• श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर भागवताचार्य डा. दुर्गेशाचार्य महाराज ने दिलाया संकल्प
  • देवप्रयाग ब्लाक के हिंडोलाखाल के मुसाणा गांव में आयोजित भागवत कथा का समापन

नई टिहरी। देवप्रयाग ब्लाक के हिंडोलाखाल के मुसाण गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर पूर्णाहूति के साथ आचार्य डॉ. दुर्गेशाचार्य महाराज ने खासपट्टी इलाके में शादी समारोह और अन्य शुभ कार्यों में मास-मदिरा न परोसने का संकल्प दिलाया। इसी के साथ पिछले सात दिनों से आयोजित श्रीमद्भागवत दिव्य महापुराण का समापन हो गया।

स्व. दर्शनी देवी एवं अन्य पिर्तों के निमित भगवती प्रसाद मुसाण एवं ऋषिराम मुसाण की ओर से मुसाण गांव में श्रीमद्भागवत दिव्य महापुराण का आयोजन किया गया। जिसमें आचार्य डॉ. दुर्गेशाचार्य महाराज और आचार्य महामाया प्रसाद शास्त्री के सानि‌ध्य में श्रद्धालुओं ने सात दिनों तक भागवत कथा का रसपान किया।

इस ‌दौरान ब्यास महाराज ने श्री भागवत कथा में वर्णित भगवान कृष्ण की लीलाओं और समाज के लिए प्रदत्त शिक्षाओं का विस्तार से वर्णन किया। कहा कि श्रीमद् भागवत कथा पुराण में सभी ग्रन्थों का सार है और यही एक ऐसा ग्रन्थ है, जिसमें भगवान की सभी लीलाओं का वर्णन किया गया है।

इस दौरान आचार्य महाराज ने राजा परीक्षित जन्म, विधुर कृष्ण मिलन व भगवान के विराट रूप के साथ-साथ मनु वंश वर्णन व वराह अवतार सहित भगवान कपिल के अवतार की कथाओं का प्रसंग सारांश रूप से भक्तों को बताया। इसके साथ ही खासपट्टी के कई गांवों के प्रधानों एवं ग्रामीणों को शादी समारोह एवं अन्य मांगलिक कार्यों में मास-मदिरा न परोसने का संकल्प दिलाया। इसी के साथ ही भक्तों ने मां राजराजेश्वरी की डोली के दर्शन किए।

इस मौके पर मुख्य यजमान भगवती प्रसाद मुसाण, ऋषिराम मुसाण, विनोद मुसाण, चंडी प्रसाद मुसाण, पंडित नीरज रतूड़ी, कृष्णा मिश्रा, राजेन्द्र चमोली, महावीर प्रसाद, सुरेंद्र मुसाण, मनोज मुसाण, पंकज मुसाण, नीरज, संजय, रविंद्र, मनीष, सुमित, गौरव आदि मौजूद थे।

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