29.8 C
Dehradun
Sunday, July 25, 2021
Homeहमारा उत्तराखण्डसूबेदार गजेंद्र सिंह नेगी उर्फ गज्जू बोडा

सूबेदार गजेंद्र सिंह नेगी उर्फ गज्जू बोडा

नीरज नैथानी

जी हां, यह बहुत कम लोगों को पता है कि हमारे गांव के बयानबे वर्षीय वरिष्ठतम बोडा सूबेदार साब का वास्तविक नाम गजेंद्र सिंह नेगी है क्योंकि हमने बचपन से ही लोगों को उन्हें गज्जू बोडा या सूबेदार साब के सम्बोधन से पुकारते हुए सुना है। तो जनाब, गज्जू बोडा की उम्र तो जरूर बयानबे साल की है लेकिन चाल, ढाल और विशेषकर उनकी कड़क आवाज से आप कतई अंदाजा नहीं लगा सकते कि यह रिटायर फौजी प्रौढ़ता के उच्चतम बिंदु पर विराजित हैं।

सिर व मूछों के बाल पूरी तरह सफेदी में रंग जाने के बावजूद उनकी लम्बी, नोकदार व‌ ऐंठी हुयी मूछों से उनके कड़क व अकड़ साफ झलकती है। नब्बे साल के बूढ़े चहरे पर झुर्रियों ने घुसपैठ कर कब्जा जमा तो दिया है लेकिन गोरे भरे हुये गालों की लालिमा पूरी टक्कर लिए'खण्डहर बताते हैं कि ईमारत कभी बुलंद थी' की कहावत को चरितार्त करती नजर आती है। आवाज तो माशाअल्लाह अभी भी भी पहले जैसी ही गरजती है।

जब वे अपने मल्ला चौक पर खड़े होकर तल्ला खोले पर नीचे दृष्टि डालते हुए जोर से चिल्लाते हैं- अबे घुत्तू——-, सुन रे ढणकू——, ओए बिट्टू–ऊऊऊ —–अबे कहां मर गया बे दिन्नू——-सुनता है रे धीरू– तो यूं लगता है कि कोई गबरू जवान दहाड़ रहा हो। गांव में अब उनकी उम्र का या उनके साथ का कोई जीवित नहीं है,सभी अल्लाह मिंया को प्यारे हो चुके हैं।

देवभूमि के सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने को बचाए रखने लिए उठाने होंगे कुछ जरुरी कदम

किस्सागोई में गज्जू बोडा का कोई सानी नहीं है। किस्सा सुनाते हुए उनका तकिया कलाम-हम बोला,फिर हमारा साब बोला या इसी को उलट कर हमारा साब बोला फिर हम बोला को सुनने के सभी अभ्यस्त हो चुके हैं।

जब उनके चौक में चौपाल जमती है और वे पूरी तरह रौ में बहते हुए पुराना किस्सा बयां कर रहे होते हैं- तो, उन दिनों हमारी यूनिट छम्ब सेक्टर पोस्टेड थी।हमारी प्लाटून ने दुष्मन पर अटैक कर दिया।लड़ाई लड़ते लड़ते हम उनके इलाके में भीतर तक घुस गए। रात को मैं यूनिट सिपाहियों से बिछुड़ गया। रात‌भर झाड़ झंकाड़ व जंगल में रास्ता ढूंढता रहा।साथियों ने सोचा कि दुष्मन सिपाहियों के हाथों मारा जा‌ चुका हूं।

पर जब अगले दिन चार पांच दुष्मन सिपाहियों को गोलियों‌ से भूनकर मैं कटी फटी वरदी व सारे शरीर पर खरोंच जख्म लिए किसी तरह यूनिट लौटा तो हमारा साब बोला—ये है बहादुर सिपाही-,फिर मै बोला—-जय हिंद साब—।
साब ने आर्डर किया एक‌ फित्ती लगे बहादुर सिपाही के। ऐसे ही एक बार हमारी यूनिट पठानकोट‌ से राजौरी सेक्टर शिफ्ट हुयी।मैंने दुष्मनों से भिड़ंत में जो जांबाजी दिखाई तो हमारा साब बोला,लगे एक और फित्ती गजेंद्र फौजी के——।

तो मैं जित्ती बार दुष्मनों के दांत खट्टे करता उत्ती बार एक फित्ती और लग जाती।मैं हर लड़ाई में बहादुरी दिखाता रहा व मेरी वरदी पर फित्ती पर फित्ती चढ़ती गयी। सिपाही से लांस नायक,फिर नायक उसके बाद नायक से हवलदार,फिर नायब सूबेदार से जल्दी ही सूबेदार बन गया मैं।अपने ही साथ के सारे सिपाही जब मुझे सुबेदार साब कह कर इज्जत देते तो मैं अपने को सचमुच साहब‌ ही समझता।और समझता भी क्यों ना सूबेदार तो मैं बन ही गया था ना।

