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Thursday, May 6, 2021
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Dronacharya Award: निशानेबाज जसपाल राणा को मिलेगा इस साल द्रोणाचार्य अवॉर्ड

भारतीय पिस्टल (जूनियर) टीम के मुख्य कोच जसपाल राणा को इस साल द्रोणाचार्य अवॉर्ड से नवाजा जाएगा। गोल्डन बॉय निशानेबाज राणा को ओलंपिक कोटा हासिल करने और मनु भाकर की सफलता के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1995 के कॉमनवेल्थ गेम्स की शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले Jaspal Rana को शूटिंग का हुनर विरासत में मिला है। उनके पिता नारायण सिंह राणा भी अपने समय के जाने-माने निशानेबाज रहे हैं। वहीं, उनकी बिटिया देवांशी राणा भी नेशनल स्तर पर कई पदक जीत चुकी हैं।

Jaspal Rana का जन्म 28 जून 1976 को उनके मूल गांव चिलामू, टिहरी गढ़वाल में हुआ। वर्ष 1995 में इटली के मिलान शहर में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स की शूटिंग स्पर्धा में आठ गोल्ड जीतकर उन्होंने नया रिकॉर्ड बनाया था। उस समय भारत के किसी भी निशानेबाज का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। उनके पिता नारायण सिंह राणा ने उन्हें निशानेबाजी का हुनर सिखाया।

बाद में दो अन्य निशानेबाज राज्यवर्धन सिंह राठौर और अभिनव बिंद्रा ने ओलंपिक में भारतीय निशानेबाजी में पदक हासिल किए, लेकिन देश में निशानेबाजी को स्थापित करने का श्रेय जसपाल राणा को ही जाता है। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह कई अवाॅर्ड जीत चुके हैं। उन्हें मिले प्रमुख पुरस्कारों में अर्जुन पुरस्कार 1994, यश भारती पुरस्कार (1994), राजधानी रत्न पुरस्कार, इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी पुरस्कार आदि शामिल हैं।

विश्व स्तरीय निशानेबाज तैयार कर रहे राणा

विदित हो कि लंबे समय तक राष्ट्रीय शूटिंग परिदृश्य से दूर रहे जसपाल राणा ने देहरादून में भी शूटर तैयार किए। पौंधा में उनकी जसपाल राणा शूटिंग एकेडमी भी है। जहां Jaspal Rana अपने पिता नारायण सिंह राणा के साथ मिलकर युवा निशानेबाजों को तैयार कर रहे हैं। एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता राणा ने मनु भाकर, सौरभ चैधरी और अनीश भानवाला जैसे विश्व स्तरीय निशानेबाज तैयार किए हैं।

राजनीति में भी लगाया निशाना

Jaspal Rana ने शूटिंग के अलावा राजनीति में भी हाथ आजमाया। हालांकि उन्हें यहां निराशा हाथ लगी। 2009 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर टिहरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें कांग्रेस के विजय बहुगुणा के हाथों हार झेलनी पड़ी। बाद में 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले वह कांग्रेस मे शामिल हो गए।

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