नैनीताल। उच्च न्यायालय ने आज अन्य प्रदेशों से आ रहे राज्य के प्रवासी लोगों को लेकर बड़ा फैसला दिया है।
कोर्ट ने बाहरी क्षेत्रों से प्रदेश में आ रहे प्रवासी लोगों की थर्मल जांच के साथ ही कोरोना रेपिड टेस्टिंग और एंटीजिंग जांच की व्यवस्था के मामले में दायर याचिका पर आज सुनवाई की।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि रेड जोन से उत्तराखंड आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आवश्यक रूप से सीमा पर संस्थागत क्वारंटीन किया जाए।

साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि कोरोना टेस्ट भी जरूरी रूप से हो और इसकी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही ऐसे लोगों को घर भेजने की कार्यवाही अमल में लाई जाए।

बुद्धवार को आज न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया व न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कांफ्रेसिग के माध्यम से इस मामले की सुनवाई सम्पन्न हुई।

यह भी पढ़े- हरिद्वार एवं उत्तरकाशी में मिले कोरोना रोगी, संख्या पहुंची 113

हरिद्वार के सचिदानन्द डबराल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कोरोना महामारी से बचाव के लिए घोषित लॉकडाउन के तहत प्रभावित लोंगों की मदद की गुहार लगाई थी।

इस प्रकरण से संबंधित अन्य विभिन्न जनहित याचिकाओं पर संयुक्त रूप से सुनवाई हुई। पूर्व में सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया था कि सूबे में अन्य राज्यों के करीब 40 हजार मजदूर हैं, जबकि करीब दो लाख उत्तराखंड के लोग देश के विभिन्न प्रदेशों में फंसे हुए हैं और वह वापस यहां अपने गृह प्रदेश में आना चाहते हैं।

बताया गया कि राज्य के ऐसे प्रवासी लोगों ने वापस आने के लिए सरकार के आनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण करा चुके हैं।

सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि देश के विभिन्न प्रदेशों से आने वाले प्रवासी लोगों का कोरोना परीक्षण एवं देखभाल के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने 49 राहत शिविर लगाए हैं। मामले में अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here