देहरादून। उत्तराखण्ड में देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के खिलाफ पिछले लंबे समय से आंदोलनरत गंगोत्री व केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों में अब धीरे-धीरे असंतोष पनप रहा है। अपनी मांग पूरी नहीं होने से नाराज तीर्थ पुरोहितों ने अपना विरोध दर्ज करते हुए शनिवार को आज उत्तराखंड सरकार का पिंडदान किया। इस अवसर पर तीर्थ पुरोहितों ने सरकार को सनातन धर्म विरोधी घोषित करते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

गंगोत्री धाम में पुरोहित समाज का आज शनिवार को 73वें दिन भी अपना अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान उन्होंने गंगा भागीरथी नदी तट पर उत्तराखंड सरकार का पिंड दान कर पुण्य सलीला मां गंगा से राज्य सरकार को सदगति देने की कामना की। विरोध जताने वालों में प्रवीण सेमवाल, रवि सेमवाल, गोवर्द्धन सेमवाल, प्रेम बल्लभ सेमवाल, राकेश सेमवाल, कामेश्वर सेमवाल, संतोष सेमवाल, दिनेश सेमवाल आदि पुरोहित शामिल रहे।

दूसरी ओर केदारनाथ धाम में केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला के नेतृत्व में सभी तीर्थपुरोहित संगम तट पर पहुंचे और सरकार का पिंडदान किया। इस अवसर पर तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि वह 38 दिन से आंदोलित हैं, लेकिन उत्तराखण्ड सरकार उनकी मांग की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। कहा कि जब तक देवस्थानम बोर्ड व केदारनाथ मास्टर प्लान को भंग नहीं किया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा।

आचार्य संतोष त्रिवेदी ने कहा कि वह बीते 12 जून से अर्धनग्न होकर देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं, लेकिन कोई सुधलेवा नहीं है। इस मौके पर तेज प्रकाश पोस्ती, अंकुर, रमाकांत शर्मा, शशि अवस्थी, भगवती प्रसाद पोस्ती एवं प्रियांशु आदि उपस्थित रहे।

इधर, देवप्रयाग में भी देवस्थानम बोर्ड के विरोध में तीर्थ पुरोहितों ने गंगा संगम पर देवस्थानम बोर्ड, सरकार का सामूहिक पिंडदान किया। इस दौरान उन्होंने सरकार की हिंदू तीर्थों के प्रति भेदभावपूर्ण नीति के खिलाफ नारेबाजी की। चारधाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत के अध्यक्ष कृष्णकांत कोटियाल ने कहा कि चारों धामों में तीर्थपुरोहित देवस्थानम बोर्ड का विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनके आंदोलन को नजर अंदाज कर रही है। इस अवसर पर

भास्कर पुरोहित, राहुल कोटियाल, दिनेश प्रयागवाल, विपुल सवासेर, प्रमोद टोडरिया, माहिर सवासेर, सोहन लाल ध्यानी, विनोद बडोला, नीरज पंत, शांति प्रकाश जोशी, जमुना डबराल, संतोष भट्ट, सत्यनारायण कोटियाल, शकर जोशी आदि शामिल थे।

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