अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश में कोविड-19 वैक्सीनेशन के तहत अब तक कुल 3,554 हैल्थ केयर वर्करों को कोविड वैक्सीन लगाई जा चुकी है। टीकाकरण अभियान में तेजी लाने के उद्देश्य से कोविड वैक्सीनेशन सेंटर में अलग-अलग 10 काउंटर स्थापित किए हैं।

गौरतलब है कि देशभर में कोविड वैक्सीन के टीकाकरण की शुरुआत बीते महीने 16 जनवरी से हुई थी। एम्स ऋषिकेश में चलाए जा रहे कोविड टीकाकरण अभियान के तहत फैकल्टी, नर्सिंग ऑफिसर्स, तकनीशियन, सपोर्टिंग स्टाफ, सुरक्षाकर्मियों, सफाई कर्मी और संस्थान के अन्य कर्मचारियों को टीके लगाए जा रहे हैं।

एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने टीकाकरण अभियान के बाबत बताया कि 16 जनवरी से अब तक संस्थान के 65 प्रतिशत से अधिक स्टाफ को कोविड वैक्सीन लगाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि अभियान की शुरुआत में कोविड एरिया में ड्यूटी दे रहे फ्रंट लाइन हैल्थ केयर वर्करों का प्राथमिकता से टीकाकरण किया गया था। जबकि इसके बाद अब एम्स में कार्यरत अन्य कार्मिकों को भी चरणबद्ध तरीके से टीके लगाए जा रहे हैं। निदेशक एम्स ने कहा कि भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक हैल्थ केयर वर्कर को पहले टीके के ठीक 28 दिन बाद दूसरा टीका लगाया जाना है।

उल्लेखनीय है कि एम्स के आयुष भवन में बनाए गए कोविड टीकाकरण केंद्र में इस अभियान को सफल बनाने के लिए कम्युनिटी एंड फेमिली मेडिसिन विभाग विशेष भूमिका निभा रहा है। सीएफएम विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सैना दैनिक तौर पर स्वयं इस अभियान की माॅनिटरिंग कर रही हैं। प्रो. वर्तिका सक्सैना ने बताया कि संस्थान में कुल 5,632 लोगों का स्टाफ कार्यरत है। जिनमें से अब तक 3,554 लोगों को कोविड वैक्सीन लगाई जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि टीकाकरण अभियान में तेजी लाने के उद्देश्य से कोविड वैक्सीनेशन सेंटर में बीती 2 फरवरी से 10 अलग-अलग टीकाकरण काउंटरों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जिससे कोविड नियमों का पालन करते हुए कम समय में अधिक से अधिक लोगों का टीकाकरण किया जा सके और टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े।

उन्होंने कोविड वैक्सीन को पूरी तरह से भरोसेमंद और सुरक्षित बताया। बताया कि सभी लोग स्वैच्छा से कोविड वैक्सीन लगाने के लिए आगे आ रहे हैं। टीकाकरण अभियान के दौरान सीएफएम विभाग की डा. रंजीता कुमारी, डा. महेंद्र सिंह, डा. योगेश बहुरूपी, डा. अजीत भदौरिया आदि मौजूद थे।

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