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आज प्रात: तडक़े ब्रह्म मुहूर्त में चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट विधिवत पूजा अर्चना के साथ ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए। इसके साथ ही अब ग्रीष्मकाल में भगवान रूद्रनाथ जी की पूजा-अर्चना इसी धाम में सम्पन्न होगी।

रूद्रनाथ धाम के कपाट आज तडक़े सुबह 5 बजे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना के बाद ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए। इस दौरान शारीरिक दूरी का भी पूरा पालन किया गया। पहली बार कपाट खुलने पर धाम में गिनती के लोग उपस्थित रहे।

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गोपेश्वर। चतुर्थ केदार भगवान श्री रूद्रनाथ की उत्सव डोली आज परंपरागत पूजा-अर्चना के साथ रूद्रनाथ धाम रवाना हो गई। मंदिर में प्रवेश की इजाजत न मिलने के चलते स्थानीय श्रद्धालुओं ने अपने घरों से ही भगवान की उत्सव डोली पर पुष्प वर्षा की।

गोपेश्वर गांव की महिलाओं ने भगवान रुद्रनाथ को अर्घ् लगाया और विश्व शांति की कामना के साथ कोरोना महामारी से सम्पूर्ण विश्व की रक्षा की मनौती मांगी।

इससे पहले यहां गोपीनाथ मंदिर में पुजारी एवं श्रद्धालुओं ने डोली की पूजा कर मनौतियां भी मांगी। आगामी 18 मई को प्रात: 5 बजे रूद्रनाथ मंदिर के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोले जाएंगे। कोरोना महामारी के चलते रूद्रनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी समेत मंदिर समिति से जुड़े 20 लोगों को ही प्रशासन द्वारा रूद्रनाथ मंदिर में जाने की अनुमति दी है।

आज भगवान रुद्रनाथ की डोली यहां जिला मुख्यालय के नजदीकी ग्वाड़ और सगर गांव होते हुए रुद्रनाथ के लिए रवाना हुई। आज उत्सव डोली पनार बुग्याल में रात्रि विश्राम करेगी।

आज तडक़े सुबह से ही शीतकालीन गद्दी स्थल भगवान गोपीनाथ मंदिर में भगवान गोपीनाथ एवं रुद्रनाथ जी की विशेष पूजाएं शुरू हो गई थी। मंदिर के पुजारी हरीश भट्ट ने भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर सभी पूजाएं सम्पन्न कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया। इसके बाद सुबह 10 बजे रुद्रनाथ भगवान की उत्सव डोली को यहां से रवाना किया गया। मंदिर समिति के मुताबिक इस साल रूद्रनाथ में पूजा की जिम्मेदारी पुजारी वेदप्रकाश भट्ट को दी गई है।
भगवान रूद्रनाथ की उत्सव डोली के यहां से रवाना होने के बाद रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने फूल मालाओं के साथ स्वागत कर डोली के दर्शन कर मनौतियां मांगी।

दर्शन- पंच केदार

पंच केदार में प्रथम केदार केदारनाथ में भगवान शिव के पृष्ठ भाग के दर्शन होते हैं। द्वितीय केदार मद्महेश्वर में शरीर के मध्य भाग नाभी के दर्शन होते हैं। तृतीय केदार तुंगनाथ में भगवान की भुजाओं के एवं चतुर्थ केदार रूद्रनाथ में भगवान के मुखारविन्द व पंचम केदार कल्पेश्वर कल्पनाथ में भगवान शिव की जटाओं के दर्शन होते हैं।

यह भी जानें

चतुर्थ केदार भगवान रूद्रनाथ में जहां भगवान शिव के मुख के दर्शन होते हैं, वहीं फिर यह दर्शन नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर में होते हैं। रूद्रनाथ मंदिर की महत्ता का उल्लेख विभिन्न पुराणों व केदारखण्ड में भी मिलता है।

यहां होती है खास फूल से पूजा

रूद्रनाथ मंदिर में पूजा केवल दुर्लभ ब्रहम कमल (शोसरिया ओबिलाटा)फूल से की जाती है। मान्यता है कि जब पाण्डवों पर गोत्र हत्या का पाप लगा तो रूद्रनाथ के दर्शनों के पश्चात ही वह इस पाप से मुक्त हो पाए थे।

कैसे पहुंचे यहां

ऋषिकेश से श्रीनगर गढ़वाल होते हुए रूद्रप्रयाग, गौचर, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग से होते हुए चमोली से गोपेश्वर पहुंचा जा सकता है। यहां से करीब 23 किमी दूर स्थित मंदिर में पहुंचने के लिए करीब 18 किमी पैदल की दूरी तय करनी पड़ती है।

बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हवाई सेवा जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट तक उपलब्ध है। इसके बाद ऊपर दिए गए सडक़ मार्ग से यहां तक पहुंचा जा सकता है।

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