– संस्थान ने एडवांस यूरोलॉजी सेंटर में किया सेवाओं का विस्तार
पथरी (स्टोन) की समस्या से जूझ रहे रोगियों के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश की ओर से अच्छी खबर है। संस्थान में अब बिना सर्जरी के भी गुर्दे की पथरी का इलाज संभव हो सकेगा। एम्स में अति अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित इस सुविधा का विस्तार करते हुए एडवांस यूरोलाॅजी सेंटर स्थापित कर सेवाओं की शुरुआत कर दी गई है। बताया गया है कि यह उपचार आयुष्मान भारत योजना में शामिल है।

लगातार आधुनिकतम तकनीकियों और मेडिकल सुविधाओं में इजाफा कर रहे एम्स ऋषिकेश ने यूरोलाॅजी विभाग में अति आधुनिक मशीनों को स्थापित कर मरीजों की सुविधा के मद्देनजर यूरोलाॅजिकल सेवाओं में विस्तार किया है।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने कहा कि मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना एम्स की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि एडवांस यूरोलाॅजी सेंटर में बिना सर्जरी किए अथवा बिना चीरा लगाए गुर्दे की पथरी के उपचार की सुविधा शुरू कर दी गई है। लिहाजा अब एम्स अस्पताल में उपलब्ध नई तकनीक और सुविधाओं से पथरी तोड़ने के लिए मरीज को बेहोश करने की आवश्यकता नहीं होगी।

निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि उच्च तकनीक आधारित इस नई सुविधा के शुरू होने से गुर्दे की पथरी का इलाज कराने वाले मरीज को उसी दिन अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस सेंटर के वीडियो यूरोडायनेमिक यूनिट में यूरिन की रुकावट संबंधी सभी तरह के परीक्षण आसानी से हो सकेंगे और इस प्रक्रिया में मरीज को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

संस्थान के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डाॅ. अंकुर मित्तल ने इस बाबत बताया कि एडवांस यूरोलाॅजी सेन्टर एक समर्पित केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इस केंद्र में यूरोलाॅजी से संबंधित सभी तरह की अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और सर्जिकल की सुविधाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि इस नए केंद्र में अतिरिक्त काॅर्पोरल शाॅक वेव लिथोट्रिप्सी सुविधा उपलब्ध है। जिससे किडनी में स्थित अधिकतम डेढ़ सेमी. आकार की पथरी को बिना ऑपरेशन के तोड़ा जा सकता है। यह तकनीक बहुत ही सटीक और सुविधाजनक है।

डा. मित्तल ने बताया कि इससे मूत्र की पथरी को भी आसानी से हटाया जा सकता है। इस तकनीक से रोगी को बेहोश करने के लिए एनेस्थीसिया देने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है। ईएसडब्ल्यूएल शाॅक वेव उत्पन्न करके मूत्र में स्थित पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है जो मूत्र मार्ग से आसानी से बाहर निकल जाते हैं। उन्होंने बताया कि एडवांस यूरोलाॅजी सेंटर में आधुनिक व नवीनतम उच्च तकनीक वाली डोर्नियर डेल्टा-2 मशीन लगाई गई है।

साथ ही यहां मूत्र पथ की बीमारियों की जांच के लिए यूरोडायनेमिक्स परीक्षण की सुविधा के अलावा एडवांस वीडियो और एंबुलेटरी यूरोडायनामिक्स सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। गौरतलब है कि एम्स, ऋषिकेश में यूरोलाॅजी विभाग की सेवाएं वर्ष 2017 से शुरू हुई थी। इस विभाग में रविवार को छोड़कर अन्य सभी दिनों में सैकड़ों मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। विभाग में अब तक यूरोलॉजिकल ऑपरेटिव देखभाल, रोबोटिक व ओपन एंडोस्कोपी तथा न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी की सुविधा उपलब्ध थी।

इसके साथ ही अब अति अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित इलाज की सुविधाओं का विस्तार करते हुए यहां एडवांस यूरोलाॅजी सेंटर ने भी कार्य करना शुरू कर दिया है। इस अवसर पर डीन एकेडेमिक प्रोफेसद मनोज गुप्ता, मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. लतिका मोहन,डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा, आईबीसीसी की प्रमुख वरिष्ठ सर्जन डा. बीना रवि, डा. मधुर उनियाल, यूरोलाॅजी विभाग के डा. विकास पंवार, डा. सुनील कुमार, डा. एके मंडल, डा. शेंकी सिंह, डा. रूद्रा आदि मौजूद थे।

यह हैं एडवांस यूरोलाॅजी सेंटर की विशेषताएं

सेंटर में एक्स-रे, मिक्ट्युरेटिंग सिस्टोयूरेथोग्राम (एमसीयूजी), रेट्रोग्रेड यूरेथ्रोग्राम (आरयूजी), नेफ्रोस्टोग्राम, अल्ट्रासाउंड, ट्रांस-रेक्टल अल्ट्रासाउंड (टीआरयूएस) गाइडेड प्रोस्टेट बायोप्सी तथा इमेज गाइडेड थैराप्यूटिक प्रक्रियाओं की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए यहां नवीनतम इमेजिंग उपकरण, अल्ट्रासाउंड मशीन व सी-आर्म फ्लोरोस्कोपी मशीनें स्थापित की गई हैं।

इस तरह होगा उपचार आसान

यह मशीनें गुर्दे, मूत्राशय, मूत्रमार्ग और प्रोस्टेट में किसी भी मूत्र संबंधी विकार का पता लगा सकती हैं। जिससे उपचार करने में आसानी होती है और मरीज को आईपीडी में भर्ती किए बिना सभी आपातकालीन प्रक्रियाओं को डे-केयर में ही किया जा सकता है। इस सेंटर में एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं उपलब्ध होने से मरीजों की दिक्कतें कम होंगी और उनका समय भी बचेगा। निकट भविष्य में यह केंद्र यूरोलॉजी के लिए नैदानिक सेवाएं प्रदान करने में सहायक होगा। एडवांस यूरोलाॅजी सेंटर में सेवाएं शुरू होने से मूत्र संबंधी विकारों के इलाज के लिए किसी भी मरीज को उत्तराखंड से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

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