वसीम जाफर ने उत्तराखंड सीनियर टीम के मुख्य कोच पद का पद छोड़ दिया है। अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि विजय हजारे ट्रॉफी की टीम घोषित करने से पहले ना तो उनसे पूछा गया और ना ही सलाह ली गई। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में काम करना उनके लिए मुश्किल है। उन्होंने सीएयू पदाधिकारियों और सलेक्शन कमेटी पर चयन में मनमानी करने समेत कई आरोप भी लगाए।

जाफर ने आरोप लगाया कि सलेक्शन कमेटी ने सीएयू पदाधिकारियों के दबाव में टीम चुनी है। उन्हें उनकी पसंद की टीम नहीं दी जा रही है। विजय हजारे ट्रॉफी को लेकर जो टीम चुनी गई है, उसको लेकर पहले उनसे बातचीत नहीं की गई। ना तो उनसे कुछ पूछा गया और ना ही सुझाव मांगे गए। उन्होंने कहा कि मुख्य कोच के तौर पर ऐसी परिस्थिति में वे काम नहीं कर सकते हैं।

वहीं, सीएयू के सचिव महिम वर्मा ने जाफर के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि जाफर को उनकी पसंद की टीम दी गई है। इकबाल अब्दुला समेत महत्वपूर्ण खिलाड़ियों का चयन उनके कहने पर ही किया गया। टीम चयन के दौरान भी उनका सलेक्शन कमेटी के साथ विवाद हुआ।

विवाद आगे न बढ़े इसलिए उन्हीं की पसंद की टीम दे दी गई। टीम परफॉर्म नहीं कर पाई तो सवाल उठने ही थे। अब विजय हजारे ट्रॉफी की टीम को लेकर भी चयनकर्ता और जाफर के बीच विवाद हुआ। चयनकर्ताओं ने टीम फाइनल करने से पहले जाफर को कई फोन किए लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

वसीम जाफर को अगस्त 2020 में उन्हें उत्तराखंड के मुख्य कोच की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि इस दौरान आईपीएल के चलते उन्होंने विधिवत कोचिंग शुरू नहीं की। आईपीएल खत्म होने के बाद नवंबर 2020 में उनका क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के साथ कांट्रेक्ट हुआ था। इसके बाद टीम ने उनकी कोचिंग में ही सैयद मुश्ताक ट्रॉफी में हिस्सा लिया।

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