6 C
New York
Saturday, April 17, 2021
spot_img
HomeUttarakhand Migrants: ‘प्रवासी’ लोगों के लौटने के बाद से संकट में ‘पहाड़’

Uttarakhand Migrants: ‘प्रवासी’ लोगों के लौटने के बाद से संकट में ‘पहाड़’

लगता है अब पहाड़ भी संकट में पडऩे वाला है। पहाड़ की शांत वादियों को कोरोना महामारी अब धीरे-धीरे अपनी आगोश में लेने की तैयारी में है। अभी तक कोरोना से सुरक्षित बचा पहाड़ अब विभिन्न राज्यों से वापस घर लौट रहे प्रवासियों की दस्तक के बाद अशांत होता नजर आ रहा है।

यदि राज्य सरकार ने समय रहते पहाड़ में बाहर से आ रहे प्रवासी लोगों के समुचित कोरोना जांच आदि की व्यवस्था सुनिश्चित न की तो वह दिन दूर नहीं जब पहाड़ में यह महामारी विकराल रूप धारण कर लेगी और तब पहाड़ में मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते ऐसे में राहत और बचाव कार्य किस प्रकार से होंगे, इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।

यह खबर भी पढ़े- प्रदेश में कोरोना की बढ़ती चाल, संख्या पहुंची 120

उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में कोरोना महामारी की शुरूआत बीते 15 मार्च को सामने आए पहले रोगी के बाद से शुरू हो गई थी। लॉकडाउन के चलते शुरूआत में स्थितियां सामान्य रही, लेकिन अब समय के साथ यह महामारी शांत पहाड़ को भी अशांत करने में जुट गई है।

पहाड़ में कोरोना को लेकर हालांकि यह बात साफ है कि जब से पहाड़ में प्रवासी लोगों ने दस्तक देनी शुरू की है तब से अब पहाड़ में आए दिन कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यह बात सिर्फ पहाड़ के लोगों के लिए ही चिंता का विषय नही है बल्कि सरकार को भी इस पर गंभीरता से चिंतन मनन करना होगा।

अभी तक पहाड़ के जिलों में कोरोना को लेकर जांच आदि की बात की जाए तो वह नाममात्र की ही नजर आती है।

यह खबर भी पढ़े-  उत्तराखण्ड के प्रवासी लोगों को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

हालांकि आज हाईकोर्ट ने इस दिशा में बड़ा फैसला दिया है कि राज्य सरकार बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति की राज्य की सीमा पर ही सभी जांच करना सुनिश्चित करे और तब तक क्वारंटीन ही रखे।

कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही घर भेजने की कार्यवाही की जाए। लेकिन इस आदेश के बावजूद मौजूदा समय में पहाड़ के जो हालात हैं वह आने वाले समय में किसी भयंकर तूफान का संकेत दे रहे हैं।

प्रवासी लोगों को लेकर गांवों में डरे सहमे हैं ग्रामीण

पहाड़ के अधिकांश जिलों में बाहरी राज्यों से आ रहे प्रवासी लोगों की आवाजाही से ग्रामीण खासे आशंकित हैं। आलम यह है कि बगैर किसी जांच के उन्हें सीधे घरों में जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। कई गांवों में तो बगैर किसी आर्थिक सहायता के ग्रामीणों ने स्वयं ही क्वारंटीन सेंटर बना दिए हैं जहां पर प्रवासी या बाहर से आने वाले लोगों को निगरानी में रखा जा रहा है।

पहाड़ के लिए इसे बिडंबना ही कहेंगे कि कई दशकों के बाद प्रवासियों के यहां आने से जहां रौनक बढ़ जानी थी, वहीं मौजूदा समय में ग्रामीण इसे मुसीबत जैसा समझने को मजबूर हैं। हालांकि ग्रामीण भी ऐसे में करें तो करें क्या।

पहाड़ में जांच की रफ्तार प्रतिदिन 180 सैंपल

प्रदेश में प्रवासी लोगों के लौटने के बाद से पहाड़ अब संकट में आ गए हैं। यहां बाहरी राज्यों से आने वाले प्रवासी लोगों की जांच में बढ़ोतरी किए जाने की प्रबल आवश्यकता होनी चाहिए। लेकिन जांच के अभी तक के जो आंकड़े सामने आए हैं, उसके हिसाब से कुल अब तक हुए टेस्ट में से पहाड़ के आठ जिलों की हिस्सेदारी महज आठ फीसदी के आसपास है।

पर्वतीय जिलों में प्रतिदिन कोरोना जांच का औसत 180 है। बीते मंगलवार तक 12346 टेस्ट में से 1011 (8 प्रतिशत) टेस्ट पहाड़ी जिलों से हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक पर्वतीय जिलों में जांच की रफ्तार 180 सैंपल प्रतिदिन है।

19 मई तक पहाड़ी जिलों में हुई जांच का विवरण

जिला टेस्ट मामले
उत्तरकाशी 323 02
अल्मोड़ा 148 02
पौड़ी 121 03
चंपावत 103 00
रुद्रप्रयाग 74 00
चमोली 60 01
बागेश्वर 53 02
टिहरी 48 00

RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!