मानव रहित विमान रुस्तम की नजरों से दुश्मन का बचना अब संभव नहीं है। दुश्मनों की जासूसी के लिए तैयार किए गए इस विमान के लिए विशेष तैयार हो रही डिवाइस के चलते अब रात को भी दुश्मन इससे बच नहीं पाएंगे।

यहां राजधानी देहरादून में उपकरण अनुसंधान एवं विकास संस्थान (IRDE) रुस्तम के लिए नाईट विजन डिवाइस बनाने के लिए रिसर्च का काम जोरों पर है। बताया गया है कि जल्द ही इस नाईट विजन डिवाइस को तैयार कर आर्मी को सप्लाई किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि डीआरडीओ ने रुस्तम-दो का निर्माण दुश्मन पर निगरानी रखने, उसकी टोह लेने, दुश्मनों की बातचीत सुनने, टारगेट पर सटीक निशाना लगाने के लिए किया है। बता दें कि पहली बार 17 फरवरी 2016 को रुस्तम-2 ने उड़ान भरी थी। इससे पूर्व इंडियन आर्मी इस प्रकार के ड्रोन की खरीद इजराइल समेत अन्य देशों से करती आ रही थी।

यहां राजधानी देहरादून स्थित आईआरडीई में नाइट विजन डिवाइस पर रिसर्च का काम इन दिनों जोरों पर चल रहा है। सूत्रों की मानें तो रिसर्च के बाद ऑप्टो इलेक्ट्रो फैक्ट्री में नाइट विजन डिवाइस तैयार होने शुरू हो गए हैं। जल्द ही इनकी टेस्टिंग कर इन्हें आर्मी को सप्लाई किया जाएगा। इस डिवाइस के जरिए रात्रि के समय न सिर्फ दुश्मन की हरकत पर नजर रखी जा सकेगी, बल्कि उनके मध्य होने वाले वार्तालाप आदि और दुश्मनों पर सटीक निशाना भी लगाया जा सकेगा।

जानिए रूस्तम की खासियत

DRDO डीआरडीओ द्वारा निर्मित यह ड्रोन 250 किमी की दूरी से दुश्मन की टोह लेकर जहां उसके स्थान के बारे में सटीक बता सकता है वहीं उनकी बातचीत की भी समस्त जानकारी देने में सक्षम है। यह 24 घंटे तक लगातार उड़ान भरने में माहिर है। हालांकि अभी तक यह सिर्फ दिन में ही काम कर पाता है, लेकिन अब इस डिवाइस के बाद यह रात्रि के समय भी सरलता से दुश्मन पर नजर रख सकता है।

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