उत्तराखण्ड सरकार ने संस्थागत क्वारंटीन की व्यवस्था में आंशिक सुधार करते हुए बदलाव किया है। हवाई जहाज के माध्यम से अब यदि कोई व्यक्ति 75 संवेदनशील शहरों से नहीं आता है तो उसे अब संस्थागत क्वारंटीन की जगह होम क्वारंटीन में ही 14 दिन रहना पड़ेगा।

जबकि संवेदनशील शहरों से आने वाले लोगों को स्वयं के भुगतान पर होटल या फिर सरकार के संस्थागत क्वांरटीन सेंटर में सात दिन के लिए क्वारंटीन में रहना पड़ेगा।

विदित हो कि देश के विभिन्न हिस्सों से यहां प्रदेश में काफी संख्या में प्रवासी हवाई जहाज के द्वारा यहां पहुंच रहे हैं। यहां पहुंचने पर जरूरी क्वारंटीन के तहत उन्हें होटलों में काफी अधिक धनराशि व्यय करनी पड़ रही थी। लाॅकडाउन के दौरान जेब पर पड़ रहे इस अतिरिक्त व्यय के चलते कई लोगों ने हवाई यात्रा करने के परहेज करना भी शुरू कर दिया था।

इस संबंध में राज्य सरकार ने बीती 24 मई को स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) जारी कर हवाई जहाज से आने वाले लोगों के लिए संस्थागत क्वारंटीन की व्यवस्था लागू की थी। सरकार ने लोगों के बढ़ते विरोध एवं परेशानी को देखते हुए अब तक लागू इस व्यवस्था में आंशिक बदलाव किया गया है।

यह किया गया आंशिक बदलाव

राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक अब देश के विभिन्न राज्यों के संवेदनशील 75 शहरों से नहीं आने वाले लोगों को 14 दिन होम क्वारंटीन में रहना होगा। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति कनेक्टिंग फ्लाइट से दिल्ली या किसी अन्य संवेदनशील शहर में फ्लाइट बदलता है तो उसे भी होम क्वारंटीन रहना पड़ेगा। राज्य सरकार द्वारा किए गए इस आंशिक संसोधन के तहत अब गंभीर रूप से बीमार, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और परिवार में किसी की मृत्यु पर आने वाले लोगों को सात दिन का अनिवार्य संस्थागत क्वारंटीन नहीं होना पड़ेगा।

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