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Saturday, February 14, 2026
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महाशिवरात्रि 2026: वर्षों बाद एक साथ कई शुभ योग का संगम, चार भागों में बांटकर शिव पूजन का विशेष महत्व

महाशिवरात्रि पर बहुत वर्षों बाद कई शुभ योग एक साथ बन रहे हैं। इस दिन कुंभ राशि में बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण और चतुर्ग्रही योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, ध्रुव व व्यतिपात योग भी रहेंगे। यह दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के लिहाज से भी खास रहेगा।

आचार्य विकास जोशी ने बताया कि भगवान शिव की त्रिगुणी सृष्टि है। इसमें तीन ही प्रकार से शिव की पूजा बताई गई है। इसमें सात्विक, राजसिक, तामसिक जो जिस भाव से शिव की पूजा करता है, उसे उसी प्रकार से शिव फल प्रदान करते हैं।

गृहस्थ लोग सात्विक पूजन और राजसिक पूजा करते हैं। सात्विक पूजा में दूध दही, घी, शहद, बेल पत्र फूल मिठाई, फल और राजसिक में भांग धतूरा रुद्राक्ष कमल पुष्प से तामसिक पूजा करते हैं। अघोर साधना में भस्म की आरती, भस्म श्रृंगार से शिव को प्रसन्न किया जाता है। महा शिवरात्रि में सभी पूजन विशेष फल प्रदान करते हैं।

महाशिवरात्रि की यह पावन रात्रि सिर्फ व्रत और पूजन का अवसर नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और शिव कृपा पाने का दुर्लभ संयोग है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी, रविवार को शाम 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी। इस तिथि 16 फरवरी, सोमवार को शाम 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। चतुर्दशी तिथि रात में पड़ने के कारण 15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का व्रत और पूजन किया जाएगा।

महाशिवरात्रि की रात को चार भागों में बांटकर शिव पूजन का विशेष महत्व शास्त्रों में है।

प्रथम प्रहर – 15 फरवरी शाम 6:11 बजे से रात 9:22 बजे तक

द्वितीय प्रहर –15 फरवरी रात 9:23 बजे से 16 फरवरी रात 12:34 बजे तक

तृतीय प्रहर – 16 फरवरी रात 12:35 बजे से सुबह 3:46 बजे तक

चतुर्थ प्रहर – 16 फरवरी सुबह 3:46 बजे से सुबह 6:59 बजे तक

इसके अलावा निशीथ काल पूजा 16 फरवरी की रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक की जा सकती है, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है।

ऐसा करने से धन संबंधी कष्टों से होगा छुटकारा

– महा शिवरात्रि पर 5 बिल्वपत्र पर राम लिख भगवान शिव को करे अर्पित धन संबंधी कष्टों से छुटकारा मिलेगा।

– 3 पत्तों पर केसर और चंदन से लिखे ॐ नमः शिवाय ऐसा करने से पद प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी ।

भगवान शिव का करे अभिषेक

दूध से – मन शांति के लिए

गन्ने के रस से – धन प्राप्ति के लिए

सरसों के तेल से – शत्रु नाश के लिए

गिलोय के रस से – आरोग्य के लिए

गंगा जल से – शिव भक्ति के लिए

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