रुद्रप्रयाग में स्थित मद्महेश्वर धाम के कपाट आगामी 16 नवम्बर को शीतकाल के लिए बंद होंगे। आगामी 6 नवंबर 2026 को भगवान तुंगनाथ के कपाट आम श्रदालुओं के लिए शीतकाल को बंद होंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 16 नवंबर को मद्महेश्वर धाम के कपाट बंद होने के बाद भगवान की चल विग्रह डोली शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना होगी। पहले दिन डोली का रात्रि विश्राम गौंडार गांव में होगा। इसके बाद 17 नवंबर को डोली गौंडार से रांसी पहुंचेगी।
18 नवंबर को डोली रांसी से गिरिया के लिए प्रस्थान करेगी। इसके बाद 19 नवंबर को डोली गिरिया से चलकर ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी। यहां भगवान मद्महेश्वर की शीतकालीन पूजा-अर्चना संपन्न होगी।
मद्महेश्वर धाम भगवान शिव के पंचकेदारों में द्वितीय केदार के रूप में प्रसिद्ध है। हर वर्ष यात्रा काल के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सर्दियों में भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के कारण धाम के कपाट परंपरा के अनुसार बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद शीतकाल में भगवान की पूजा ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में की जाती है।
तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि घोषित कर दी गई है। विजयदशमी पर पंचांग गणना के बाद तिथि तय हुई। कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली विभिन्न पड़ावों से होते हुए शीतकालीन गद्दीस्थल पहुंचेगी।
आज विजयदशमी के पावन पर्व पर भगवान तुंगनाथ जी के शीतकालीन कपाट बन्द करने की तिथि पंचांग गणना के आधार पर निकाली गयी। आगामी 6 नवंबर 2026 को भगवान तुंगनाथ के कपाट आम श्रदालुओं के लिए बंद किये जायेंगे। तथा 8 नवंबर 2026 को भगवान तुंगनाथ जी की चल विग्रह डोली अपने शीतकालीन गद्दी मंदिर मक्कू में प्रवेश करेगी।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 6 नवंबर को कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली रात्रि प्रवास के लिए चोपता पहुंचेगी। 7 नवंबर को डोली भनकुन पहुंचेगी, जबकि 8 नवंबर को अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मर्कटेश्वर मंदिर, मक्कूमठ में विराजमान होगी। यहां शीतकाल के दौरान भगवान तुंगनाथ की पूजा-अर्चना संपन्न की जाएगी।



