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Thursday, May 6, 2021
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नवरात्र: दुर्गा के नौ रूपों के पूजन से शांत होते हैं नवग्रह


मंत्र और यंत्र साधना के लिए सर्वोत्तम समय है नवरात्र
उग्र स्वभाव के मंगल के राजा और स्वयं मंत्री होने से भूकंप आदि का रहेगा अंदेशा
नवरात्र में दुर्गा के नौ रूपों का विधिवत पूजन नवग्रहों की शांति का सर्वश्रेष्ठ उपाय है इन दिनों प्रत्येक ग्रह का विशिष्ट पूजन उस ग्रह की कुंडली में चल रही खराब दशा अंतर्दशा अथवा वर्षफल में खराब दशाओं का सफलतम उपचार हो जाता है
उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल बताते हैं कि नवरात्र के प्रथम दिवस को शैलपुत्री के पूजन का विधान है वह हिमाचल की पुत्री होकर आदि देव शंकर की पत्नी हुई ग्रहों में सर्वश्रेष्ठ सूर्य हैं और उन्हें आदिदेव तथा ग्रहों के राजा की संज्ञा भी दी जाती है इसलिए मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र राज पीड़ा से ग्रसित लोग जिनका राजकीय पद अचानक छिन गया हो इस दिन विधिवत वैदिक वैज्ञानिक पद्धति से सूर्य ग्रह का पूजन कराएं तो उन्हें राजकीय वैभव प्राप्त होगा जबकि द्वितीय नवरात्र को ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान है और ब्रम्हचर्य का सीधा संबंध मानसिक शांति से होता है ज्योतिष शास्त्र में मन पर चंद्रमा का अधिकार बताया गया है इसलिए दिन मानसिक बीमारियों शादी विवाह में अड़चन पूरी विद्या पढ़ने के बावजूद नौकरी में सफलता न मिलना आदि की शांति का उपचार होना चाहिए
राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित संस्कृत प्रवक्ता आचार्य चंडी प्रसाद घिल्डियाल आगे बताते हैं कि नवरात्र के तीसरे दिन चंद्रघंटा देवी की पूजा होती है ज्योतिष में तीसरा स्थान मंगल को प्राप्त है और वह कुंडली में तीसरे घर का कारक भी माना गया है जब मस्तिष्क सूर्यऔर मन चंद्रमा शांत होंगे तो जीवन अपने आप मंगलमय होने लगेगा खून संबंधी बीमारियां हृदय संबंधी बीमारियां जमीन संबंधी कार्य सफल करने के लिए इस दिन मंगल ग्रह की शांति करें जबकि चौथे दिन माता कुष्मांडा की पूजा का विधान है इसलिए उस दिन नसों संबंधी दिमाग और राज्य पद की प्राप्ति के लिए ग्रहों में युवराज बुध ग्रह की शांति करनी चाहिए
विज्ञान और वेदांत दोनों विषयों में निष्णात ज्योतिष वैज्ञानिक की उपाधि से सम्मानित डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल आगे बताते हैं की पंचम दिवस स्कंदमाता की पूजा का है स्कंध केले को भी कहा जाता है जो बृहस्पति ग्रह का कारक है इसलिए लीवर संबंधी अति विशिष्ट राज पद घर गृहस्ती में शांति और सुख की प्राप्ति हो इसके लिए बृहस्पति ग्रह का पूजन किया जाना चाहिए जबकि छठवें दिन कात्यायनी अर्थात सर्व मनोरथ पूर्ण करने वाली देवी के पूजन का विधान है और ग्रहों में छठे स्थान पर भोग विलास का कारक मनोरथ को पूर्ण करने वाले शुक्र ग्रह का स्थान है सप्तधातु संबंधी बल और वीर्य संबंधी स्त्रियों में मासिक धर्म और मूत्र संबंधी तथा इस मृत्युलोक में समस्त भोगों की प्राप्ति के लिए इस दिन शुक्र ग्रह का विशेष पूजन वैदिक पद्धति से होना चाहिए
मंत्रों की ध्वनि को यंत्रों में परिवर्तित कर असाध्य रोगों को ठीक करने वाले पति-पत्नी के आपसी संबंध विवाह एवं राजयोग संबंधी समस्त जन समस्याओं का समाधान करने की वजह से अंतरराष्ट्रीय छवि प्राप्त ज्योतिषाचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल का कहना है किसातवें दिन अर्ध रात्रि में माता कालरात्रि का पूजन किया जाता है और वह स्थान नवग्रहों में न्याय के देवता काल और दंड को साधने वाले शनि ग्रह को प्राप्त है इसलिए इस दिन उनकी पूजा और आराधना करने से समस्त सुखों की प्राप्ति होती है जबकि आठवें दिन मां दुर्गा के गौरी रूप का पूजन है उस दिन महिषासुर के रूप समुद्र मंथन में अमृत पान करने वाले राहु ग्रह की पूजा विधि विधान से की जाए तो कुंडली में राहु ग्रह की शांति हो जाती है जबकि नवमी के दिन सिद्धिदात्री हरियाली माता वंश वृद्धि करती है और ग्रहों में वंश वृद्धि का कारक केतु को माना गया है उस दिन केतु ग्रह की शांति हो जाए और तब दशमी के दिन हवन पूजन के साथ नवरात्र पारायण हो तो समस्त ग्रह पीड़ा से मनुष्य को मुक्ति मिल सकती है
अपनी सटीक भविष्यवाणियों की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्थान बना चुके ज्योतिष मर्मज्ञ डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल इशारा करते हैं कि राक्षस नाम का संवत्सर भूमि पुत्र मंगल राजा भी और स्वयं मंत्री भी हैं इसलिए भूकंप जैसी विभीषिका आने का पूरा डर रहेगा कोरोनावायरस पर नियंत्रण हो इस हेतु सभी लोगों को इन नवरात्रों में मां दुर्गा से देश और पूरे संसार की खुशहाली की प्रार्थना करनी चाहिए

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