पिथौरागढ़। अगर रिवर्स माईग्रेशन का उदाहरण देखना है तो चले आईए सीमान्त जनपद पिथौरागढ में नेपाल की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से लगे सीमान्त गांव भटेड़ी में, जहां के युवाओं ने स्वरोजगार अपनाकर पलायन कर रहे लोगों को आईना दिखाया है।

यूं तो उत्तराखण्ड में आज सभी लोग पलायन को लेकर सिर्फ सरकारों को कोसने का काम कर रहे हैं और तमाम आयोग बनाकर वातानुकूलित कमरों में इस पर चर्चा तक सीमित होकर रह गए हैं, लेकिन यदि हम भटेड़ी गांव की बात करें तो यहां के युवाओं ने मुर्गीपालन के जरिए अपनी एक अलग पहचान कायम की है। यहां के युवाओं की लगन और निष्ठा का ही परिणाम है कि मुर्गी पालन व्यवसाय से सहकारिता द्वारा पिछले 3 वर्षों में लगभग 6.80 करोड़ रूपये का व्यवसाय करने में सफलता अर्जित की है।

जनपद पिथौरागढ के विकासखण्ड-मूनाकोट के अन्तर्गत स्थित भटेड़ी गांव में राच्य सरकार के सहयोग व अन्तर्राष्ट्रीय कृषि विकास निधि (आईएफएडी)द्वारा वित्त पोषित एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-16 में ग्राम समूह गठन का कार्य प्रारम्भ किया गया। परियोजना द्वारा ग्राम-भटेड़ी में कुल 22 समूहों का गठन करते हुए कुल 160 परिवारों को समूहों से जोड़ा गया। परियोजना द्वारा ग्रामवासियों की आर्थिकी एवं आजीविका में सूधार करने हेतु सूक्ष्म स्तर पर मुर्गीपालन का कार्य प्रारम्भ करने की योजना बनाई गयी, किन्तु ग्रामीण क्षेत्रों व्याप्त रूढि़वादी परम्पराओं के चलते शुरूआत में गांव के दो-तीन युवाओं द्वारा ही मुर्गीपालन के कार्य में रूचि दिखाई गई।

मुर्गीपालन का कार्य प्रारम्भ करने वाले युवाओं द्वारा पूर्ण निष्ठा, लगन व मेहनत के साथ कार्य का सम्पादन किया गया तथा प्रथम वर्ष में ही अच्छा लाभ अर्जित करते हुए समाज में व्यापत रूढि़वादी विचारों को आईना दिखाते हुए क्षेत्र के अन्य युवाओं हेतु प्रेरणास्त्रोत का कार्य किया गया। मुर्गीपालन व्यवसाय में हो रहे लाभ को देखते हुए गांव के अन्य युवा जो विभिन्न शहरों, महानगरों में रोजगार कर आजीविका संवद्र्वन का कार्य कर रहे थे या रोजगार की तलाश में गांव से पलायन कर गए थे, द्वारा भी पुन: गांव में वापसी कर परियोजना के सहयोग से मुर्गीपालन गतिविधि को व्यवसाय के रूप में अपनाया गया।

एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के प्रभागीय परियोजना प्रबंधक कुलदीप सिंह बिष्ट ने बताया कि वर्तमान में भटेड़ी गांव में परियोजना के सहयोग से 27 व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म संचालित किए जा रहे हैं। मुर्गी व्यवसाय से सहकारिता द्वारा विगत 3 वर्षो में लगभग 6.80 करोड़ रूपये का व्यवसाय किया गया है। व्यावसायिक पोल्ट्री फार्मों से क्षेत्र के अन्य बेरोजगार युवकों को भी रोजगार उपलब्ध हो रहा है। परियोजना द्वारा गठित मनमहेश आजीविका स्वायत्त सहकारिता द्वारा मुर्गी पालकों को मांग के आधार पर गांव में ही मुर्गी चुजे, मुर्गी चारा, दवाई और उपकरण न्यूनतम दरों पर 45 दिन के क्रेडिट पर उपलब्ध करवाया जाता है, जिससें मुर्गीपालकों को आसानी से दवाई व उपकरण गांव में ही उपलब्ध हो जाती हैं।

वर्तमान में ग्राम-भटेड़ी में मुर्गीपालन का कार्य व्यावसायिक मुर्गीपालन के रूप स्थापित हो चुका है तथा ग्राम-भटेड़ी ने मुर्गीपालन में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। गांव के युवाओं द्वारा शहरों तथा महानगरों की नौकरियां छोडक़र अपने गांव में वापस आकर मुर्गीपालन को रोजगार के रूप में अपनाया जा रहा है, जो कि रिवर्स माईग्रेशन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

वर्तमान में भटेड़ी गांव के मुर्गीपालकों द्वारा पिथौरागढ़ बाजार में होटलों तथा रेस्टोरेन्टों को चिकन सप्लाई किया जाता है, होटलों तथा रेस्टोरेन्टों के मालिक स्वयं गांव में आकर चिकन एकत्रित कर विक्रय हेतु ले जाते हैं। वर्तमान में कुल लगभग 17 से 20 प्रतिशत पिथौरागढ़ बाजार को चिकन सप्लाई कर कवर किया जाता है। साथ ही मुर्गीपालक श्री अनिल गोबाड़ी द्वारा 60-70 किग्रा चिकन पिथौरागढ़ बाजार के होटलों तथा रेस्टोरेन्टों में सप्लाई किया जाता है। मुर्गीपालन से जुड़े युवाओं द्वारा पैंतीस से चालीस हजार रूपए तक की मासिक आय अर्जित की जा रही है, तथा कुछ मुर्गीपालकों द्वारा मुर्गीपालन यूनिट के रख-रखाव व मुर्गीयों की देख-रेख तथा अन्य कार्यो हेतु सात से आठ हजार रूपए के मासिक वेतन पर युवाओं को रोजगाार भी प्रदान किया गया है। परियोजना द्वारा जनपद-पिथौरागढ़ में स्थित सरस बाजार में रिटेल बिक्री हेतु आउटलेट भी उपलब्ध करवाया गया है।

जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी द्वारा समय-समय पर एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के सहयोग के चल रहे ग्राम-भटेड़ी में चल रहे मुर्गी पालन कार्यो का स्थलीय निरीक्षण किया जाता है। सचिव अरविन्द सिंह हृयांकी द्वारा अभी कुछ समय पूर्व परियोजना के सहयोग से क्षेत्र में मुर्गी पालन में किए जा रहे कार्य की सराहना करते हुए क्षेत्र के युवाओं से मुर्गी पालन को व्यवयास के रूप में अपनाने की अपील की गयी, जिससे कि गांवों से हो रहे पलायन को रोका अथवा कम किया जा सके साथ ही मुर्गी व्यवसाय से किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयास किए जा सकेंगें।

पलायन आयोग द्वारा परियोजना के सहयोग से क्षेत्र में मुर्गी पालन में किए जा रहे कार्य की सराहना की गई है। देहरादून में आहूत कई बैठकों में उपस्थित विभागों को पलायन के विरूद्व स्वरोजगार अपनाने से होने वाले रिवर्स माईग्रेशन का अध्ययन करने हेतु मूनाकोट में स्थित भटेड़ी गांव का भ्रमण करने हेतु सुझाव प्रदान किए गए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here