देश को आजाद हुए सात दशक से भी अधिक का समय हो गया है लेकिन पहाड़ का जीवन आज भी पहाड़ जैसा ही है। पहले उत्तर प्रदेश के समय कहा जाता था कि यहां का विकास तब तक संभव नहीं है जब तक कि यह अलग प्रदेश नहीं बन जाता, मगर अब तो इसे भी बने दो दशक का समय हो गया है लेकिन अभी भी पहाड़ की न दिशा बदली और न ही दशा।

इसका ताजा उदाहरण आज तब देखने को मिला जब देहरादून जिले के विकासनगर के त्यूनी तहसील क्षेत्र के शूनीर गांव निवासी एक बीमार को ग्रामीण डंडी पर रख गांव से करीब 8 किमी दूर पैदल चलकर सड़क मार्ग तक ला रहे थे, कि रास्ते में ही बीमार ने दम तोड़ दिया। इसे पहाड़ की बदकिस्मती न कहा जाए तो और क्या कहा जाए?

प्राप्त जानकारी के अनुसार शूनीर गांव में एक व्यक्ति की अचानक तबीयत खराब हो गई। इस गांव से मुख्य सड़क की दूरी करीब आठ किमी है, ऐसे में ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि डंडी-कंडी के सहारे बीमार को अस्पताल पहुंचाया जाए। बीमार को जब तक लोग मुख्य सड़क तक पहुंच पाते, उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इसके बाद लोग उसे लेकर वापस गांव लौट गए।

ग्राम प्रधान सुनीता देवी के साथ गांव के सियाराम, सूर्या, भगतराम एवं हरि सिंह आदि ने बताया कि वर्ष 2016 में इस गांव के लिए मोटर मार्ग निर्माण को स्वीकृति मिली थी। दारागाड़-कथियान मोटर मार्ग से गांव तक के लिए सड़क बनाई जानी थी, लेकिन अभी तक इस पर निर्माण कार्य चालू नहीं हो पाया है।

इसी गांव में नहीं बल्कि ऐसे और भी कई गांव हैं जिनके लिए आज तक सड़क नहीं बन पाई है। ऐसे में आपातकाल के समय कई ग्रामीण समय पर उपचार न मिलने के कारण असमय मौत को गले लगा चुके हैं।

इधर, लोक निर्माण विभाग चकराता के अधिशासी अभियन्ता बी0डी0 भट्ट ने बताया कि इस गांव के मोटर मार्ग निर्माण के लिए शासन स्तर पर बजट आवंटन का प्रस्ताव लंबित चल रहा है। शासन से बजट मिलते ही इस मार्ग पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

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