देहरादून। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो आने वाले समय में कूड़े से तैयार बिजली से उत्तराखण्ड के कई घर रोशन होंगे। नगरीय क्षेत्रों में हर दिन निकलने वाले कूड़े से बिजली बनाने की योजना है। यह योजना प्रदेश सरकार उत्तराखण्ड के छह शहरों में लागू करने की तैयारी में है। राज्य पर्यावरण रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखण्ड में खेतों से निकलने वाले पराली एवं अन्य के साथ स्थानीय निकायों में निकलने वाले कचरे से प्रदेश में 300 मेगावाट बिजली बनाई जा सकती है। प्रदेश में उद्योगों व खेतों आदि से 200 लाख टन कचरा निकलता है।

मंगलवार को विधानसभा में आयोजित बैठक में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने शहरी विकास विभाग के अधिकारियों को इसकी योजना तैयार करने का निर्देेश दिया। कहा कि प्रदेश सरकार की कोशिश इस कचरे का उपयोग करने की है। उन्होंने रुड़की में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाने का निर्देश दिया। इसके साथ ही हल्द्वानी, काशीपुर, ऋषिकेश, रुद्रपुर और कोटद्वार में भी इस तरह के प्लांट स्थापित करने की योजना तैयार करने की बात कही। श्री कौशिक ने कहा कि एक माह बाद इसकी समीक्षा भी की जाएगी।

बैठक में श्री कौशिक ने कहा कि प्रदेश के निकायों में रहने वाले लोगों के घरों से निकलने वाले दैनिक कचरे के निपटान की समस्या है। हाल ये है कि निकाय अभी हर घर से कूड़ा नहीं उठा पा रहे हैं। जो कूड़ा उठ भी रहा है उसका 50 प्रतिशत ही डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचता है। कहा कि हर घर से कचरा उठाने और स्रोत पर ही कूड़े को अलग-अलग करने की व्यवस्था की जाए। इसके लिए 14वें वित्त आयोग के पैसे का उपयोग तब तक किया जाए, जब तक यह काम पूरा नहीं हो जाता। बताया कि वित्त आयोग की ओर से निकायों को अलग से पैसा दिया गया है।

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