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Monday, June 14, 2021
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Covid-19: मधुमेह रोगी कैसे रखें मधुमेह को नियंत्रित

पूरे विश्व में कोरोना वायरस कोविड-19 का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार 5 जुलाई 2020 तक विश्वभर में 1,11,25,245 कोविड संक्रमित मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कोरोना संक्रमितों की मौत का आंकड़ा 5,28,204 तक पहुंच चुका है।

भारत में भी यह संख्या दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ रही है। वैसे तो कोरोना वायरस किसी को भी संक्रमित कर सकता है, मगर चिकित्सकों के मुताबिक इससे उन लोगों को ज्यादा खतरा है, जिन्हें पहले से कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है अथवा जो लोग उम्रदराज हैं।

आमतौर पर कोरोना से संक्रमित रोगियों में 80 प्रतिशत में केवल माइल्ड लक्षण ही मिलते हैं, 15 फीसदी रोगियों में गंभीर बीमारी होती है और शेष 5 फीसद लोगों में यह संक्रमण जानलेवा हो सकता है। द लांसेट जर्नल के एक अध्ययन के मुताबिक जो लोग उम्रदराज हैं या जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, गुर्दे के रोग और डायबिटीज जैसी बीमारियां हैं, उनमें कोरोना वायरस से गंभीर बीमारी और जान जाने का ज्यादा खतरा है। चीन में वुहान के दो अस्पतालों के 191 मरीजों पर किए गए शोध में भी यह बात सामने आ चुकी है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रो0 रवि कांत ने कहा कि कोरोना वायरस का संक्रमण डायबिटीज के रोगियों के लिए खतरनाक है। उन्होंने बताया कि डायबिटीज के रोगियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अन्य सामान्य लोगों के मुकाबले बहुत कम होती है। इससे रक्त में ग्लूकोज की अधिकता हो जाती है और संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ता है।

निदेशक एम्स ने मधुमेह के रोगियों को कोरोना काल में विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा है। उन्होंने जोर दिया कि हमें कोरोना काल में इस बात पर गंभीरता से ध्यान देना होगा कि इस अवधि के दौरान मधुमेह को कैसे नियंत्रित रखा जाए।

संस्थान के मधुमेह रोग विशेषज्ञ डा. रविकांत ने बताया कि भारत में डायबिटीज के रोगियों की संख्या बहुत अधिक है। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के मुताबिक भारत में 2019 तक डायबिटीज के रोगियों की संख्या 7 करोड़ थी और यह संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है।

कोरोना वायरस के संक्रमण के लगातार बढ़ने और डायबिटीक रोगियों में इसके गंभीर परिणाम के मद्देनजर विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा डाइबिटीज के रोगियों के लिए गाइडलाइंस जारी की गई हैं। जिसमें रोगियों को कोविड संक्रमण से बचने के लिए जरूरी सावधानियां बताई गई हैं।

डायबिटीज के रोगियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से ब्लड में शुगर की मात्रा अधिक होने जाने पर वायरस के शरीर में जीवित रहने के आसार बढ़ जाते हैं। लिहाजा डायबिटीज के रोगियों के लिए सबसे प्राथमिक ध्यान देने वाली बात है कि उनकी ब्लड शुगर मात्रा नियंत्रित होनी चाहिए।

डब्ल्यूएचओ द्वारा डायबिटीज रोगियों के लिए जारी हेल्थ एडवाइजरी

भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचेंः यूं तो भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर सरकार द्वारा लाॅकडाउन रखा गया व अभी भी अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले स्थानों को फिलहाल बंद रखा गया है, जिससे व्यक्ति से व्यक्ति के मध्य पर्याप्त दूरी के अभाव में कोविड-19 का संक्रमण एक-दूसरे में नहीं फैल सके, मगर फिर भी कई स्थितियों में जगह-जगह लोगों की भीड़ देखने को मिल जाती है। डायबिटीज के मरीजों को ऐसे स्थानों पर जाने से विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, तभी वह स्वयं को कोरोना के संक्रमण से सुरक्षित रख सकते हैं।

सफाई का विशेष ध्यान रखेंः अपने हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोएं, सेनिटाइजर का उपयोग करें। अपने चेहरे, आंख व नाक को बार-बार छूने से बचें। लोगों से मेल जोल कम करें, यदि किसी से मिलना आवश्यक हो तो ऐसी स्थिति में किसी से हाथ नहीं मिलाएं।

व्यायाम और आहार पर ध्यान देंः भीड़-भाड़ पर प्रतिबंध के चलते बेशक आप घर के बाहर पार्क में भले ही नहीं जा पा रहे हों, मगर अपना नियमित व्यायाम नहीं छोड़ें। जिसे कि घर पर रहकर भी किया जा सकता है। लिहाजा घर पर ही एक निर्धारित दिनचर्या बनाए रखें, छत पर सैर अथवा व्यायाम करें। पौष्टिक आहार लें, यदि सब्जियां उपलब्ध नहीं हो रही हों, तो दाल, सोयाबीन पर्याप्त मात्रा में ले। अपने चिकित्सक से खानपान से संबंधित परामर्श लें। पानी का इस्तेमाल भरपूर मात्रा में करें।

ब्लड शुगर लेवल को नियमित चेक कराएंः डायबिटीज के मरीजों को यूं तो आमतौर पर अपना ब्लड शुगर चेक कराते रहना चाहिए, मगर कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए यह और भी जरुरी हो गया है। ऐसे में आपके पास आने वाले समय के लिए पर्याप्त मात्रा में शुगर मापने वाली स्ट्रिप्स होनी चाहिए।

अपने प्राथमिक चिकित्सक के साथ दूरभाष के जरिए नियमित संपर्क में रहें तभी बढ़े हुए शुगर लेवल के लिए उनसे परामर्श लें। कोशिश करें कि आने वाले कुछ महीनों की दवाई और अन्य जरुरी सामग्री आपके पास उपलब्ध हो। टाइप-1 डायबिटीज या अन्य मरीज जो इंसुलिन ले रहे हैं, वह अपने किटोंस भी नियमित तौर पर चेक कराते रहें।

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