केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल बजट में कई बड़े एलान किए हैं। खासकर भारतीय अर्थव्यवस्था को अमेरिकी टैरिफ से बचाने के लिए सरकार ने कई नए प्रावधान किए हैं। इनमें निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कुछ आयात शुल्क घटाने की घोषणा की गई है, जिससे व्यापारियों को मुख्य तौर पर राहत मिलेगी। इसके अलावा घरेलू खपत बढ़ाने के लिए भी कई चीजों के शुल्क को घटाया गया है।
क्या होगा सस्ता, क्या महंगा?
- समुद्री खाद्य उत्पादों की प्रोसेसिंग के लिए शुल्क मुक्त आयात की सीमा बढ़ाई गई है। यह सस्ते होंगे। इसके जरिए मछलीपालन उद्योग से जुड़े लोगों को राहत मिलेगी।
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वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए आर्थिक विकास और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है। ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ पेश किए गए इस बजट में सरकार ने जहां एक तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाया है, वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजार के ट्रेडर्स पर टैक्स की सख्ती की है। हालांकि, आम करदाताओं को विदेश यात्रा और पढ़ाई के मामले में बड़ी राहत दी गई है।
बजट दस्तावेजों और हाईलाइट्स के आधार पर, यहाँ जानिए बजट 2026-27 की 10 सबसे बड़ी बातें-
1. शेयर बाजार: F&O ट्रेडिंग पर STT बढ़ा
शेयर बाजार के ट्रेडर्स के लिए बजट में झटका लगा है। सरकार ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटभ्) बढ़ा दिया है:
• फ्यूचर्स: STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है।
• ऑप्शंस : STT 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है।
2. विदेश यात्रा और पढ़ाई पर TCS घटा
मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए, सरकार ने विदेश यात्रा पैकेज और शिक्षा/चिकित्सा के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे (एलआरएस) पर टीसीएस (टीसीएस) की दर को घटाकर 2% कर दिया है। पहले यह दरें काफी ऊंची (5% से 20% तक) थीं।
3. इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च
सरकार ने बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के लिए पूंजीगत व्यय का लक्ष्य बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। वित्त वर्ष 2015 में यह मात्र 2 लाख करोड़ रुपये था, जो अब छह गुना बढ़ चुका है।
सरकार ने वित्तीय अनुशासन का पालन करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3% तय किया है। वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों (आई) में यह 4.4% आंका गया है।
6. शेयर बायबैक पर टैक्स नियम बदला
कंपनियों द्वारा शेयरों के बायबैक से होने वाली आय को अब शेयरधारकों के हाथों में ‘कैपिटल गेन्स’ माना जाएगा और उसी हिसाब से टैक्स लगेगा।
7. इंडस्ट्री और इनोवेशन: सेमीकंडक्टर और बायो-फार्मा
मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0’ और ‘बायो-फार्मा शक्ति’ (बायो फार्माI) जैसी नई योजनाओं का ऐलान किया गया है। साथ ही, रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स के लिए भी एक विशेष स्कीम लाई जाएगी।
8. कैंसर की दवाएं और कस्टम ड्यूटी
स्वास्थ्य सेवा को किफायती बनाने के लिए कैंसर के मरीजों के लिए 17 दवाओं और औषधियों को बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) से छूट दी गई है। इसके अलावा, सोलर ग्लास और लिथियम-आयन बैटरी के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सामानों पर भी कस्टम ड्यूटी में राहत दी गई है।
9. विदेशी संपत्ति का खुलासे के लिए छह महीने का मौका
छोटे करदाताओं के लिए एकमुश्त ‘विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना’ (फॉरेन असेट डिक्लरेशन स्कीम) लाई जाएगी, जो छह महीने के लिए खुली रहेगी। इसके अलावा, 20 लाख रुपये से कम की अचल विदेशी संपत्ति का खुलासा न करने पर अब मुकदमा नहीं चलाया जाएगा।
10. कृषि और मत्स्य पालन
मछुआरों को बड़ी राहत देते हुए भारतीय जहाजों द्वारा ‘एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन’ (EEZ) में पकड़ी गई मछलियों पर ड्यूटी खत्म कर दी गई है। इसके अलावा, 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की योजना भी बनाई गई है। बजट 2026-27 स्पष्ट रूप से ‘युवा शक्ति’ और ‘उत्पादन क्षमता’ पर केंद्रित है। जहां STT में बढ़ोतरी से बाजार में उतार-चढ़ाव दिख सकता है, वहीं टीसीएस में कटौती और कैपेक्स में वृद्धि से अर्थव्यवस्था के पहियों को गति मिलने की उम्मीद है।


