देहरादून। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकरण न कराने वाले आश्रम, होटल एवं धर्मशाला संचालकों के खिलाफ बोर्ड कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है। यदि आगामी 31 दिसंबर तक आश्रम, होटल एवं धर्मशाला संचालकों ने बोर्ड में अपना पंजीकरण न कराया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ उनसे 18 वर्ष का सहमति शुल्क भी वसूला जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रावधानों के तहत प्रदेश के सभी आश्रम, होटल एवं धर्मशालाओं को पंजीकरण के दायरे में लाना है। इसके तहत इनको वायु एवं जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम की धारा 25 के तहत बोर्ड में पंजीकरण कराना व निर्धारित सहमति शुल्क जमा कराना है।

ज्ञात हो कि फिलहाल कोरोना संकट के मद्देनजर सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 31 दिसंबर तक के लिए पंजीकरण की स्थिति में सहमति शुल्क माफ करने का निर्णय लिया है। बता दें कि इसके बावजूद भी राज्य में कई संचालकों ने अपने प्रतिष्ठानों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकरण नहीं कराया जा रहा है।

बोर्ड के अनुसार आश्रम, होटल एवं धर्मशाला संचालकों के द्वारा यदि 31 दिसंबर तक बोर्ड में पंजीकरण नहीं कराया जाता है तो ऐसे सभी संचालकों से वर्ष 2002 से लेकर 2020 तक का सहमति शुल्क वसूला जाएगा। सहमति शुल्क की गणना वर्ष 2002 से अथवा स्थापना साल जो भी अधिक हो उससे की जाएगी।

बोर्ड के इस निर्णय के बाद यदि आश्रम, होटल एवं धर्मशाला संचालकों को कानूनी कार्रवाई एवं भारी सहमति शुल्क जमा कराने से बचना है तो उन्हें 31 दिसंबर से पहले पंजीकरण करा देना चाहिए। पंजीकरण कराने वाले संचालकों को अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल, ईमेल आईडी, प्रोजेक्ट रिपोर्ट की बैलेंस शीट, आय प्रमाणपत्र, प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाओं का विवरण, भवन का नक्शा, पर्यटन प्रमाणपत्र, नदी से दूरी एवं आश्रम-धर्मशाला के संचालित वर्ष का प्रमाणपत्र ब्योरा देना होगा।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल ने बताया कि फिलहाल संचालकों के पास अभी लंबा समय है ऐसे में उन्हें अपने प्रतिष्ठानों को बोर्ड में पंजीकृत करा लेना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।

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