तपोवन परियोजना की सुरंग में फंसे 35 से 40 कर्मियों को बचाने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। पिछले 100 घंटों से चल रहे बचाव कार्य की सारी गतिविधियां संभावनाओं पर चल रही हैं। जांबाज जी जान से लोगों की जिंदगी बचाने में जुटे हैं।
अंदर की सही जानकारी नहीं मिलने से प्रशासन भी स्पष्ट तौर पर कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। सुरंग के अंदर चल रहे रेस्क्यू के प्लान को बदने की रणनीति भी संभावनाओं के आधार पर ही की गई। उम्मीद की जा रही है कि जिन संभावनाओं को लेकर कार्य चल रहा है वह सही साबित हो।

सात फरवरी से टनल में जो बचाव कार्य चल रहा था उसे बृहस्पतिवार को बदल दिया गया। एनटीपीसी के अधिकारियों ने प्रशासन को बताया कि फंसे कर्मी मुख्य टनल के बजाय एसएफटी टनल में हो सकते हैं। इसी संभावना के आधार पर सुरंग में ड्रिल कर अंदर की स्थिति जानने की कोशिश की गई, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते यह काम आधे में ही रोक दिया गया, फिर पहले की तरह मलबा हटाने का काम जारी रखा गया।

सुरंग से मलबा हटाने में कितना समय लग जाएगा इसका जवाब प्रशासन के पास भी नहीं है। बृहस्पतिवार को प्रशासन, एनटीपीसी और एसडीआरएफ की संयुक्त पत्रकार वार्ता में भी सभी ने संभावनाओं के आधार पर ही जानकारियां साझा कीं। प्रशासन ने उम्मीद नहीं छोड़ी है, अभी भी आस है कि अंदर बचे लोग सुरक्षित निकाले जाएंगे।

वहीं, ऋषिगंगा में बृहस्पतिवार दोपहर अचानक पानी बढ़ने से अफरातफरी का माहौल बन गया। जिसके चलते कुछ देर के लिए बचाव कार्य सहित अन्य सभी कार्यों को रोक दिया गया। हालांकि बाद में जलस्तर में  कमी आने पर दोबारा कार्य शुरू कर दिए गए।

सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार बचाव कार्य चल रहा है। साथ ही पुल टूटने से अलग-थलग पड़े लोगों को अस्थायी व्यवस्था करने के लिए वैली ब्रिज और ट्रॉली लगाने का काम चल रहा है।

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उत्तराखंड के चमोली जिले के आपदा प्रभावित क्षेत्र तपोवन में गुरुवार को आज पांचवें दिन राहत बचाव कार्य के दौरान अचानक अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ गया। रैणी क्षेत्र में अलकनंदा नदी में पानी का बहाव बढ़ गया। इस वजह से राहत बचाव कार्यों में लगी मशीनों और कर्मियों को सुरंग से वापस बुलाया गया। लोगों को प्रभावित क्षेत्र से हटाया गया।

बताया गया कि अलकनंदा नदी का जल स्तर दो गुना ज्यादा हो गया है। सुंरग के पास करीब आधा किमी का क्षेत्र खाली कराया गया। लगातार अलकनंदा नदी में पानी का बहाव तेज होता रहा। जिस वजह से मौके पर अफरातफरी का माहौल रहा। लाउड स्पीकर के द्वारा सभी लोगों को सतर्क किया गया।

अभी तक चमोली आपदा में 170 लोग लापता हैं। 34 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं, जिनमें से नौ लोगों की शिनाख्त हो चुकी है। 12 मानव अंग क्षत-विक्षत हालत में मिले हैं। हेलीकॉप्टर से लगातार नीती घाटी के गांवों में राहत सामग्री वितरित की जा रही हैं।

बताया जा रहा है कि तीन किलोमीटर लंबी सुरंग के 180 मीटर पर एक मोड़ है। इसी मोड़ पर लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। जल प्रलय में लापता हुए अपनों की तलाश में तपोवन औैर रैणी पहुंचे लोगों सब्र का बांध टूटने लगा है। परियोजना की सुरंग से करीब 500 मीटर दूर बैठे लोग सुरंग के बाहर और अंदर मुस्तैद रेस्क्यू टीमों को बढ़ी उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं।

वर्तमान में एसडीआरएफ की आठ टीमों सहित अनेक राहत बचाव बल अभियान में शामिल हैं। रैणी गांव से श्रीनगर तक खोजबीन जारी है। ड्रोन ओर मोटरबोट से भी खोज की जा रही है। डॉग स्क्वार्ड टीम भी मौके पर है। अलकनंदा के तटों पर बायनाकुलर से भी सर्च अभियान जारी है।

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