देहरादून। लगता है कि देवभूमि में केन्द्र व राज्य सरकार के नियम सिर्फ आम लोगों के लिए ही लागू किए जाते हैं। तभी तो इन नियमों की परिधि में उत्तराखण्ड की नौकरशाही शामिल नहीं है। अभी इसका ताजा उदाहरण पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के विधायक अमनमणि त्रिपाठी का है जो दलबल के साथ पहाड़ की सैर करने निकल गए और लॉकडाउन के चलते यहां के आला अधिकारियों ने उन समेत साथ में उनके एक दर्जन लोगों को पास जारी कर दिए गए, जिससे बेलगाम हो चुकी प्रदेश की नौकरशाही पर तमाम सवाल उठने लाजमी हैं।

वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण को लेकर केन्द्र सरकार द्वारा लॉकडाउन की स्पष्ट गाइडलाइन जारी की गई है। इस बीच यूपी के विधायक की तीन-तीन गाडिय़ों और उनके एक दर्जन लोगों को जाने की परमिशन देने से प्रदेश के उच्चाधिकारियों की कार्यप्रणाली का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस पर मजेदार बात तो यह कि अभी तक भू-बैकुंठ धाम श्री बदरीनाथ जी के कपाट ही नहीं खुले हैं और इस धाम जाने की अनुमति जारी कर दी जाती है। ऐसी स्थिति श्री केदारनाथ धाम की भी है यहां पर अभी तक किसी भी व्यक्ति को आवाजाही की अनुमति नहीं है। केन्द्र द्वारा जारी गाइडलाइन में चारधाम यात्रा को अनुमति नहीं है।

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प्रदेश में लॉकडाउन में जहां हर नागरिक अपनी तमाम दुश्वारियों के चलते परेशान है और अधिकारियों द्वारा पास जारी नहीं किए जा रहे हैं साथ ही निहायत जरूरी कार्यों तक के लिए पास जारी नहीं किए जा रहे हैं और गाइडलाइन का हवाला देकर पास के लिए ऑनलाइन आवेदन धड़ाधड़ निरस्त किए जा रहे हैं, वहीं एक विधायक को पास जारी करने के लिए सभी आला अधिकारी गाइडलाइन की फाइल बंद कर सामान्य दिनों की भांति अनुमति प्रदान करते हैं यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। दिलचस्प तो यह भी है कि राज्य के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के द्वारा अभी तक मामले में कार्रवाई करना तो रहा दूर, कोई प्रतिक्रिया तक जारी नहीं की गई है जिससे उनकी संवेदनहीनता का भी परिचय मिलता है।

अब देखना यह है कि इस प्रकरण में जीरो टालरेंस की सरकार क्या कार्रवाई अमल में लाती है और ऐसे अफसरों पर किस तरह से नकेल कसती है।

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