेटी गठित करेगी जो कि उत्तराखंड राज्य के लिए ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ का ड्राफ्ट तैयार करेगी। इस यूनिफॉर्म सिविल कोड का दायरा विवाह-तलाक, ज़मीन-जायदाद और उत्तराधिकार जैसे विषयों पर सभी नागरिकों के लिये समान क़ानून चाहे वे किसी भी धर्म में विश्वास रखते हों, होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ संविधान निर्माताओं के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक अहम कदम होगा और संविधान की भावना को मूर्त रूप देगा। ये भारतीय संविधान के आर्टिकल 44 की दिशा में भी एक प्रभावी कदम होगा, जो देश के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता की संकल्पना प्रस्तुत करता है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर इसे लागू करने पर ज़ोर दिया है। साथ ही, इस महत्वपूर्ण निर्णय में हमें गोवा राज्य से भी प्रेरणा मिलेगी जिसने एक प्रकार का ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ लागू करके देश में एक उदाहरण पेश किया है।

उत्तराखंड में जल्द से जल्द ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने से राज्य के सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों को बल मिलेगा। इससे राज्य में सामाजिक समरसता बढ़ेगी, जेंडर जस्टिस को बढ़ावा मिलेगा, महिला सशक्तिकरण को ताकत मिलेगी, और साथ ही देवभूमि की असाधारण सांस्कृतिक आध्यात्मिक पहचान को, यहाँ के पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी। उत्तराखंड का ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ दूसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण के रूप में सामने आएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उपरोक्त पृष्ठभूमि में उदेश्य को प्राप्त करने के लिए उत्तराखण्ड राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों के व्यक्तिगत नागरिक मामलों को नियंत्रित करने वाले सभी प्रासंगिक कानूनों की जांच करने और मसौदा कानून या मौजूदा कानून में संशोधन के साथ उस पर रिपोर्ट करने के लिए विवाह, तलाक, सम्पत्ति के अधिकार, उत्तराधिकार से सम्बंधित लागू कानून और विरासत, गोद लेने और रख रखाव और संरक्षता इत्यादि के लिए एक विशेषज्ञों, वुद्धिजीवियों और हितधारकों की एक समिति मा० उच्चतम न्यायालय / मा० उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश / मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में, गठित करने का प्रस्ताव है। राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से उत्तराखण्ड सरकार उपरोक्तानुसार एक समिति का गठन करेगी जिसमें उसकी संरचना, संदर्भ की शर्तें आदि का भी उल्लेख रहेगा।

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