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Saturday, September 18, 2021
Homeहमारा उत्तराखण्डदेहरादूनआईएएमबीएसएस की शुक्रवार से 6 दिवसीय कार्यशाला होगी शुरू

आईएएमबीएसएस की शुक्रवार से 6 दिवसीय कार्यशाला होगी शुरू

इंटीग्रेटेड एसोसिएशन ऑफ मेडिकल, सोशल एंड बेसिक साइंटिस्ट्स (आईएएमबीएसएस) के तत्वावधान में शुक्रवार से 6 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। शोध से राष्ट्र निर्माण विषयक यह कार्यशाला 4 अगस्त तक चलेगी।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश, आई.सी.एम.आर-पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ एवं सरदार भगवान सिंह विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित कार्यशाला में देशभर के वैज्ञानिक, चिकित्सक व शोधार्थी शिरकत करेंगे।

कार्यशाला की संयोजक एवं सरदार भगवान सिंह विश्वविद्यालय की सहायक आचार्य प्रियंका उनियाल ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य स्वास्थ्य एवं अनुसंधान क्षेत्र से जुड़े डॉक्टर्स, छात्रों, बुद्धिजीवियों में लेखन और आधार सामग्री का उन्नत, सुनियोजित एवं प्रभावपूर्ण तरीके से प्रस्तुतिकरण का विकास करना है, जिसमें देशभर के विभिन्न मेडिकल संस्थानों के विज्ञान, अनुसंधान से जुड़े छात्रों की भागीदारी रहेगी।

आईएएमबीएसएस के संस्थापक एवं एम्स ऋषिकेश के सीनियर रेजिडेंट डॉ. जितेन्द्र गैरोला ने बताया कि संगठन का उद्देश्य चिकित्सा स्वास्थ्य, शोध एवं सामाजिक जन-जागरूकता को एक साथ लाकर बेहतर राष्ट्र निर्माण की संकल्पना है। जिससे देश में शिक्षा एवं अनुसंधान को बहुआयामी मापदंडों के अनुरूप ढाला जा सके।

बताया गया है कि कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिक एवं प्रोफेसर्स व्याख्यानमाला प्रस्तुत करेंगे, इनमें पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ की टेलीमेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मीनू सिंह, एफ.आर.आई. से डा. राजीव पांडेय, एम्स के मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष गोयल, डॉ. अमित अग्रवाल, डॉ. निपुण वर्मा, डॉ. बलरामजी ओमर, डॉक्टर मनीषा नैथानी, प्रोफेसर प्रतिमा गुप्ता, डॉ. अमित अग्रवाल, डॉ. उज्ज्वल, डॉ. प्रमोद व डॉ. योगेश बहुरूपी प्रमुखरूप से शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के उद्धघाटन एवं चर्चा सत्र में एम्स ऋषिकेश के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत, सरदार भवान सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. के. सिंह समेत विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिक एवं प्रोफेसर्स उपस्थित रहेंगे।

कार्यशाला के सह संयोजक एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग, गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ. अक्षत उनियाल ने बताया कि इस कार्यशाला से उत्कृष्ट अनुसंधान लेखन में आधुनिक प्रवृत्तियों का समावेश शोधकर्ताओं और विज्ञान से जुड़े छात्रों को अवश्य ही लाभान्वित करेगा।

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