उत्तराखंड में साइबर हमले का खतरा अभी टला नहीं है। इस बार बहरूपिये वायरस ने डाटा सेंटर में दस्तक दी है। इसमें चीन के एक बड़े हैकर ग्रुप का हाथ हो सकता है, जो कि बहरूपिया वायरस भेजने का विशेषज्ञ माना जाता है। यह ग्रुप भारत और वियतनाम जैसे देशों में आमजन से जुड़े डेटा में सेंध लगाने में माहिर है।
2024 में माकोप रैनसमवेयर का हमला हुआ था, जिसने पूरा डेटा लॉक करके पैसे की डिमांड की थी। उससे निपटकर डेटा सेंटर आगे बढ़ ही रहा था कि अब बहरूपिया वायरस घुस गया। यह ऐसा वायरस बताया जा रहा है जो कि सिस्टम में घुसने के बाद अपना रूप बदल लेता है। देखने पर लगता है कि यह सिस्टम की ही फाइल है लेकिन जब इसको क्लिक करते हैं तो यह अपना काम शुरू कर देता है।
इस वायरस के इतिहास के हिसाब से माना जा रहा है कि यह जनता से जुड़े डेटा में सेंध लगाता है। इस वजह से खाद्य आपूर्ति विभाग, जहां राशन कार्ड, डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर का डेटा होता है, जीएसटी जहां राज्य कर का पूरा डेटा होता है, पर्यटन जहां लोग अपने आधार आदि के माध्यम से पंजीकरण कराते हैं, जैसी वेबसाइटें इसकी जद में आई हैं।
इस हिसाब से ये भी आशंका जताई जा रही है कि चीन के इन हैकर्स ने ये डेटा कॉपी कर लिया है। हालांकि हैकर्स की ओर से अभी तक कोई डिमांड आदि नहीं आई। वहीं, आईटीडीए के अधिकारी अभी आधिकारिक तौर पर कुछ बोलने को तैयार नहीं, जांच पड़ताल में जुटे हैं।
अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि फायरवॉल एक्सपायर होने के बाद दोबारा क्यों नहीं लगाई गई? क्योंकि जिस समय हमला हुआ, उस दौरान फायरवॉल नहीं चल रही थी। वहीं, कुछ टूल्स जो खरीदे गए थे, उनका आज तक डेटा सेंटर में इस्तेमाल न करने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

