अल्मोड़ा। जिले के अंतर्गत विकासखण्ड ताड़ीखेत में एक काश्तकार ने दुनिया में सबसे ऊंचाई का धनिया का पौधा उगाने में सफलता हासिल कर गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया है।

किसान का दावा है कि यह दुनिया का सबसे ऊंचा 2.16 मीटर (7 फुट एक इंच) पौधा है और इससे पहले जर्मनी में 1.80 मीटर (छह फुट) ऊंचा धनिया का पौधा उगाने का रिकॉर्ड है।

जी हां, यहां हम बात कर रहे हैं जिले के बिल्लेख निवासी प्रगतिशील किसान गोपाल दत्त उप्रेती की। वैसे तो उप्रेती पेशे से सिविल इंजीनियर हैं लेकिन आर्गेनिक खेती के काम में इनका कोई जवाब नहीं है।

बिल्लेख में इनका जीएस आर्गेनिक सेब का बगीचा है। इसी बगीचे में वह करीब 10 नाली (0.2 हेक्टेयर) क्षेत्र में आर्गेनिक पैटर्न पर धनिया और लहसुन की खेती और 70 नाली (1.5 हेक्टेयर) में सेब का बगीचा और अन्य सब्जी उगा रहे हैं।

अल्मोड़ा जिले के मुख्य उद्यान अधिकारी त्रिलोकी नाथ पांडे और विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान के वैज्ञानिक डॉ. गणेश चैधरी ने बीते अप्रैल माह में उनके बगीचे का निरीक्षण किया। उन्होंने देखा कि खेत में धनिये के सभी पौधे औसतन पांच फीट से ऊंचे ही थे।

इसके बाद बीती 28 मई को मुख्य उद्यान अधिकारी पांडे, जैविक उत्पाद परिषद मजखाली के इंचार्ज डॉ. देवेंद्र सिंह नेगी, उद्यान सचल दल केंद्र बिल्लेख प्रभारी राम सिंह नेगी ने फिर उनके बगीचे में पहुंचकर धनिया के पौधों की लंबाई नापी तो उसमें सबसे बड़ा धनिये का पौधा सात फुट एक इंच का निकला।

यही नहीं इसके अलावा उनके खेत में पांच से सात फीट ऊंचाई के धनिये के अन्य कई पौधे भी मिले। इसके बाद उप्रेती ने इस उपलब्धि के लिए गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड के लिए आवेदन किया और पौधे की ऊंचाई समेत सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए।

जैविक कृषि के क्षेत्र में काफी बड़ी उपलब्धि

किसान गोपाल दत्त उप्रेती का कहना है कि उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज होना सिर्फ उनके लिए ही नहीं बल्कि यह पूरे देश के सभी किसानों का सम्मान है। कहा कि विशेषतौर पर यह जैविक कृषि के क्षेत्र में काफी बड़ी उपलब्धि है। बकौल उप्रेती उत्तराखंड को जैविक कृषि का अपार संभावनायुक्त प्रदेश मानते हैं।

किसानों में बढ़ेगा जैविक खेती के प्रति रूझान

उन्होंने बताया कि जैविक कृषि के पीछे उनकी पत्नी वीना उप्रेती का भी कम योगदान नहीं है। पत्नी ने उन्हें इस ओर प्रेरित किया तब जाकर उनका रूझान जैविक कृषि की ओर गया है। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि को प्रदेश और देश के जैविक खेती करने वाले काश्तकारों को समर्पित किया है। उनका कहना है कि ऐसे अभिनव प्रयोग से राज्य एवं देश के किसानों में जैविक खेती के प्रति रूझान बढ़ सकेगा।

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