देहरादून। जायका वित पोषित उत्तराखण्ड वन संसाधन प्रबंधन परियोजना (UFRMP) के अन्तर्गत पर्वतीय इलाकों में गठित स्वयं सहायता समूहों की सैंकड़ों महिला सदस्यों ने उत्तराखण्ड राज्य एवं अन्य राज्यों में बढ़ती मांग को देखते हुये लगभग 2 लाख फेस मास्क तैयार करने का बीड़ा उठाया है।

कोविड-19 के कारण देश में लॉकडाउन की स्थिति में भी अल्मोडा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, नैनीताल, पौड़ी, पिथौरागढ़ और टिहरी गढ़वाल जिलों में 100 से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा मास्क की कमी को दूर करने के लिये घर में रहकर सूती कपड़े के फेस मास्क सिल कर तैयार किये जा रहे हैं।

स्वंय सहायता समूहों की सदस्यों द्वारा सूती कपड़े से निर्मित पुन: उपयोग में लाये जाने वाले फेस मास्क बनाने की पहल मुख्य परियोजना निदेशक अनूप मलिक के मार्गदर्शन में शुरू की गयी है। श्री मलिक के अनुसार वर्तमान परिप्रेक्ष्य में फेस मास्क तैयार करने का कार्य सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यह पहल परियोजना की समाज के प्रति संवेदनशीलता को इंगित करती है। हमने अच्छी गुणवत्ता के पुन: उपयोग किये जाने वाले फेस मास्क की बढ़ती मांग को देखते हुए स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को उच्च गुणवत्ता, कम दाम वाले एवं बायोडिग्रेडेबल फेस मास्क बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।

मास्क बनाने से स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को लॉकडाउन के दौरान भी अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। प्रतिदिन महिलाएं घर बैठे ही 6 से 8 घंटे कार्य कर दो सौ से तीन सौ रूपये कमा सकती हैं। यह पहल मास्क की कमी को दूर कर कोरोना वायरस के रोकथाम में योगदान करने में सहायक सिद्ध होगी।
स्वयं सहायता समूह सदस्यों को मास्क बनाने के लिये अच्छी गुणवत्ता का सूती कपड़ा क्लस्टर स्तरीय फेडरेशन उपलब्ध करा रहे हैं। परियोजना टीम सुविधाजनक मास्क बनाने के लिये ऑनलाइन वीडियो तथा टेली-कानफ्रेन्सिंग के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण एवं दिशा-निर्देश दे रही है।

टिहरी गढ़वाल जिले के भिलगंना विकासखण्ड के पोखार गॉव की राज राजेश्वरी स्वयं सहायता समूह की सदस्या रजनी देवी कहती हैं कि लॉकडाउन के कारण हमारी आर्थिक स्थिति चरमरा गयी है परन्तु यह हमारी परियोजना की उत्तम पहल है जिसके द्वारा घर में ही रहकर नकद आय कमाने के अवसर हमें मिल रहा है।
परियोजना एक माह में लगभग 2 लाख मास्क तैयार करने में जुटी है। मास्क का विपणन उत्तराखण्ड के साथ-साथ अन्य राज्यों में की भी किया जायेगा।

यह परियोजना उत्तराखण्ड राज्य के 13 वन प्रभागों के 750 गांवों में संचालित की जा रही है। परियोजना के तहत अब तक 1379 स्वयं सहायता समूहों को गठित किया जा चुका है। इन समूहों में लगभग 14000 सदस्य हैं। समूहों को क्ल्सटर स्तर पर लिंकेज विकसित करने एवं व्यावसायिक सेवायें प्रदान करने के उददेश्य से 18 क्लस्टर फेडरेशन में संगठित किया गया है।

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