देहरादून। अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर हुई महापंचायत में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पद से हटाकर उन्हें भी सीबीआई जांच के दायरे में लिया जाए। एक अन्य प्रस्ताव पारित करके इस मामले की सीबीआई जांच डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की एफआईआर पर न करवाने की बात कही गई। महापंचायत में अंकिता के माता-पिता भी शामिल हुए।
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से परेड ग्राउंड में बुलाई गई महापंचायत में करीब 40 संगठनों ने हिस्सा लिया। इंडिया गठबंधन की घटक राजनीतिक पार्टियों ने इस महापंचायत को समर्थन दिया था। महापंचायत की अध्यक्षता अंकिता की मां सोनी देवी और पिता वीरेन्द्र सिंह भंडारी ने की। जस्टिस फॉर अंकिता मंच श्रीनगर की रेशमा पंवार, महिला किसान अधिकार मंच ऊधम सिंह नगर की हीरा जंगपांगी, उत्तराखंड महिला मंच नैनीताल की बसंती पाठक, राज्य आंदोलनकारी ऊषा भट्ट और भारत ज्ञान विज्ञान समिति की उमा भट्ट ने पंच की भूमिका निभाई।
पांचों पंचों ने महापंचायत में पांच अलग-अलग प्रस्ताव पेश किये। सभी प्रस्ताव सर्व सम्मति से पारित किये गये। पहले प्रस्ताव में डॉ. अनिल जोशी की एफआईआर रद्द करने और दूसरे प्रस्ताव में अंकिता के माता-पिता के मुख्यमंत्री को दिये गये पत्र के आधार पर सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में करवाने की मांग की गई। तीसरे प्रस्ताव में कहा गया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता की हत्या के बाद सबूत नष्ट करने का आदेश देने की बात खुद स्वीकार की थी। ऐसे में उन्हें भी जांच के दायरे में लिया जाए और निष्पक्ष जांच होने तक उन्हें पद से हटाया जाए।
चौथे प्रस्ताव में कहा गया कि 15 दिन के भीतर पीड़ित पक्ष की शिकायत पर जांच शुरू करवाई जाए। ऐसा न होने में पूरे राज्य में आंदोलन तेज करने की बात कही गई। पांचवें प्रस्ताव में दुष्यंत गौतम और अजय कुमार को उनके पदों से हटाकर जांच के दायरे में लाने की बात कही गई। महांपचायत के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक पत्र भी भेजा गया। पत्र में भी अनिल जोशी की एफआईआर रद्द करके अंकिता के माता पिता के पत्र के आधार पर सीबीआई जांच करवाने सहित विभिन्न मांगें रखी गई हैं।
अंकिता के पिता वीरेन्द्र सिंह भंडारी ने कहा कि लोगों में एक भ्रम फैलाया गया था कि अंकिता के मुख्यमंत्री से मिले थे और वे बिक गये हैं। उन्होंने कहा कि हमने मुख्यमंत्री से मिलकर सीबीआई जांच की मांग सुप्रीम कोर्ट के जज से करने की मांग का पत्र दिया था। लेकिन, मुख्यमंत्री ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि वे अनिल जोशी नाम के व्यक्ति को जानते तक नहीं। एफआईआर दर्ज करवाने से पहले और उसके बाद उन्होंने उनसे कोई संपर्क नहीं किया।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सरकार द्वारा पोषित व्यक्ति की एफआईआर पर करवाई गई जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती। ऐसे में हमें शक है कि सीबीआई की जांच में भी वीआईपी को बचाया जाएगा।
मंच की तरफ से तुषार रावत ने प्रस्ताव पढ़कर सुनाया l
महापंचायत में कमला पंत, मोहित डिमरी, ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल, इंद्रेश मैखुरी, हरीश रावत, महावीर राणा आदि ने अपने विचार रखे राजस्थान से आई सरिता भारतके आदि ने भी अपने विचार रखे । मंच संचालन निर्मला बिष्ट ने किया। सतीश धौलाखंडी, त्रिलोचन भट्ट, शिवानी पांडेय, गीता गैरोला और अन्य लोगों ने जनगीत प्रस्तुत किये।
महापंचायत में 40 से अधिक संगठनों और अलग-अलग सामाजिक क्षेत्रों से लोग पहुँचे थे l महापंचायत में अनूप नौटियाल , पी सी तिवारी, डॉ. रवि चोपड़ा, तन्मय ममगाईं, प्रभात ध्यानी, नंदन पांडे, चारु तिवारी, माया चिलवाल, लोकेश नवानी, पद्मा गुप्ता, गरिमा दसौनी, प्रमिला रावत, गीता गैरोला, विमला कोली, स्वाति नेगी आदि मौजूद थे।


