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Tuesday, June 22, 2021
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कोराना की सीखः आखिर हर जिला कब बनेगा नंदूरबार!

आखिर हर जिला कब बनेगा नंदूरबार! वर्तमान में पूरे देश प्रदेश में कोरोना महामारी के चलते चारों ओर जहां स्वास्थ्य सुविधाओं का रोना रोया जा रहा है और कोराना संक्रमितों को विभिन्न राज्यों में न तो आक्सीजन ही उपलब्ध हो पा रही है और न ही बेड समेत अन्य सुविधाएं। कोराना महामारी के बीच आए दिन मीडिया में इस प्रकार की खबरों का प्रमुख स्थान लेना जहां अब आम बात हो गई है, वहीं महाराष्ट्र राज्य में एक ऐसा जिला है नंदूरबार, जहां पर पिछले साल की अपेक्षा इस बार 70 फीसदी तक नये केस कम हुए हैं और यहां पर तैयार की गई बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते कोराना संक्रमितों को बेहतर ढंग से उपचार मिल रहा है और यह सब कर दिखाया है यहां पर तैनात डीएम डा0 राजेन्द्र भरूड़ ने।

जी हां, यहां हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र राज्य के एक अति पिछड़े जनपद नंदूरबार की। महाराष्ट्र राज्य (कोरोना की दूसरी लहर का एपिसेंटर) के एक अति पिछड़े जिले नंदूरबार के डीएम हैं डा0 राजेन्द्र भरूड (DM Dr Rajendra Bharud), उन्होंने किस प्रकार से अपने जिले के डॉक्टरों के साथ मिलकर 2020 की सीख को आगे बढ़ाया, जहां पूरे देश में ऑक्सिजन की त्राहि-त्राहि है, बेड नहीं हैं, अस्पतालों की बुरी स्थिति सबके सामने है, इस अति पिछड़े जिले में अप्रैल 2021 तक 5 ऑक्सिजन प्लांट्स काम कर रहे थे, दूरदराज के स्वास्थ्य केंद्र जो अप्रैल 2020 में बुरी हालत में थे, वहां 2021 में सभी जरूरी सुविधायें पहुंच चुकी थी, सूचनाओं का आदान-प्रदान ट्रांसपेरेंट तरीके से होने लगा, मतलब कि इस शख्स ने अपने डॉक्टरी ज्ञान एवं आईएएस की शक्तियों का उपयोग इस प्रकार से किया कि इस जिले के लोगों को न तो ऑक्सीजन के लिये भागना पड़ा और नही बेड्स की कमी हुई, साथ ही नए केस भी 70 प्रतिशत तक कम हुए।

वरिष्ठ सर्जन एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाहकार डॉ महेश भट्ट के अनुसार हम नेताओं पर और उनके निकम्मेपन पर बहुत कुछ बोलते हैं, बोलना भी चाहिए, आखिर हम एक डेमोक्रेटिक देश में रहते हैं, लेकिन क्या हमको अपने ब्यूरोक्रेट्स से नहीं पूछना चाहिए? आखिर उनकी तनख्वाह भी तो टैक्स पेयर्स के ही पैसे से जाती है, इनको इतनी पावर्स होती हैं जिसका उपयोग ज्यादातर लोगों को बेवजह हड़काने में या फिर अपनी हनक दिखाने के लिये होता है, क्यों नहीं हर जिला नंदुरबार बन सकता है? आखिर सभी डीएम आईएएस ही होते हैं, और इसमें ये दोहराय नहीं हो सकती कि उनका काम भी यही है।

सोचिए, अगर हर जिले में नंदूरबार जिले की तरह कोराना से लड़ने की तैयारी की गई होती तो शायद हम इस भयावह स्थिति में नहीं होते। क्या हर जिले के जिलाधिकारी से नहीं पूछा जाना चाहिए कि भाई तुम तो क्रीम थे, (क्योंकि हमारे देश मे क्रीम आईएएस बनता है), फिर तुमने क्या किया? नेता तो आज है कल नहीं है, पर आईएएस तो एक बार बन गया तो वो हमेशा रहने वाला है, तो जब देश की रिस्पांसिबिलिटी पीएम की, प्रदेश की सीएम की, तो जिले की रिस्पांसिबिलिटी किसकी होनी चाहिए, निश्चित ही डीएम की होगी।

अतः ये बहुत जरूरी है कि हम नेताओं को तो जरूर पूछें, पर साथ ही अपने ब्यूरोक्रेसी से भी सवाल करें, तभी हर जिला नंदूरबार की तरह बन सकता है, ओर हर डीएम डा0 राजेन्द्र भरूड़ की तरह। इससे देश का ज्यादा भला होगा, ओर हमारी क्रीम इंटेलिजेंस (IAS, IPS, PCS और अन्य ब्यूरोक्रेसी) कुछ करेगी, सरकारें तो आएंगी जाएंगी, इसमें हमारे वोटों की ताकत है, पर हमारी ब्यूरोक्रेसी का उत्तरदायित्व एवं उनकी रिस्पांसिबिलिटी भी तो फिक्स होनी चाहिए। इनको सुधारने का काम भी तो जनता का ही है, क्योंकि संविधान के अनुसार जनता ही तो मालिक है।
ऐसे भगीरथ प्रयास के लिए डा0 राजेन्द्र भरूड़ को लोकपक्ष की टीम का सलाम।

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