वे हर साल पंद्रह अगस्त, छब्बीस जनवरी को गांव के स्कूल जरूर जाते हैं झण्डारोहण में शामिल होने। और जाते भी हैं अपनी कमीज में तमगे लटकाकर व सिर पर फौजी हैट पहनकर। गणतंत्र दिवस की मुबारक के साथ गुरु जी को स्कूल के लिए मिठाई का डिब्बा जरूर लाते हैं। मास्साब हमेशा अपने बगल में कुरसी लगवाकर उन्हें खास तवज्जो देते हुए बैठाते हैं। अलावा इसके सांस्कृतिक कार्यक्रम देने वाले बच्चों को अलग से ईनाम किताब देना भी सूबेदार साब की आदत में शामिल है।

और जब गुरु जी उन्हें मंच पर दो शब्द कहने के लिए बुलाते हैं तो अपने भाषण में वे बच्चों को हिदायत देते- सुधर जाओ,गंदे बच्चों की सोबत मत करो, अब्बे बीड़ी के सुट्टे लगाना छोड़ दो ,मैं कै रा हूं तम्बाकू गुटका चबाना छोड़ दो—-वरना भरती में जब हवलादार दौड़ाएगा तो तुम दो राउण्ड में ही चक्कर खा के गिर जाओगे——-। और माना किसी तरह भरती हो भी गए तो रंगरूटी छोड़कर भाग आओगे-----जरा सा चलने पे सांस फूल जाती है तुम निकम्मों की।

एक बार गांव में राम लीला चल रही थी।बिगड़ैल लड़कों के गैंग ने प्लान बनाया आज रात गज्जू बोडा की क्यारी में लगी ककड़ियों पर हाथ साफ किया जाएगा। तय योजना के मुताबिक रात के घुप्प अंधेरे में दबे पांव चार पांच छोकरे घुस गये बाड़ फांद कर गज्जू बोडा की क्यारी में। ककड़ी की बेल को हाथ से मरोड़कर तोड़ने में खच फच की आवाज ना हो इस लिए दो चाकू भी खोंस कर ले गयी गैंग। दो शातिर अपने घर से हरी मिर्च का चटपटा नमक भी पुड़िया में लाए थे ककड़ी में लगाकर खाने के लिए।

बहुत ही धीमी आवाज में खुसुर फुसुर करते हुए आपरेशन ककड़ी चल ही रहा था कि अचानक गज्जू बोडा दरवाजा खोलकर बाहर नुमाया हुए। अंदर के जल रहे बल्ब की रोशनी में गज्जू बोडा ने क्यारी में कुछ हलचल होती महसूस की-----कौन है ब्बे----?की कड़क आवाज रात के सन्नाटे को चीरकर वातावरण में गूंज गयी।

लाना रे नाती मेरी टार्च व बंदूक------फिर बोडा की कड़क आवाज गूंजी।वो तो गनीमत रही कि नाती रामलीला देखने गया हुआ था।लेकिन बोडा की दहाड़ भर से ही गैंग को सांप सूंघ गया। फिर तो लकड़ी तार की घेर बाड़ को फांदते हुए वे जो बेतहाशा भागे कि ये ज्जा----वो ज्जा-----का सीन बन गया। इसी तरह आपरेशन मुगरी ,आपरेशन पपीता,आपरेशन चकोतरा,आपरेशन संतरा,आपरेशन माल्टा, आपरेशन अमरूद वगैरा वगैरा -------सभी पूरी या आंशिक रूप से फेल हुए थे केवल व केवल गज्जू बोडा की कड़क आवाज के कारण।

सही मायनों में गज्जू बोडा पूरे गांव में हाई सिक्योरटी अलर्ट का पर्याय बने हुए हैं‌। सारे गांव में गज्जू बोडा का लाइफ स्टाइल सबसे अलग है। वे रोज अल सुबह उठते हैं,फ्रेश होते हैं व हाथ मुंह धोते समय इतनी जोर की आवाज के साथ कुल्ला या गरारा करते हैं कि आस पास के घरों में ऐसे ही जाग हो जाती है।

रोज दाढ़ी बनाना व गालों को फिटकरी लोशन लगाकर लाल बनाए रखना उनकी रोजमर्रा की आदत में शामिल है।वे तमलेट या चसक को मुंह में लगाकर पानी पीते हैं। चाय पीने के लिए हरे रंग की पालिश वाला तामचीनी का कप इस्तेमाल करते,हैं, बारिश में वे घुटनों से बहुत नीचे तक की लम्बाई वाली बरसाती पहन कर सारे गांव का चक्कर लगाते हैं। सर्दियों में गरम ओवर कोट तथा सिर पर तिरछा कर गोल मिलैट्री हैट पहन कर जब वे राउण्ड पर निकलते हैं तो जासूस जेम्स बांड लगते।

उनकी चार सेल वाली लम्बी टार्च, मिलेट्री गम बूट, उनका कंधे पर लटका ट्रांजिस्टर, चमकीली मूंठ का लम्बा वाला छाता सब कुछ अलग सा है। आप कभी हमारे गांव आइए मेरा दावा है कि रौबीले सूबेदार गजेंद्र सिंह नेगी उर्फ गज्जू बोडा उर्फ सूबेदार साब से मिलकर आपकी तवियत खुश हो जाएगी।

RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
- Advertisment -
- Advertisment -
- Advertisment -
- Advertisment -
- Advertisment -

Most Popular

- Advertisment -

Recent Comments

error: Content is protected !!