बुधवार चार नवंबर को कल वैवाहिक रिश्ते के प्रति अटूट प्रेम एवं पवित्रता का प्रतीक करवा चौथ पर्व है। इस पर्व के दिन सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु एवं कुशलता के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस बार करवा चौथ पर्व को लेकर नवविवाहित जोड़ों में खासी उमंग एवं उत्साह देखने को मिल रहा है।

ज्योतिष शास्त्रियों के मुताबिक करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। मान्यता है कि सुहागिनों के त्याग एवं तप का फल उन्हें अवश्य प्राप्त होता है। इसमें शिव-पार्वती और गणेश भगवान की पूजा की जाती है। चांद निकलने पर अर्घ्य देकर छलनी में पति का चेहरा देखा जाता है। पति के हाथों जल पीकर व्रत पूरा किया जाता है।

इस साल का यह है मुहूर्त

चतुर्थी तिथि- चार नवंबर सुबह 3.24 बजे से 5 नवंबर सुबह 5.14 बजे तके।
करवा चौथ मुहूत- शाम 5.29 बजे।
चंद्रोदय- रात 8.16 बजे।

सुहागिनें चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करें। व्रत खोलने के पश्चात पति और अपने से बड़ों का आशीर्वाद जरूर लें। यह बात जरूर ध्यान रखें कि पूजा की थाली में छलनी, आटे का दीया, फल, ड्राईफ्रूट, मिठाई और दो पानी के लोटे होने चाहिए।

सुहाग जिस चुन्नी को ओढ़कर कथा सुने उसी चुन्नी को ओढ़कर चंद्रमा को अर्घ्य दें। छलनी में दीया रखकर चंद्रमा को उसमें से देखे और फिर उसी छलनी से तुरंत अपने पति को देखें। इसके बाद आप बायना (खाना और कपड़े, दक्षिणा) निकालकर अपने बड़ों को दें और फिर खाना खाएं। भोजन में इस दिन लहसुन-प्याज वाला और तामसिक खाना न बनाएं।

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