बीते मार्च माह में विधानसभा सत्र के दौरान सरकार द्वारा की गई घोषणा के मुताबिक प्रदेश राज्यपाल ने आज भराड़ीसैंण (गैरसैंण) को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी के फैसले पर मोहर लगा दी।

इस अधिसूचना के बाद अब भराड़ीसैंण (गैरसैंण) उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बन गई है। इसके आदेश भी आज सोमवार को जारी कर दिए गए हैं।

मालूम हो कि बीते मार्च माह में गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भराड़ीसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने की घोषणा की थी।

सरकार के इस निर्णय पर आज राज्यपाल ने अपनी मुहर लगा दी। अब आने वाले समय में ग्रीष्मकाल के दौरान सरकार गैरसैंण के भराड़ीसैंण से संचालित हो सकेगी।

गैरसैंण। आखिरकार सरकार मान ही गए। भाजपा ने अपना एक चुनावी संकल्प का वादा पूरा करने में सफलता हासिल कर ली। लंबी प्रतीक्षा कराने के बाद त्रिवेन्द्र सरकार ने गैरसैंण को स्थायी न सही ग्रीष्मकालीन राजधानी की मांग को आज पूरा कर दिया। हालांकि यह सब इतने गोपनीय तरीके से हुआ कि किसी को भी कुछ खबर नहीं लगी। बहरहाल, राज्य सरकार की इस पहल का सभी को स्वागत करना चाहिए।

सरकार द्वारा गैरसैंण में आयोजित बजट सत्र के दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण(भराड़ीसैंण) को राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर सब को चौंका दिया। हालांकि अभी कुछ समय पूर्व विधायक कर्णप्रयाग सुरेन्द्र सिंह नेगी ने सीएम व भाजपा के आला नेताओं से मिलकर इस सत्र में गैरसैंण को राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने की मांग की थी।

राज्य गठन से पूर्व ही देवभूमि उत्तराखंड में राजधानी का मुद्दा यहां की मूल जनभावनाओं से जुड़ा रहा है। उक्रांद समेत तमाम आंदोलनकारियों एवं संगठनों ने राज्य आंदोलन के दौरान ही गैंरसैंण को राजधानी के तौर पर प्रचारित किया जाता रहा है। हालांकि प्रदेश में राजधानी को लेकर यहां का आम जनमानस हमेशा यही मांग करता आया है कि पहाड़ी राज्य की राजधानी पहाड़ में ही होनी चाहिए। और संभवतया यही कारण है कि प्रमुख राजनैतिक दल कभी गैरसैंण को अलग नहीं रख पाए।

हालांकि ऐसा नहीं है कि वर्तमान सीएम पर ही इसके लिए दबाव रहा, बल्किसूबे के पूर्व सीएम हरदा पर भी इसके लिए पूरा दबाव बना था। लेकिन उन्होंने घोषणा नहीं की। संभवतया इसी दबाव के चलते उनके द्वारा गैरसैंण में विधानमंडल भवन बनाया गया। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में सरकार अपनी इस ग्रीष्मकालीन राजधानी को किस प्रकार से विकसित करती है यह आने वाले समय में देखने की बात होगी।

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