6 C
New York
Wednesday, April 21, 2021
spot_img
Homeहमारा उत्तराखण्डआस्था के आगे ठंड नतमस्तकः यहां माइनस 4 डिग्री तापमान पर भी...

आस्था के आगे ठंड नतमस्तकः यहां माइनस 4 डिग्री तापमान पर भी आस्था भारी

सामान्य तौर पर इन दिनों जहां हम लोग 5 से 7 डिग्री न्यूनतम तापमान को हाड़ कंपाने वाली ठंड समझकर बेहाल हो रहे हैं, वहीं भू-बैकुंठ श्री बदरीनाथ धाम में 17 साधु महात्मा साधना में लीन हैं। धाम में इन दिनों तापमान -4 डिग्री तक पहुंच रहा है और लगभग दो फीट बर्फ जमी हुई है। लेकिन आस्था के आगे ठंड भी नतमस्तक है।

आलम यह है कि जर्बदस्त ठंड भी इन साधुओं की आस्था को नहीं डिगा पा रही है। बता दें कि बीती 19 नवंबर को धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो चुके हैं, लेकिन 17 साधुओं ने धाम में रहकर ही तप करने की अनुमति जोशीमठ तहसील प्रशासन से मांगी है।

श्री बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल में बंद होने के बाद धाम में रहने वाले साधुओं के लिए उनके भक्त शीतकालीन अवधि लगभग छह माह के लिए खाद्यान्न आदि का भंडारण पहले ही कर लेते हैं। बदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष अनसूया प्रसाद भट्ट का कहना है कि शीतकाल में बदरीनाथ धाम में चारों ओर शांति ही शांति रहती है। कई साधु-संत बदरीनाथ धाम में पिछले कई वर्षों से रह रहे हैं और वहां की ठंड में रहने के लिए वह अभ्यस्थ हो गए हैं।

इधर, उपजिलाधिकारी जोशीमठ कुमकुम जोशी ने बताया कि बदरीनाथ धाम में तपस्या करने की अनुमति देने से पहले साधु-संतों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया था। इस दौरान कोई भी साधु मुख्य मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता। अनुमति के बगैर किसी भी व्यक्ति को हनुमान चट्टी से आगे जाने की अनुमति नहीं है।

ठंड एवं बर्फ के बीच सिर्फ बदरीनाथ धाम में ही नहीं बल्कि गंगोत्री धाम क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर 28 साधु साधनारत हैं। बिना किसी संसाधन के यह साधु हिमाच्छादित कंद्राओं में रहकर योग, ध्यान में एक दशक से लीन हैं। शीतकाल में गंगोत्री मंदिर के कपाट बंद होने और अत्यधिक बर्फबारी के कारण गंगोत्री धाम में तापमान माइनस 0 डिग्री पर पहुंच जाता है।

कंद्राओं में निवासरत साधु अलाव के सहारे ध्यान में लीन रहते हैं। वह बर्फ पिघलाकर पानी पीते हैं। गंगोत्री नेशनल पार्क के वन क्षेत्राधिकारी प्रताप पंवार ने बताया कि इस वर्ष गंगोत्री धाम में 25, तपोवन में दो और भागुलवासा में एक साधु साधनारत है। कपाट बंद होने से पूर्व वह प्रशासन से यहां साधना की अनुमति लेते हैं।

उपजिलाधिकारी भटवाड़ी देवेंद्र नेगी ने बताया कि साधुओं को प्रशासन की ओर से मिट्टी तेल उपलब्ध कराया जाता है, जिन साधुओं के राशन कार्ड बने हैं उन्हें जिला पूर्ति विभाग रसद मुहैया कराता है। किसी साधु के बीमार होने की सूचना पर प्रशासन उन्हें दवाई भी उपलब्ध कराता है। बताया कि यमुुुनोत्री क्षेत्र में कोई भी साधु साधनारत नहीं है।

वहीं केदारनाथ धाम से लगभग दो किमी पहले मंदाकिनी नदी के दूसरी तरफ स्थित गरुड़ चट्टी में ललित महाराज समेत पांच साधु निवास कर रहे हैं, जो वर्षों से वहां रहते आ रहे हैं। जिलाधिकारी मनुज गोयल ने बताया कि केदारनाथ में शीतकाल में रहने के लिए किसी भी साधु ने कोई पंजीकरण नहीं कराया है। सिर्फ छह साधुओं के बारे में जानकारी है, जो गरुड़ चट्टी में रह रहे हैं।

RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!