रुड़की। लगता है कि कोरोना काल में लोग इंसानियत का धर्म भी भूल गए हैं। पहले ही जहां कोरोना संक्रमित को लोग बुरी नजर से देख रहे हैं, वहीं यदि कोई रोगी इस बीमारी से काल का ग्रास बन गया तो फिर इंसानियत उसके आगे शर्मसार होती जा रही है।

ऐसे ही वाकया उत्तराखंड के रुड़की में घटित हुआ, जहां कोरोना के डर के चलते मकान मालिक ने किरायेदार का शव घर लाने से इनकार कर दिया। ऐसे में बनारस से पहुंचे परिवार के लोग शव को श्मशान घाट ले गए। यहां उन्होंने पूरी रात शव के साथ गुजारने के बाद अगली सुबह शहर के कुछ लोगों की मदद से अंतिम संस्कार की कार्यवाही पूर्ण की।

कोरोना महामारी का खौफ लोगों के दिल में इस कदर बैठ गया है कि वह इसके आगे सब कुछ भूल गए हैं। आलम यह है कि लोग कोरोना काल में इंसानियत का धर्म निभाना भी भूल गए हैं। उत्तर प्रदेश के बनारस निवासी महेंद्र सिंह रुड़की के सलेमपुर में किराये का कमरा लेकर एक फैक्टरी में नौकरी कर रहे थे, जबकि उनका परिवार बनारस में रहता है।

मंगलवार सुबह अचानक सीने में शिकायत होने पर साथियों ने उनको एक निजी अस्पताल में भर्ती किया था। साथ ही उनके परिवार को जानकारी दी तो वह शाम को ही रुड़की पहुंच गए। मंगलवार की शाम उपचार के दौरान हृदयगति रुकने से उनकी मौत हो गई। परिवार के लोग शव को उसके कमरे पर ले जाने लगे तो मकान मालिक ने फोन कर घर आने से इनकार कर दिया। इस पर परिवार वाले परेशान हो गए।

मकान मालिक से वार्ता के बाद वह रात में ही शव को लेकर मालवीय चैक स्थित श्मशान घाट पहुंचे। पार्षद संजीव कुमार व अन्य कुछ लोगों को पता चला तो वह भी श्मशान घाट पहुंचे और परिवार के लिए खाने की व्यवस्था की। साथ ही ढांढस बंधाते हुए मदद का आश्वासन दिया। इस बीच परिवार ने शव के साथ पूरी रात श्मशान घाट में ही गुजारी।

बुधवार सुबह परिवार ने अंतिम संस्कार के लिए सामान की व्यवस्था की। साथ ही शव को गाड़ी से हरिद्वार पहुंचाकर अंतिम संस्कार कराया। समाजसेवी देशबंधु ने बताया कि सूचना मिलते ही वह पार्षद के साथ श्मशान घाट पहुंचे और हरसंभव मदद की। हरिद्वार में विधि विधान से अंतिम संस्कार करा दिया।

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