देहरादून। प्रदेश में निजी स्कूल शिक्षण सत्र 2020-21 में किसी भी तरह की फीस में वृद्धि नहीं कर सकेंगे। सूबे के शिक्षा सचिव ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।

बता दें कि उत्तराखण्ड में वैश्विक महामारी कोरोना के चलते जारी लाॅकडाउन के चलते सभी सरकारी निजी स्कूल मार्च तीसरे सप्ताह से बंद चल रहे हैं। ऐसे में कई निजी स्कूलों के द्वारा अभिभावकों से मनमाने ढंग से शुल्क वसूला जा रहा था।

इसके बाद कई लोग निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर हाईकोर्ट तक गए थे। इस संबंध में कोर्ट ने भी आदेश दिए थे कि जो स्कूल आनलाइन पढ़ा रहे हैं वही सिर्फ ट्यूशन फीस ले सकते हैं। इसके लिए भी अभिभावकों पर कोई दवाब नहीं बनाया जाएगा।

बीते रोज सोमवार को शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम की ओर से आदेश जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि यदि कोई स्कूल अपने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ा रहा है तो किसी भी प्रकार के शुल्क में वृद्धि न करने का आदेश सभी डे और बोर्डिंग स्कूलों में समान रूप से लागू होगा।

आदेश में यह भी कहा गया है कि इसके बावजूद कोई अभिभावक यदि शुल्क देने में असमर्थ है तो संबंधित अभिभावक स्कूल प्रधानाचार्य या स्कूल प्रबंधन समिति से ट्यूशन फीस जमा करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग कर सकता है।

प्रदेश में ऐसे सभी अभिभावकों को स्कूल की ओर से अतिरिक्त समय दिया जाएगा। आदेश में यह भी कहा है कि प्राइवेट स्कूलों के कर्मचारियों को भी नियमित रूप से स्कूल प्रबंधन की ओर से वेतन दिया जाएगा।

आदेश में सचिव द्वारा स्पष्ट किया गया है कि किसी भी परिस्थिति में संबंधित स्कूल के छात्र को स्कूल से बाहर नहीं किया जाएगा, जो स्कूल ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं वह ट्यूशन फीस ले सकेंगे।

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