उत्तराखण्ड में जहां सरकार ने पदोन्नति के मामले में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को प्रमोशन दे दिया है वहीं, अब प्रदेश सरकार पीसीएस अफसरों की भी पदोन्नति करने जा रही है।

बता दें कि वरिष्ठता विवाद के कारण वर्ष 2014 के बाद से आईएएस पद पर उनका चयन नहीं हो सका है। लेकिन नए साल में उन्हें पदोन्नति की सौगात मिलने की पूरी उम्मीद है। सूत्रों की मानें तो वरिष्ठता विवाद के कारण आईएएस पद पर पदोन्नति न होने से अभी तक लगभग 20 पद खाली हैं। कार्मिक एवं सतर्कता विभाग टेंटेटिव वरिष्ठता सूची पिछले महीने ही जारी कर चुका है।

प्रदेश सरकार की ओर से अब पीसीएस अधिकारियों की वरिष्ठता को लेकर विवाद नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वर्ष 2010 में शासन ने जो वरिष्ठता तय की थी, अब उसी पर पदोन्नति होने के आसार हैं।

प्रदेश में वर्ष 2010 से ही सीधी भर्ती और पदोन्नत पीसीएस अफसरों के बीच वरिष्ठता का विवाद है। राज्य गठन के समय पीसीएस अफसरों की कमी के कारण तत्कालीन सरकार ने तहसीलदार और कार्यवाहक तहसीलदारों को तदर्थ पदोन्नति देकर एसडीएम बना दिया गया था। वर्ष 2003 व 2005 तक यह सिलसिला चला।

वर्ष 2005 में सीधी भर्ती से 20 पीसीएस अधिकारियों का चयन हुआ। 2010 में सरकार ने वरिष्ठता सूची जारी की। इसमें वर्ष 2005 बैच के पीसीएस अधिकारियों को सीनियर माना। पदोन्नति से पीसीएस बनें अफसरों ने इस पर एतराज जताया। तदर्थ सेवा को शामिल करते हुए उन्होंने खुद को वरिष्ठ माना। वह हाईकोर्ट से भी जीते। लेकिन सरकार सुप्रीम कोर्ट गई। सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठता में तदर्थ सेवा को नहीं माना।

बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वर्ष 2010 में शासन ने जो वरिष्ठता तय की थी, अब उसी पर पदोन्नति होने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

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