उत्तराखण्ड में स्थित टोंगिया गांवों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार अब उत्तराखंड के टोंगिया गांवों को राजस्व ग्राम घोषित करने की तैयारी में है। प्रदेश के टोंगिया गांवों को राजस्व ग्राम घोषित करने से इन गांवों की लगभग पचास हजार आबादी को राशनकार्ड से लेकर अन्य तमाम प्रकार की नागरिक सुविधाएं हासिल हो सकेंगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस दिशा में काम भी शुरू हो गया है।

इस संबंध में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का कहना है कि सरकार ने अभी हाल ही में टिहरी बांध विस्थापितों के कई गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा प्रदान किया है। इसी तरह से अब हम प्रदेश के टोंगिया गांवों को भी राजस्व ग्राम बनाने जा रहे हैं। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। इससे करीब 50 हजार लोगों को फायदा होगा। इन्हें राजस्व गांवों के समान नागरिक सुविधाएं मिल पाएंगी।

प्रदेेश में नैनीताल, रामनगर, खटीमा, चंपावत, देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश आदि में इस तरह के गांव हैं। इन गांवों की आबादी करीब पचास हजार बताई जा रही है। विदित हो कि अभी कुछ समय पहले ही हमारे पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश ने भी सहारनपुर, गाजियाबाद आदि क्षेत्रों के टोंगिया गांवों को वन संरक्षण अधिनियम के तहत राजस्व गांव का दर्जा दिया है।

जानें कौन हैं टोंगिया गांव

उत्तराखण्ड में टोंगिया उन श्रमिकों के गांव हैं जो वर्ष 1930 में वनों में पौधरोपण के लिए हिमालयी क्षेत्र में लाए गए थे। आजादी से पहले इन श्रमिकों को वनों में स्थित गांवों को कई तरह की सुविधाएं भी हासिल थीं। 1980 के आसपास वन संरक्षण अधिनियम बनने के बाद इनके अधिकार खत्म हो गए और यह गांव भी संरक्षित वनों में घिर कर रह गए। राजस्व ग्राम घोषित न होने के चलते अभी तक इन्हें किसी भी प्रकार की सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

अब यह फायदा मिलेगा इन गांवों को

बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, राशनकार्ड, शौचालय सहित तमाम प्रकार की सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ।

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