ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश की ऐतिहासिक पहल पर शनिवार को महिलाओं की गुप्त रोगों से जुड़ी जटिल समस्याओं को लेकर सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान के रिकंस्ट्रक्टिव एंड कॉस्मेटिक गाइनोकॉलोजी विभाग द्वारा स्त्री वरदान चुप्पी तोड़ो नारीत्व से नाता जोड़ो कार्यक्रम की नीव रखी।

बताया गया है कि एम्स ऋषिकेश द्वारा उत्तराखंड से शुरू किया गया यह अभियान भारत देश में अपनी तरह का विश्वस्तरीय बड़ी मुहिम है। जिसके माध्यम से एम्स संस्थान महिलाओं को उनकी समस्याओं के प्रति जागरुक किया जाएगा।

शनिवार को एम्स ऋषिकेश के रिकंस्ट्रक्शन एंड कॉस्मेटिक गाइनोकॉलोजी विभाग की पहल आयोजित सम्मेलन में उत्तराखंड के लगभग सभी जिलों से 50 से अधिक स्वयं सेविका महिलाओं ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने मुहिम को गांव-गांव-घर घर तक पहुंचाने व राज्य की प्रत्येक महिलाओं को उनकी समस्याओं को लेकर जागरुक करने व ग्रसित महिलाओं को उपचार के लिए प्रेरित करने की शपथ भी ली।

एम्स निदेशक एवं सीईओ पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने अपने संदेश में बताया कि यह सम्मेलन महिलाओं के गुप्त रोगों से जुड़ी समस्याओं के निदान की दिशा में पहला कदम है, जिसका उद्देश्य भारत की हर महिला को ऐसी समस्याओं को लेकर जागरुक करना हो व उन महिलाओं तक पहुंचकर एम्स ऋषिकेश की सुपरस्पेशलिटी सेवाओं से उन्हें स्वास्थ्य लाभ दिलवाना है।

निदेशक ने यह भी कहा कि चूंकि एम्स संस्थान उत्तराखंड में स्थापित है लिहाजा हमारा सबसे पहला प्रण है कि राज्य के आखिरी गांव की आखिरी महिला तक इन स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ हर हाल में पहुंचाया जाएगा। कार्यक्रम में रिकंस्ट्रक्टिव और कॉस्मेटिक गाइनोकॉलोजी विभागाध्यक्ष डॉ. नवनीत मग्गो ने बताया कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी यह अपनी तरह की पहली मुहिम है, जिसे निदेशक एम्स की पहल पर उनकी अगुवाई में शुरू किया जा रहा है।

उन्होंने प्रतिभागी महिलाओं को प्रेरित किया कि हमें उत्तराखंड के आखिरी गांव तक पहुंच कर उस आखिरी महिला को अपने स्वास्थ्य के लिए चिंतित रहने के लिए प्रेरित करना है जोकि कभी अपने स्वास्थ्य के बारे में सोचे बिना चुपचाप हर परिस्थिति में अपनी बीमारी को सहते हुए जीवन बिता रही है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि हमें इस मुहिम में उन महिलाओं से बात करनी है, जो महिलाएं या तो वह संकोच के मारे बात नहीं कर पाती अथवा समाज उन महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को नजरअंदाज कर देता है।

इस दौरान डॉ. नवनीत ने प्रतिभागी सेविकाओं को महिलाओं के यूरिनरी इनकांटिनेस उनकी यौन समस्याएं और उनके यौन अंग या शरीर बाहर आने की समस्याओं पर विस्तृत जानकारियां दी व इस तरह की बीमारियों से शरीर को होने वाले दूसरे तरह के नुकसान को लेकर जागरुक किया। उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर यह संकल्प लेना होगा कि अगले 5 वर्ष के अंदर उत्तराखंड राज्य को यूरिनरी इनकांटीनेंस फ्री यानी यूरिनरी इनकांटीनेंस से मुक्त करना है।

गौरतलब है कि एम्स का रिकंस्ट्रक्टिव और गाइनोकॉलोजी विभाग पूरे विश्व में अपनी तरह का पहला सुपरस्पेशलिटी विभाग है, जिसमें कि विश्व के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सकों को नियुक्त किया गया है। सम्मेलन में डा. नवनीत ने राज्यभर से सम्मेलन में पहुंची स्वयं सेविकाओं को शपथ दिलाई कि हर सेविका अभियान के साथ पूरी तरीके से जुड़ कर अपने- अपने क्षेत्रों में उक्त रोगों से ग्रसित महिलाओं को अपना इलाज कराने के लिए प्रेरित करेंगी और महिला स्वास्थ्य से जुड़े इस कार्य को राष्ट्र निर्माण का कार्य समझ कर पूरी कर्तव्यनिष्ठा से करेंगी।

उन्होंने कहा कि महिला का पूर्णरूप से स्वस्थ रहना परिवार, समाज और राष्ट्र के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। इस अवसर पर विभाग की चिकित्सक डा. मानवी, डा. नीति श्री, राष्ट्रीय सेविका संगठन की प्रांत कार्यवाहिनी भावना त्यागी, सेवा भारती मात्रिमंडल की प्रांत संयोजिका सुनीता भट्ट, मात्रिमंडल की क्षेत्रीय संयोजिका पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र रीता गोयल, प्रांत समरष्ठा मंच प्रमुख अनुराधा सिंह, भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुधा गुप्ता आदि मौजूद थे।

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