राज्य में मनरेगा योजना में बदलाव की तैयारी है। इस योजना में अभी तक जहां ग्रामीण श्रमिक गांव में काम कर मजदूरी पाते थे, लेकिन अब मनरेगा के तहत ग्रामीण लोग अपना काम भी शुरू कर सकेंगे। उत्तराखण्ड सरकार मनरेगा योजना को अब आजीविका से जोड़ने जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार इस योजना पर लगभग 218 करोड़ रुपये खर्च करेगी और योजना के प्रथम चरण में लगभग 30 हजार मनरेगा जॉबकार्ड धारक परिवारों को इस योजना का सीधा-सीधा लाभ मिलने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है।

मौजूदा समय में राज्य में मनरेगा का लगभग 710 करोड़ का बजट है, जिसमें से इसका 35 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार ने इस आजीविका योजना पर खर्च करने का निर्णय लिया है।
विदित हो कि उत्तराखण्ड में वैश्विक महामारी कोरोना के बाद ठप पड़ी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जहां सरकार ने मनरेगा योजना पर फोकस किया, वहीं राज्य में काफी संख्या में प्रवासी लोगों के लौटने के बाद उन्हें भी रोजगार उपलब्ध कराना राज्य सरकार के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

मार्च माह में कोरोना काल के बाद हालांकि सरकार ने अप्रैल माह में प्रदेश के भीतर MNREGA में तेजी से काम शुरू कराए थे। मनरेगा में अब तक राज्य में लगभग पांच लाख लोग जुड़ चुके हैं और 35 हजार से अधिक के काम प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में शुरू कराए जा चुके हैं।

हालांकि अभी तक इस योजना में केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित निर्माण कार्यों जैसे जल संवर्द्धन, मोटर मार्ग, आंगनबाड़ी एवं पंचायत घरों का निर्माण आदि शामिल हैं। वर्तमान में इस योजना में मौजूदा प्रावधान के तहत लोग काम करके प्रतिदिन के हिसाब से निर्धारित मजदूरी ले रहे थे।

अब यह है नई योजना

मनरेगा में राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे बदलाव और इसमें शामिल की जा रही नई योजना के तहत संबंधित विभागों जैसे कृषि, पशुपालन, डेयरी आदि से मिलकर MNREGA में अपना काम शुरू करने के लिए धनराशि दी जाएगी और विभाग इसमें उस व्यक्ति की अपनी योजनाओं के हिसाब से मदद करेंगे।

जैसे उदाहरण के लिए मुर्गीपालन को लिया जाए तो इसमें विभाग जहां ग्रामीणों को मुर्गी बाड़ा बनाने के लिए मनरेगा से धनराशि देगा, वहीं विभाग चूजे भी उपलब्ध कराएगा।

इस नई योजना में उद्यान विभाग ग्रामीणों को सब्जी उत्पादन में मदद करेगा, जिसे साधन पैकेज का नाम दिया गया है। योजना के मुताबिक गांवों में भूमिहीन और गरीब लोगों को इसमें पहली प्राथमिकता दी जाएगी। इस योजना में भूमिहीन परिवारों के लिए 41 हजार और अन्य परिवारों के लिए 99 हजार रुपये का पैकेज देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

सूबे के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि सभी विभागों को कहा गया है कि योजना में अधिक से अधिक धनराशि उपलब्ध कराएं। कृषि, पशुपालन, डेयरी आदि विभागों को भी इसमें सम्मिलित करने को कहा गया है।

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