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Friday, May 27, 2022
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एम्स ऋषिकेश में यूपी की किशोरी की सफल हार्ट सर्जरी

  • जन्मजात डीओआरवी, पीएस नामक हृदय संबंधी बीमारी से परेशान थी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के सीटीवीएस विभाग के चिकित्सकों ने मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश निवासी एक 12 वर्षीय किशोरी के दिल की जन्मजात गंभीर बीमारी का सफल ऑपरेशन कर उत्तराखंड में चिकित्सा क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है।

बताया गया है कि इस किशोरी के दिल में जन्म से छेद था,जिससे उसका शरीर अक्सर नीला पड़ जाता था। अपने शहर के आसपास उच्च चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव के चलते अब तक किशोरी के माता-पिता उसका उपचार नहीं करा पा रहे थे, लिहाजा इस किशोरी को उम्र बढ़ने के साथ साथ दिल की जन्मजात बीमारी के कारण सांस लेने में कठिनाई होने लगी। इसके बाद किशोरी के परिजनों ने उसके समुचित उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश की ओर रुख किया।

एम्स अस्पताल में किए गए सीटी स्कैन से पता चला कि किशोरी को डीओआरवी, पीएस नामक हृदय की बीमारी है, जिसके लिए ऑपरेशन की आवश्यकता है। इसके साथ ही उसके शरीर में कुछ ऐसी नसें भी थी, जिन्हें ऑपरेशन से पहले एन्जियोग्राफी से बंद करना था। संस्थान की हृदय रोग विभागाध्यक्ष डा. भानु दुग्गल एवं डा. यश श्रीवास्तव ने एन्जियोग्राफी के माध्यम से किशोरी की इन नसों में छल्ला डाला, जिसके बाद सीटीवीएस विभाग के पीडियाट्रिक कॉर्डियक सर्जन डा. अनीश गुप्ता ने उसकी जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

चिकित्सकीय टीम की इस सफलता के लिए एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने उन्हें प्रोत्साहित किया, साथ ही निदेशक एम्स ने चिकित्सकों को भविष्य में भी इसी तरह मरीजों की मदद करने के साथ साथ सुपरस्पेशलिटी सुविधाओं के सुचारू संचालन का भरोसा दिलाया। डा. अनीश ने बताया ​कि​ सर्जरी के बाद एनेस्थेटिस्ट डा. अजेय मिश्रा की टीम ने किशोरी का भली प्रकार से खयाल रखा। किशोरी को अब पूर्णरूप से स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

क्या है डीओआरवी एवं पीएस बीमारी

यह एक जन्मजात हृदय की बीमारी है,जिसमें स्वच्छ व गंदे खून की नसें एक साथ एक ही खाने भाग से निकलती हैं तथा फेफड़े की नस में रुकावट रहती है। जिसके कारण बच्चे का शरीर नीला पड़ता है, साथ ही उसे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। इस बीमारी से बच्चा कभी कभी बेहोश भी हो सकता है।

इस बीमारी का पता इको और सीटी स्कैन से चल पाता है। जिसका उपचार ऑपरेशन से ही संभव है। इस बीमारी की जटिलता के हिसाब से बीमारी से संबंधित कई तरह से सर्जरी की जाती है। इस बीमारी के प्रति लापरवाही व बिना इलाज के जान जाने का खतरा होता है।

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